आजादी के 75 वर्षों बाद भी मेलघाट के 21 दुर्गम गांवों में बिजली नहीं पहुंची
विधायक सुलभा खोडके ने बजट सत्र में उठाया मेलघाट की बदहाली का मुद्दा

मुंबई/दि.10 – देश को आजादी मिले हुए 75 वर्षों से भी अधिक समय बीत चुका है. लेकिन इतने वर्षों बाद भी आदिवासी बहुल मेलघाट क्षेत्र के 21 दुर्गम गांवों में आज तक बिजली नहीं पहुंची है, जिसके कारण इन गांवों के लगभग 90 से 100 परिवार अब भी अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं. यह जानकारी अमरावती निर्वाचन क्षेत्र की विधायक सुलभा खोडके ने राज्य विधान मंडल में बजट सत्र के दौरान देते हुए सरकार से पूछा कि आदिवासी बहुल मेलघाट क्षेत्र की धारणी व चिखलदरा तहसीलों के दुर्गम व अतिदुर्गम गांवों तक बिजली आखिर कब पहुंचेगी.
राज्य विधिमंडल के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में यह मुद्दा उठाते हुए विधायक खोडके ने बताया कि अमरावती जिले के धारणी, मेळघाट और चिखलदरा क्षेत्र में कई अत्यंत दुर्गम आदिवासी गांव हैं. इनमें से करीब 21 गांवों में आज तक बिजली आपूर्ति नहीं हो पाई है. इस मुद्दे को जिला नियोजन समिति की बैठकों और विधानसभा में कई बार उठाया गया, लेकिन अभी तक ठोस व्यवस्था खड़ी नहीं हो सकी है. उन्होंने कहा कि कुछ गांवों में क्षमता वृद्धि और मरम्मत का काम चलने की जानकारी दी जाती है, जबकि कुछ जगहों पर अभी ई-टेंडर की प्रक्रिया ही जारी है. इससे स्पष्ट होता है कि कई स्थानों पर अभी तक वास्तविक काम शुरू नहीं हो पाया है. उन्होंने यह भी बताया कि इन क्षेत्रों में बिजली परियोजनाओं के लिए वन विभाग से अनुमति और भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण काम अटका हुआ है. विधायक खोडके ने सदन का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि मेलघाट क्षेत्र के करीब 40 गांवों में आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे विकास कार्यों में और अधिक कठिनाई हो रही है.
इस पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मेलघाट के कुछ दुर्गम गांवों में ग्रिड से बिजली पहुंचाना संभव नहीं है. इसलिए वर्ष 2018 से सौभाग्य योजना के माध्यम से घर-घर सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया था. हालांकि ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम कुछ समय बाद बंद पड़ने की समस्या सामने आई. उन्होंने यह भी बताया कि अब इन गांवों में सोलर माइक्रो ग्रिड प्रणाली विकसित करने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत बड़े क्षमता वाले सोलर प्लांट स्थापित कर बैटरी स्टोरेज के माध्यम से प्रत्येक घर तक बिजली पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है. कुछ गांवों में काम शुरू हो चुका है और रखरखाव के लिए कुछ स्वयंसेवी संस्थाएं भी सहयोग कर रही हैं. सरकार ने इस योजना के लिए करीब 20 करोड़ रुपये की राशि भी उपलब्ध कराई है. मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि दुर्गम क्षेत्रों में बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जाएंगी.