सोलर लगाकर भी जेब पर भार, जीरो बिल का दावा कागजी

महावितरण और कंपनी की नीतियों में पिस रहा उपभोक्ता

* फिक्स चार्जेस से मिल रहा 500 रूपए तक बिल
अमरावती/ दि. 12- अब बिजली बिल की छुट्टी. ऐसे आश्वासन से घर की छत पर लाखों रूपए खर्च कर सोलर पैनल लगवानेवाले उपभोक्ताओं का भ्रम टूट रहा है. महावितरण की जटिल नियमावलि तथा तकनीकी कारणों से सोलर बिजली पैदा करने के बावजूद जेब पर भार पड रहा है. उपभोक्ताओं में इसके कारण असंतोष देखा जा रहा है. उपभोक्ता मंच के गजानन पांडे ने साफ आरोप लगाया कि महावितरण और कंपनियों की नीति के मध्य सामान्य उपभोक्ता पिसे जा रहे हैं. उन्होंने जीरो बिल का वादा करनेवाली कंपनियों से अपनी बात पूरी करने की मांग रखी. दूसरी ओर प्रशासकीय दिक्कतें दूर करने की अपेक्षा भी व्यक्त की है.
क्यों नहीं आता जीरो बिल
सोलर पैनल लगाने के बाद शून्य बिल क्यों नहीं आ रहा, इसके कुछ प्रमुख कारण बताए जा रहे है. ग्राहकों की यूनिट रीडिंग शून्य रहने पर भी महावितरण कंपनी फिक्स चार्जेस और टैक्स वसूलती है. जिससे कम से कम 200 और 500 रूपए के बिल हाथ में आते हैं. उसका झटका उपभोक्ताओं को सहन करना पड रहा है. बिजली कंपनी बुनियादी सुविधाओं के रख- रखाव का शुल्क वसूल करने की बात हो रही है.
नेट मीटरिंग नहीं होती समय पर
कई स्थानों पर सोलर पैनल स्थापित करने के महीनों बीत जाने पर भी महावितरण कंपनी नेट मीटरिंग की प्रक्रिया पूर्ण नहीं करती. जिससे उपभोक्ता को पुराने रेट पर भुगतान करना पडता है. सोलर लगाने के बाद अब बिल नहीं आयेगा, इस मानसिकता से उपभोक्ता गीजर, एसी का उपयोग बढा देते हैं. ऐसे में उत्पादन से अधिक इस्तेमाल होने पर अतिरिक्त बिल आता है.
2 लाख रूपए खर्च का तीन किलो वाट की सिस्टम लगाते समय उपभोक्ताओं से बिल शून्य हो जाने की बातें की जाती है. किंतु अनेक उपभोक्ताओं की शिकायत है कि पिछले तीन माह से उन्हें 500- 700 रूपए बिल आ रहा है. फिर इतनी बडी रकम के निवेश का फायदा क्या ? सोलर पैनल पर धूल और पक्षियों की बीट से कार्यक्षमता 30 प्रतिशत तक कम हो जाती है. कई ग्राहकों को इसकी कल्पना नहीं होती. अपेक्षित बिजली नहीं बनती.

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