बिना जातिवैधता के ‘एसटी रिजर्व’ स्वास्थ्य सेवा पदों पर पांच लोगों की घुसखोरी
‘उन’ पांचों को सेवामुक्त करने हेतु राज्य सरकार से गुहार

अमरावती /दि.9 – राज्य में पुलिस उपनिरीक्षक बैच क्र. 126 में अनुसूचित जनजाति हेतु आरक्षित पदों पर 7 लोगों द्वारा की गई घुसखोरी का मामला ताजा रहने के दौरान ही अब सोलापुर जिला परिषद ने स्वास्थ्य सेवक के 50 फीसद पदों हेतु चयन सूची के अनुसार अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के अभ्यर्थियों को 28 मार्च 2025 को नियुक्ति आदेश जारी किए. इसमें भी 5 लोगों द्वारा घुसखोरी किए जाने की बात सामने आई है. इन पांचों अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश मिले हुए 9 माह का समय बीत चुका है. परंतु इसके बावजूद उन्होंने अब तक अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग का जातिवैधता प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया है. जिसके चलते उन पांचों लोगों द्वारा फर्जी जाति प्रमाणपत्र पर अनुसूचित जनजाति हेतु आरक्षित पदों पर कब्जा किया गया है, ऐसा आरोप ट्राईबल फोरम संगठन द्वारा लगाया गया है. साथ ही सोलापुर के जिलाधीश, जिप सीईओ व जिला स्वास्थ्य अधिकारी के नाम निवेदन भेजते हुए उन पांचों कर्मचारियों को तुरंत सेवामुक्त करते हुए उनके स्थान पर प्रतीक्षा सूची में रहनेवाले मूल आदिवासी अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की गई है.
इस संदर्भ में ट्राईबल फोरम का कहना रहा कि, महाराष्ट्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विमुक्त जाति, भटक्या जनजाति, अन्य पिछडा वर्ग व विशेष पिछडा वर्ग (जाति के प्रमाणपत्र देने व उसकी पडताल के विनियम) अधिनियम 2000 की धारा 8 के अनुसार जो अभ्यर्थी अनुसूचित जनजाति के है, उन पर ही अपनी जातिवैधता को सिद्ध करने की जवाबदारी होती है. लेकिन इसके बावजूद कई बार गैर आदिवासी अभ्यर्थी भी जातिवैधता प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए बिना आदिवासी हेतु आरक्षित पदों पर नियुक्ति हासिल कर लेते है और फिर आगे चलकर कोर्ट में जाते हुए स्थगिती प्राप्त कर असल आदिवासियों को उनके लिए संवैधानिक अधिकार के तौर पर आरक्षित पद से वंचित करते है. यह राज्य में सालो-साल से चला आ रहा है.
* दो के जाति प्रमाणपत्र अवैध
– अनुसूचित जनजाति हेतु आरक्षित स्वास्थ्य सेवक पदों पर नियुक्त हुए 5 लोगों में से 2 लोगों के जाति प्रमाणपत्र अवैध साबित हुए है. लेकिन इसके बावजूद भी वे सेवा में कायम है. जिसके चलते प्रतीक्षा सूची में रहनेवाले मूल आदिवासी अभ्यर्थी नियुक्ति से कायम वंचित हो गए है.
– प्रमोद मोहन चौधरी नामक अभ्यर्थी के जाति प्रमाणपत्र के दावे को विज्ञापन व नियुक्ति आदेश से पहले ही 19 जून 2019 को पुणे की जातिवैधता जांच समिति द्वारा अवैध ठहरा दिया गया था, यानि उक्त अभ्यर्थी एसटी प्रवर्ग में आवेदन करने से पहले ही अपात्र था. लेकिन इसके बावजूद इस अभ्यर्थी ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत करते हुए सरकार के साथ जालसाजी करने के साथ ही एसटी संवर्ग हेतु रिजर्व पद पर नियुक्ति हासिल की.
– इसके साथ ही बालाजी किसन गोपुलवाड के जाति प्रमाणपत्र के दावे को किनवट की जातिवैधता पडताल समिति ने 11 अगस्त 2025 को अवैध ठहराया था. लेकिन इसके बावजूद यह अभ्यर्थी भी फिलहाल एसटी संवर्ग हेतु आरक्षित रहनेवाले स्वास्थ्य पद पर कार्यरत है.





