विदर्भ के 5 रनवे असुरक्षित

कभी भी हो सकता है हादसा

* अकोला, यवतमाल के हवाई अड्डों का समावेश
अकोला/दि.29 – उपमुख्यमंत्री अजीत दादा पवार के उडनखटोले का बारामती के पास हादसा हो जाने से एटीसी और रनवे का मुद्दा सतह पर आया है. विदर्भ की बात करें तो आज 5 रनवे असुरक्षित है. जहां कभी भी दुर्घटना हो सकती है. बारामती का हादसा भी एयर ट्रैफिक कंट्रोल एटीसी न रहने से होने की जानकारी सामने आई है. एटीसी रहता तो अजीत दादा के विमान को हवामान और विजिबिलिटी के बारे में सही जानकारी दे सकता था.
अकोला के शिवनी, चंद्रपुर के मोरवा, गडचिरोली, भंडारा और यवतमाल के रनवे अनियंत्रित स्वरुप के रहने की जानकारी दी गई है. अर्थात यहां विमान के टेकऑफ और लैंड के विषय में कोई सीधा नियंत्रण नहीं होता है. उसी प्रकार पायलट को उसे दिखाई दे रही परिस्थिति पर निर्भर रहना पडता है. ऐसे में हादसे की आशंका बढ जाती है. उपरोक्त विमानतल अथवा रनवे पर एटीसी टॉवर अन्य सुविधाओं का घोर अभाव है.
बारामती के एक्सीडेंट ने केवल विदर्भ ही नहीं तो समूचे राज्य में अनियंत्रित रनवे की सुरक्षा पर सवाल खडे किए है. अनियंत्रित रनवे पर पायलट अपनी स्थिति घोषित करते है. वे लगातार जानकारी देते है कि, विमान कहां है, कहां उतरना है अथवा टेकऑफ लेना है, कौनसे रनवे को उपयोग में लाना है आदि जानकारी वे स्वयं देते है. एटीसी द्वारा कोई भी निर्देश नहीं दिए जाते. पायलट खुद ही मौसम, धुंध, पक्षी, पशु पर ध्यान रखते है. आवश्यकता पडी तो गो-अराउंड जैसे पर्याय चुनते है. कुछ अनकंट्रोल रनवे के स्थानों पर मर्यादित संपर्क रहता है. वहां रनवे की स्थिति, हवा की दिशा और और हवाई मार्ग की बाधाओं की जानकारी मिलती है, किंतु कोई निर्देश नहीं दिए जाते.

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