लोकतंत्र को सक्षम बनाने ग्रामसभा प्रभावी होना आवश्यक
डॉ. हर्षवर्धन देशमुख का प्रतिपादन

* संत गाडगेबाबा की दशसूत्री व ग्राम विकास पर कार्यशाला
अमरावती / दि.24 – यदि देश के लोकतंत्र को सक्षम बनाना हो तो ग्रामसभा सक्षम होना आवश्यक है. जब तक गांव का प्रत्येक नागरिक ग्राम सभा का महत्व नहीं समझता तब तक सही मायनों में ग्रामीण परिसर में विकास साधा नहीं जा सकता, ऐसा प्रतिपादन श्री शिवाजी शिक्षण संस्था अध्यक्ष तथा विद्यापीठ व्यवस्थापन परिषद सदस्य डॉ. हर्षवर्धन देशमुख ने किया. वे संत गाडगेबाबा दशसूत्री और ग्राम विकास इस विषय पर आयोजित सरपंच कार्यशाला के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय श्री गुरूदेव सेवा मंडल के आजीवन प्रचारक आचार्य हरिभाउ वेरूलकर गुरूजी ने की तथा प्रमुख अतिथि के तौर पर विद्यापीठ व्यवस्थापन परिषद सदस्या डॉ. विद्या शर्मा, ज्येष्ठ साहित्यकार डॉ. सतीश तराल, महाराष्ट्र प्रदेश सरपंच संगठना संस्थापक अध्यक्ष गजानन बोंडे, महाराष्ट्र प्रदेश सरपंच संगठना अध्यक्ष राजेंद्र कराले व संत गाडगे बाबा अध्यासन केन्द्र प्रमुख डॉ. दिलीप काले उपस्थित थे.
डॉ. हर्षवर्धन देशमुख ने अपने संबोधन में आगे कहा कि अधिकारियों के साथ सरपंच व नागरिकों ने भी जवाबदारी निभानी चाहिए व ग्राम पंचायत में होनेवाले सभी व्यवहार और खर्च की जानकारी प्रत्येक नागरिकों को होनी चाहिए और कामकाज पारदर्शक होना चाहिए. 1957 में बलवंतराय मेहताा की सिफारिश के बाद और आगे 1993 के 73 वें संविधान सुधार के बाद देश में त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था सही मायनों में लागू हुई है. संत गाडगेबाबा की दशसूत्री के अनुसार ग्राम विकास करना यह प्रत्येक पदाधिकारी की जवाबदारी है.
आचार्य वेरूलकर ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि संत गाडगेबाबाा द्बारा दी गई दशसूत्री यह केवल उद्देश नहीं है बल्कि यह गांव को सुखी व संपन्न करने का एक मसौदा है. जब तक गांव के अंतिम नागरिक तक दशसूत्री का लाभ नहीं पहुंच पाता. तब तक ग्राम विकास अधूरा है. संत गाडगेबाबा ने हाथ में झाडू लेेकर स्वच्छता का मंत्र दिया, राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज ने ग्राम गीता के माध्यम से ग्राम विकास की संकल्पना रखी. आज के सरपंच व युवक केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर न रहते हुए श्रमदान के माध्यम से गांव को स्वच्छ और सुंदर बनाए, ऐसा कहते हुए उन्होंने शिक्षा, व्यसनमुक्ति व स्वास्थ्य इस त्रिसूत्री पर जोर देकर ग्राम विकास का मॉडेल निर्माण करने का आवाहन किया.
राष्ट्रगीत व विद्यापीठ गीत से शुरू हुए कार्यक्रम में संत गाडगेबाबा की प्रतिमा का पूजन व दीप प्रज्वलन मान्यवरों के हस्ते किया गया. सभी अतिथियों का शाल श्रीफल व स्मृति चिन्ह प्रदान कर सत्कार किया गया. कार्यक्रम का प्रास्ताविक व आभार अध्यासन प्रमुख डॉ. दिलीप काले ने माना. गजानन बोंडे ने कार्यशाला के आयोजन की भूमिका विषद की तथा संचालन डॉ. राजेश मिरगे ने किया. कार्यशाला में विदर्भ के सरपंच तथा विद्यापीठ के अधिकारी बडी संख्या में उपस्थित थे.