‘अढैया’ के बदले ‘सवाया’ का फार्मूला लाया जा रहा अमल में

महापौर व उपमहापौर हेतु ढाई वर्ष की बजाए सवा वर्ष का कार्यकाल

* पहले ढाई वर्ष में भाजपा के श्रीचंद तेजवानी व आशीष अतकरे रहेंगे महापौर
* युवा स्वाभिमान के सचिन भेंडे व अजय जयस्वाल होंगे सवा-सवा साल के लिए उपमहापौर
* चार दलों वाली सरकार बनेगी, जातिगत समीकरण साधने पर दिया जा रहा पूरा जोर
अमरावती/दि.24 – आगामी 6 फरवरी को होने जा रहे अमरावती महानगर पालिका के महापौर व उपमहापौर पद के चुनाव हेतु आज नामांकन दाखिल करने के दिन ही लगभग यह तय हो गया है कि, अमरावती मनपा में अगले महापौर व उपमहापौर कौन होंगे, यह जानकारी सामने आने के साथ ही एक बेहद आश्चर्यजनक बात भी हुई है. क्योंकि किसी भी महानगर पालिका में पूरे पांच वर्ष के दौरान दो-दो महापौर व उपमहापौर होते है. क्योंकि इन दोनों पदों का कार्यकाल ढाई-ढाई वर्षों का होता है. परंतु अमरावती महानगर पालिका में चूंकि किसी भी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है. इसके चलते चार दलों का समावेश वाली महायुति की सत्ता स्थापित होने जा रही है. ऐसे में सहयोगी दलों को भी उचित प्रतिनिधित्व देने एवं जातिगत समीकरण को साधने के लिए अमरावती मनपा हेतु की गई युति में शामिल दो प्रमुख दलों भाजपा एवं युवा स्वाभिमान पार्टी ने महापौर व उपमहापौर पदों का आपस में बंटवारा करने के साथ ही इन दोनों पदों के लिए दो-दो नाम तय करते हुए यह भी तय किया है कि, अगले ढाई वर्ष के दौरान दोनों पार्टियों दो-दो पार्षद महापौर व उपमहापौर पदों पर सवा-सवा साल के लिए कार्यरत रहेंगे. जिसके तहत भाजपा की ओर से पहले सवा साल के दौरान श्रीचंद तेजवानी व दूसरे सवा साल के दौरान आशीष अतकरे महापौर का पद संभालेंगे. वहीं उपमहापौर पद को युवा स्वाभिमान पार्टी के हिस्से में दिया गया है और युवा स्वाभिमान पार्टी की ओर से पहले सवा साल सचिन भेंडे और अगले सवा साल अजय जयस्वाल को उपमहापौर बनाया जाएगा.
ढाई-ढाई वर्षों की बजाए सवा-सवा साल के कार्यकाल हेतु दोनों पार्टियों द्वारा अपने पार्षदों को नामित करने के साथ ही उनके निर्वाचन की बात भी लगभग पक्की हो गई है. क्योंकि चार दलों का समावेश रहनेवाली इस युति में बहुमत से कहीं अधिक पार्षदों की संख्या व समर्थन है. यह घोषणा करने के साथ ही भाजपा की ओर से अमरावती मनपा के निर्वाचन निरीक्षक बनाए गए विधायक संजय कुटे तथा भाजपा शहराध्यक्ष डॉ. नितिन धांडे सहित भाजपा पदाधिकारियों की मौजूदगी में महापौर पद हेतु नामित श्रीचंद तेजवानी व आशीष अतकरे का पुष्पगुच्छ देकर भावपूर्ण सत्कार किया गया. वहीं दूसरी ओर युवा स्वाभिमान पार्टी ने भी उपमहापौर पद हेतु नामित अपने दोनों पार्षदों सचिन भेंडे व अजय जयस्वाल का भावपूर्ण सत्कार करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी है.
सवा-सवा साल के कार्यकाल को लेकर लिए गए इस निर्णय के चलते माना जा रहा है कि, भाजपा ने यह फैसला जातिगत समीकरण को ध्यान में लगते हुए लिया है. जिसके तहत सिंधी समाज से वास्ता रखनेवाले श्रीचंद तेजवानी को पहले सवा साल के लिए महापौर बनाया जा रहा है. विशेष उल्लेखनीय है कि, अमरावती मनपा के इतिहास में श्रीचंद तेजवानी सिंधी समाज से वास्ता रखनेवाले पहले महापौर बनने जा रहे है. इस जरिए भाजपा ने अपने सिंधी वोट बैंक को साधने का जबरदस्त प्रयास किया है. वहीं अगले सवा साल के कार्यकाल हेतु महापौर पद के लिए नामित आशीष अतकरे मराठा समाज का प्रतिनिधित्व करते है. जिनके जरिए भाजपा ने मराठा-कुणबी सहित ओबीसी समाज को साधने की कोशिश की है. वहीं दूसरी ओर युवा स्वाभिमान पार्टी ने भी सवा-सवा साल के कार्यकाल हेतु उपमहापौर पद के लिए अपने दो पार्षदों के नाम आगे बढाकर भाषाई एवं जातिगत समीकरण को साधा है. जिसके तहत कुणबी-मराठा समाज से वास्ता रखनेवाले सचिन भेंडे का नाम पहले सवा साल के लिए उपमहापौर पद हेतु नामित किया गया है. वहीं अगले सवा साल के कार्यकाल हेतु अजय जयस्वाल के तौर पर हिंदी भाषी चेहरे को आगे किया गया है.
* खुद को संभालने की जुगत में दिख रही भाजपा
अमरावती महानगर पालिका का महापौर पद सर्वसाधारण प्रवर्ग के लिए आरक्षित होते ही भाजपा के पास महापौर पद हेतु दावेदारों की अच्छी-खासी संख्या हो गई थी. जिसमें विशेष रुप से कुछ महिला पार्षदों के दावे को भी जबरदस्त ढंग से मजबूत माना जा रहा था. ऐसे में पिछली बार की तुलना में इस बार मनपा के सदन में लगभग आधी हो चुकी भाजपा के सामने अपने-आप को संभालने की सबसे बडी चुनौती थी. जिसे ध्यान में रखते हुए भाजपा ने पूरे ढाई वर्ष के कार्यकाल हेतु एक महापौर तय करने की बजाए ढाई वर्षों के दौरान सवा-सवा वर्ष के कार्यकाल हेतु दो महापौर बनाने का निर्णय लिया. साथ ही एक से अधिक दावेदारों को संतुष्ट किया जा सके. साथ ही साथ जातिगत समीकरण भी साधा जा सके.
* अगले ढाई वर्ष के दौरान भी रह सकता है यही फार्मूला
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, जिस तरह से भाजपा ने मनपा के सदन में पहले ढाई वर्ष के दौरान महापौर व उपमहापौर पदों का बंटवारा करने के साथ ही दोनों पदों के लिए सवा-सवा वर्ष का कार्यकाल तय किया है और इस जरिए जातिगत समीकरण साधने का प्रयास किया गया है. लगभग इसी तर्ज पर अगले ढाई वर्ष के दौरान भी पदों का बंटवारा करते हुए सवा-सवा वर्ष के ही कार्यकाल तय किए जाएंगे. ध्यान देनेवाली बात है कि, उस समय विधानसभा चुनाव का दौर नजदिक रहेगा. जिसे ध्यान में रखते हुए भाजपा ने इस बार जिस तरह से हिंदी-मराठी भाषी वोटों को साधने के साथ-साथ जातिगत समीकरण को साधने का प्रयास किया है. उसी तरह से अगली बार भी महापौर व उपमहापौर पदों के लिए दावेदार चुने जाएंगे और मराठी भाषी वोटों के साथ-साथ हिंदी भाषी वोटों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

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