बैंक लोन होने के बावजूद सेल डीड में संपत्ति को भारमुक्त दर्शाना धोखाधडी

बिल्डर शिरभाते के खिलाफ हाईकोर्ट ने मुकदमा चलाने का दिया आदेश

* कैम्प स्थित गजानन रेसिडेन्सी अपार्टमेंट का मामला, एड. परवेज मिर्झा की सफल पैरवी
अमरावती /दि.27- स्थानीय गजानन कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालक व बिल्डर्स बाबासाहेब शिरभाते के खिलाफ भादंवि की धारा 420 के अंतर्गत धोखाधडी का मुकदमा चलाने से संबंधित आदेश विगत 9 फरवरी को मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ द्वारा जारी किया गया.
जानकारी के मुताबिक गजानन कंस्ट्रक्शन कंपनी ने कैम्प स्थित मांगीलाल प्लॉट में गजानन रेसिडेन्सी नामक अपार्टमेंट का निर्माण किया था. जिसके 8 फ्लैटधारकों ने गाडगे नगर पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी कि, बिल्डर बाबासाहेब शिरभाते ने फ्लैट स्कीम बनाने के लिए उस प्लॉट को जिजाऊ बैंक में गिरवी रखते हुए 65 लाख रुपए का कर्ज लिया था. जिसकी प्रविष्टी राजस्व अभिलेखों में भी थी. लेकिन इसके बावजूद फ्लैट खरीदनेवाले खरीददारों के साथ किए गए ‘एग्रीमेंट टू सेल’ तथा ‘सेलडीड’ में उक्त संपत्ती को पूरी तरह से भारमुक्त बताया गया और फ्लैट खरीदधारकों से करीब एक करोड रुपए लेकर उन्हें फ्लैट बेच दिए गए. परंतु फ्लैट खरीदे के कुछ समय बाद जिजाऊ बैंक द्वारा फ्लैट धारकों को लोन वसूली की नोटिस जारी की गई. जिसके चलते फ्लैट धारकों पर ऋण चुकाने का अनुचित भार पडा. साथ ही फ्लैट धारकों को अपने साथ हुई धोखाधडी के बारे में भी जानकारी मिली. जिसके चलते उन्होंने बिल्डर बाबासाहेब शिरभाते के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई. जिसे रद्द करवाने हेतु बिल्डर बाबासाहेब शिरभाते ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जहां पर हुई सुनवाई के दौरान फ्लैट धारकों की ओर से पैरवी करते हुए एड. परवेज मिर्झा ने हाईकोर्ट को बताया कि, बिल्डर द्वारा किया गया कृत्य शुरुआत से ही गैरकानूनी था. क्योंकि यदि कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति पर रहनेवाले बैंक ऋण या भार को जानबूझकर छिपाते हुए उसे देखता है और दस्तावेजों में अपनी संपत्ति को भारमुक्त दर्शाता है, तो यह केवल सिविल यानि दिवाणी मामला नहीं, बल्कि अपराधिक धोखाधडी का मामला बनता है. जिसके लिए भादंवि की धारा 420 के तहत फौजदारी मामला दर्ज कर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.
वरिष्ठ विधिज्ञ एड. परवेज मिर्झा द्वारा किए गए युक्तिवाद को ग्राह्य मानते हुए अदालत ने बिल्डर बाबासाहेब शिरभाते व गजानन कंस्ट्रक्शन कंपनी की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया. साथ ही फ्लैट धारकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बिल्डर बाबासाहेब शिरभाते व गजानन कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ धोखाधडी का मामला दर्ज करने का आदेश जारी किया.

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