ग्रामगीता ही ‘ग्राम संविधान’ : प्रो. नरेंद्र राऊत
भारवाडी में संत सत्यदेव बाबा की 126 वीं जयंती पर प्रार्थनासभा के दौरान कथन

तिवसा / दि.30 – राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज की ग्रामगीता गांव के समग्र विकास के लिए एक प्रकार का ‘ग्राम संविधान’ है, ऐसा प्रतिपादन प्रो. नरेंद्र राऊत ने किया. वे भारवाडी में श्री संत सत्यदेव बाबा की 126वीं जयंती के अवसर पर आयोजित प्रार्थना सत्र में बोल रहे थे.
प्रो. राऊत ने कहा कि जिस प्रकार डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा लिखित भारतीय संविधान में नागरिकों के अधिकार, कर्तव्य और हितों का उल्लेख किया गया है, उसी प्रकार राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज ने ग्रामगीता में गांव के हर वर्ग के लिए मार्गदर्शन दिया है. इसमें किसान, खेत मजदूर तथा पारंपरिक बारह बलुतेदार-चर्मकार, कुम्हार, लोहार, बढ़ई, दर्जी आदि सभी के आपसी संबंध, कर्तव्य और अधिकारों का विस्तृत वर्णन है. उन्होंने कहा कि ग्रामगीता युवाओं, विद्यार्थियों और महिलाओं को भी अपने दायित्वों के प्रति जागरूक करती है। महाराज की पंक्तियां-धन गरीबों का रक्त है, इसे समझकर अमीरों को आचरण करना चाहिए; श्रम ही गांव की दौलत है, इसलिए उसका सम्मान होना चाहिए-समाज में श्रम के महत्व को दर्शाती हैं.
प्रो. राऊत ने आगे कहा कि भारतीय संविधान में नियमों के उल्लंघन पर कानूनी सजा का प्रावधान है, जबकि ग्रामगीता में नैतिकता का बंधन है. अनैतिक आचरण के लिए ईश्वर को साक्षी मानकर जीवन जीने का संदेश दिया गया है. कार्यक्रम में प्रार्थना के माध्यम से ईश्वर भक्ति और सर्वधर्म समभाव की भावना पर भी मार्गदर्शन किया गया. अंत में प्रो. नरेंद्र राऊत का दुपट्टा, नारियल और ‘सत्यदेव दर्शन’ पुस्तक भेंट कर सम्मान किया गया. कार्यक्रम में गांव तथा आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे.





