अमरावती की गृहिणी हेतु पुणे में ग्रीन कॉरिडोर
सौभाग्यवती निर्मला गांधी का अवयवदान

* दोनों पुत्र राजेश और शरद ने पूर्ण की मां की इच्छा
अमरावती /दि.26- मां के अचानक हुए ब्रेन हैमरेज के कारण राजेश और शरद गांधी तथा परिवार के अन्य सभी घबरा उठे थे. आनन-फानन में चिंचवड के आदित्य बिरला अस्पताल में ले जाया गया. वहां चिकित्सकों डॉ. राकेश रंजन ने उनका उपचार शुरु किया. किंतु कंडिशन बेहद क्रिटीकल रहने और ब्रेनडेड की आशंका को देखते हुए डॉक्टर्स ने ऑर्गन डोनेशन की विनती गांधी परिवार से की. दुख की इस बेला ने भी पेशे से सॉफ्टवेअर इंजिनीयर राजेश और फाइनांसर शरद गांधी ने कडा और मां की इच्छापूर्ति वाला निर्णय कर अवयवदान किये. फलस्वरुप पुणे के चिंचवड में सौभाग्यवती निर्मला कांतिलाल गांधी (74) के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. गांधी बंधुओं के इस निर्णय की अमरावती में समस्त जैन समाज सराहना कर रहा हैं.
* अचानक आघात किंतु याद रही मां की बात
अमरावती के रायली प्लॉट निवासी कांतिलाल गांधी के दो पुत्र राजेश और शरद हैं. राजेश पुणे में प्रसिद्ध कंपनी में कार्यरत रहने के साथ शरद गांधी अमरावती में रहते है और उनका गांधी इन्वेस्टमेंट नाम से वसंत चौक पर प्रतिष्ठान है. माताजी निर्मलादेवी की तबीयत मंगलवार सबेरे बिगड गई. ब्रेन हैमरेज हुआ. तुरंत दोनों भाई माताजी को चिंचवड के बिरला अस्पताल ले गये. डॉ. राकेश रंजन की देखरेख में उपचार शुरु हुआ. दोनों मातृभक्त राजेश और शरद ने सेकंड ओपिनियन लेते हुए डॉ. प्रदीप बाफना को भी मां को दिखाया. उनकी दशा नाजुक बतायी गई.
* डोनेशन हेतु आइडियल कंडिशन
गांधी परिवार के सूत्रों ने अमरावती मंडल को बताया कि, निर्मलादेवी ने बहुत पहले ही अपनी मृत्यु पश्चात पार्थिव को दान करने की इच्छा बेटों से बातचीत में व्यक्त कर दी थी. ऐसे में पुणे के अस्पताल में भरसक प्रयासों पश्चात भी निर्मला गांधी की तबीयत में सुधार होने की गुंजाइश डॉक्टर्स ने न के बराबर बतायी. उसी प्रकार उनके अवयवदान के लिए आदर्श स्थितियां होने की जानकारी भी दोनों पुत्रों राजेश व शरद गांधी को दी. परिवार के वरिष्ठ से अमरावती में संपर्क कर पुत्रों ने भारी मन से निर्णय किया. अमरावती से सुनील गांधी, सुशील गांधी और अन्य परिवारजन लगातार संपर्क में थे.
* लीवर, फेफडे और नेत्रदान
परिवार के सूत्रों ने अमरावती मंडल को बताया कि, मां की अपनी पार्थिव दान करने की इच्छा इस घडी में दोनों ही पुत्रों को बडी याद आयी. उन्होंने बडे भारी मन से मां की इच्छा को इस अंदाज में अर्थात अवयवदान के रुप में आज रामनवमी के दिन पूर्ण करने का निश्चय किया. डॉक्टर्स की टीम ने निर्मला गांधी की आंखे, यकृत और फेफडे गरजमंद मरीजों को लगाने की तैयारी समाचार लिखे जाने तक शुरु की थी. उनके इस अवयव दान की जानकारी यहां जैन समाज को प्राप्त होते ही सभी ने गांधी परिवार के दातृत्व भाव की सराहना की है. निर्मलादेवी की अंतिम यात्रा पुणे के वाकड अक्षरा स्कूल के पीछे स्थित गोलछा अपार्टमेंट से केशव नगर विद्युत दाहिनी चिंचवड हेतु निकाली जा रही है.





