पैरोल पर बाहर निकले और फिर लौटे ही नहीं

नागपुर जेल से उम्रकैद वाले 31 कैदी फरार

* पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवालिया निशान
नागपुर/दि.8 – नागपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां हत्या के मामलों में दोषी ठहराए गए और आजीवन कारावास की सजा काट रहे 31 कैदी पैरोल पर जेल से बाहर जाने के बाद वापस जेल नहीं लौटे. इनमें से दर्जनभर कैदी पिछले चार से पांच वर्षों से फरार हैं. वहीं कुछ कैदी विगत 14 वर्षों से पुलिस रिकॉर्ड में ‘फरार’ दर्ज हैं. उपराजधानी नागपुर से इस तरह आजीवन कैदियों का गायब होना केवल पुलिस की नाकामी नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
बता दें कि, हत्या के मामलों में दोषी बंदियों को निर्धारित अवधि की सजा पूरी करने के बाद संचित एवं अभिवचन अवकाश का संवैधानिक अधिकार दिया जाता है. हालांकि, अवकाश की अवधि समाप्त होने के बाद बाकी सजा काटने के लिए जेल में वापस आत्मसमर्पण करना अनिवार्य होता है. इसके बावजूद नागपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्र के कई आजीवन कैदी जेल के फाटक से बाहर निकलते ही हमेशा के लिए गायब हो गए.
मध्यवर्ती कारागृह प्रशासन के पास अवकाश पर जेल से बाहर गए प्रत्येक कैदी का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध है. नियमों के अनुसार, अवकाश समाप्त होने के बावजूद कैदी के वापस न लौटने पर संबंधित पुलिस थाने में अपराध दर्ज किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद वर्षों से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है. जानकारी के मुताबिक, 2011 से नागपुर शहर के नौ और ग्रामीण क्षेत्र के तीन आजीवन कैदी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. इतने लंबे समय तक इन खतरनाक अपराधियों का सुराग न लगना पुलिस तंत्र की कार्यक्षमता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है.
इस संदर्भ में मिली जानकारी के मुताबिक प्रतापनगर, पांचपावली, लकड़गंज, धंतोली, कोराडी, सीताबर्डी और यशोधरानगर जैसे संवेदनशील थाना क्षेत्रों से जुड़े राजेश मडावी, संतोष धुर्वे, चिंतामण कांबळे, विजय रामटेकेकर, गुलाम अहमद, रिंकू रॉय, मांगीलाल माहुल, अमोल गवली और बिंद्रा जोशी पिछले 14 वर्षों से फरार हैं. ग्रामीण इलाकों में भी रामटेक के सुरेश नक्षिणे, बेला के दिलीप हटवार और मौदा के मोहम्मद अर्शद शामिल हैं. यह भी स्पष्ट नहीं है कि ये फरार कैदी अब कहां हैं, कैसे रह रहे हैं और क्या उन्होंने दोबारा अपराध किए हैं, यह तथ्य और भी चिंताजनक है.
* पुलिस की जिम्मेदारी, लेकिन कार्रवाई नदारद
आजीवन कारावास से फरार कैदियों द्वारा दोबारा अपराध न किए जाएं और पुरानी दुश्मनी फिर से न भड़के, इसके लिए उनका पता लगाना संबंधित पुलिस थानों की जिम्मेदारी है. हालांकि, जमीनी हकीकत में नागपुर पुलिस इस गंभीर दायित्व में असफल होती नजर आ रही है, जिससे आम नागरिकों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या कानून सभी के लिए समान है?
* अमरावती जेल से भी अजित सातपुते फरार
गायकवाड़ हत्या प्रकरण में आजीवन कारावास की सजा काट रहा अजित सातपुते (वाडी) पहले नागपुर मध्यवर्ती कारागृह में बंद था. जेल में अन्य बंदियों से विवाद और मारपीट की घटनाओं के बाद उसे अमरावती कारागृह स्थानांतरित किया गया. वहां से अभिवचन अवकाश पर बाहर आते ही वह फरार हो गया. पिछले तीन वर्षों से अजित सातपुते फरार है, लेकिन वाडी पुलिस अब तक उसका पता लगाने में नाकाम रही है.

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