आरटीई प्रवेश में एक किमी की शर्त पर हाईकोर्ट सख्त

सरकार से पूछा-कानून के खिलाफ फैसला कैसे

नागपुर/दि.10 – शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्रवेश प्रक्रिया में राज्य सरकार द्वारा लागू की गई एक किलोमीटर की दूरी की अनिवार्यता पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने कड़ी नाराजगी जताई है. सोमवार को हुई सुनवाई में अदालत ने सरकार के इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर मामला बताया.
यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता आशीष फुलजेले ने दायर की है. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल पानसरे और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता की खंडपीठ के समक्ष हुई. याचिका में कहा गया है कि बाल नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 की धारा 12 (1)(ए) के तहत निजी और अल्पसंख्यक स्कूलों में कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश अनिवार्य है. लेकिन राज्य सरकार ने 12 फरवरी 2026 को जारी सरकारी आदेश में आरटीई प्रवेश के लिए एक किलोमीटर की दूरी की सीमा तय कर दी है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि आरटीई कानून में कहीं भी एक किलोमीटर की अधिकतम दूरी तय करने का प्रावधान नहीं है. इसके बावजूद सरकार ने ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसी व्यवस्था कर दी है कि अभिभावकों को केवल अपने घर से एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले स्कूलों का ही विकल्प दिखाई देता है. बताया गया कि पोर्टल में गूगल मैप्स और जीपीएस लोकेशन के आधार पर स्कूलों का चयन होता है, जिससे एक किलोमीटर से बाहर के स्कूल आवेदन सूची में दिखाई ही नहीं देते. इसके कारण अभिभावकों के पास सीमित विकल्प रह जाते हैं.
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए पूछा कि जब इस संबंध में पहले से ही अदालत का स्पष्ट आदेश मौजूद है, जिसमें एक किलोमीटर की शर्त को रद्द किया जा चुका है, तो फिर सरकार ने दोबारा यह शर्त कैसे लागू कर दी. अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि प्रवेश प्रक्रिया में दस स्कूलों के चयन का विकल्प और लॉटरी प्रणाली भी इसी सीमित दायरे में पूरी हो जाती है. यदि किसी छात्र को आवंटित स्कूल में प्रवेश नहीं मिलता, तो उसे दूसरा मौका भी नहीं दिया जाता, जिससे कई बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित हो सकते हैं. याचिकाकर्ता ने अदालत से इस एक किलोमीटर की अनिवार्यता को रद्द करने की मांग की है. मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर असंतोष व्यक्त किया और स्पष्ट किया कि आरटीई अधिनियम के खिलाफ जाने वाले निर्णय को स्वीकार नहीं किया जा सकता.

Back to top button