पिंपलोद में 1951 से अब तक गांव में नहीं मनाई होली
सामाजिक सद्भाव का संदेश

* परशराम महाराज का हुआ था देहावसान
दर्यापुर/दि.28 – होली पर्व जिले सहित पूरे देश में उत्साह से मनाया जाता है. लेकिन जिले के दर्यापुर तहसील का एक गांव आज भी होली और रंगपंचमी का पर्व नहीं मनाता है. उसका नाम है पिंपलोद. पिंपलोद गांव स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था परिसर, परशराम नगर में परमहंस परशराम महाराज का 1951 में देहावसान हुआ था. उनकी स्मृति और सम्मान में पिंपलोद गांववासी होली और रंगपंचमी उत्सव नहीं मनाते है.
* विभिन्न धार्मिक आयोजन
परमहंस परशराम महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर पिंपलोद में 28 फरवरी से भव्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. यह आयोजन हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्रद्धा और भक्ति भाव से संपन्न होगा. परमहंस परशराम महाराज ने अपने जीवनकाल में अध्यात्म, साधना और अपनी अलौकिक लीलाओं के माध्यम से ग्रामवासियों को आध्यात्मिक मार्ग दिखाया. उनके विचारों का प्रभाव आज भी गांव की जीवनशैली में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. ग्रामवासी उनके उपदेशों के अनुसार सादगी, भाईचारा और सामाजिक एकता का पालन करते हैं. पुण्यतिथि समारोह के अंतर्गत शनिवार, 28 फरवरी को मूर्ति पूजन एवं होम-हवन, रविवार 1 मार्च को मंदिर के नूतनीकरण उपलक्ष्य में मूर्ति स्थापना एवं पूर्णाहुति, सोमवार 2 मार्च को तीर्थ स्थापना, बुधवार 4 मार्च को श्रीजी की शोभायात्रा तथा दोपहर 2 बजे दासगिरी महाराज का काला का कीर्तन, तत्पश्चात महाप्रसाद वितरण सहित विविध धार्मिक कार्यक्रम होंगे, पुण्यतिथि के अवसर पर महाप्रसाद का भी आयोजन किया गया है. जिसमें गांव सहित पंचक्रोशी क्षेत्र के श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग लेते हैं. समारोह की सफलता के लिए संस्था के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और ग्रामवासी विशेष परिश्रम कर रहे हैं. आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से स्वेच्छा से सहयोग करने की अपील की है.
* होली नहीं मनाने की अनोखी परंपरा
गांव में एक विशेष परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है. महाराज का देहावसान होली के दिन वर्ष 1951 में हुआ था. उनकी स्मृति और सम्मान में पिंपलोद गांव में होली और रंगपंचमी का उत्सव नहीं मनाया जाता. इस परंपरा को आज भी पूरी निष्ठा से कायम रखा गया है. ग्रामवासियों का मानना है कि यह निर्णय सामाजिक सद्भाव और शांति का संदेश देता है.





