सिखवाल ब्राह्मण समाज की होली की गेर
दशकों की परंपरा कायम

* युवा और बुजुर्गों का उत्साहपूर्ण सहभाग
* परकोटे के भीतर गूंजे फाग गीत
अमरावती /दि.4 – होली के अवसर पर परकोटे के भीतर फाग गीतों की गूंज परंपरा सिखवाल ब्राह्मण समाज ने आज भी कायम रखी है. सिखवाल समाज के युवा और वरिष्ठ सदस्यों ने होली की गेर का डफ लेकर आयोजन उत्साह से किया. फलस्वरुप शहर का पुराना अर्थात परकोटे के भीतर का क्षेत्र फाग गीतों से गूंज उठा था. पं. बद्री महाराज, ओमप्रकाश शर्मा, राजेश तिवारी, सोहन कोलरिया, धनराज कोलरिया, हनुमान उपाध्याय, राधाकिसन उपाध्याय, संतोष पांडे सहित बडी संख्या में समाजबंधु सहभागी होते हैं.
आज भी होली उपलक्ष्य डफ लेकर फाग गीतों के साथ होली की गेर रचने का क्रम जारी रहा. श्री गणेश मंदिर में इकठ्ठा होकर समाजबंधुओं ने यह क्रम शुरु किया और वहां से समस्त मच्छीसाथ, शक्करसाथ, अंबागेट, दहीसाथ परिसर में यह टोली पारंपारिक फाग गीतों को गाते, डफ बजाते और थिरकते हुए सहभागी हुए, तो कई लोगों ने कौतूहल से निहारा. होली की गेर की यह परिपाटी राजस्थान से चली आ रही है. सिखवाल समाज के बंधु आज भी राजस्थान से गहरा रिश्ता रखते हैं. अत: वहां की सामाजिक परंपराओं का निर्वहन उत्साह से किया जा रहा है. होली जैसे रंगों के पर्व पर गीतों के माध्यम से कई बार समधियों के बीच का संवाद रोचक, मजाकियां अंदाज में प्रस्तुत किया जाता है. उसी प्रकार इन गीतों में घर-परिवार की रोजमर्रा की हंसी-ठिठोली भी रहती है. सास-बहू संवाद, सास-जंवाई संवाद प्रमुखता से स्थान पाते हैं.