यदि एमआयएम से निष्कासित तो अपक्ष नगरसेविका कहलायेगी कांबले
अमरावती महापालिका सदन

* अन्य गट में शामिल होने के लिए भी रहेगी पात्र अमरावती/ दि. 7- बडनेरा जूनी बस्ती प्रभाग 21 की नवनिर्वाचित नगरसेविका मीरा भगवान कांबले शुक्रवार दोपहर से सर्वत्र चर्चा का विषय बनी हैं. उन्होंने महापालिका की नये सदन की पहली ही आमसभा में ऐसा कुछ कर दिया कि वे चर्चित हो गई है. उन्होंने महापौर और उप महापौर चुनाव में सत्तारूढ महायुति के फेवर में मतदान कर दिया था. ऐसे में मुंबई मनपा प्रांतीय अधिनियम के अनुसार एमआयएम यदि मीरा कांबले को निष्कासित करता है तो मीरा कांबले अपक्ष नगरसेविका कहलायेगी. इतना ही नहीं तो वे मनपा सदन के किसी भी गुट में शामिल होने के लिए पात्र रहेगी.
मीरा कांबले ने मनपा चुनाव एमआयएम के टिकट पर लडा. वे धूमधडाके से चुनाव में विजयी रही. उनके साथ एमआयएम के अन्य दो सदस्य चुने गये. शुक्रवार को मनपा नये सदन की पहली आमसभा आहूत की गई थी. परंपरा के अनुसार सर्वप्रथम सभा के सभापति अर्थात महापौर का चयन किया जाना था. आमसभा की अध्यक्षता जिलाधीश आशीष येरेकर कर रहे थे. महापौर चुनाव के उम्मीदवारों की घोषणा हुई. महायुति से श्रीचंद तेजवानी, कांग्रेस से डॉ. संजय शिरभाते और बसपा से इस्माइल लालूवाले उम्मीदवार थे. श्रीचंद तेजवानी के नाम की घोषणा होते ही महायुति के सभी 54 नगरसेवकों ने हाथ उठा दिए. एमआयएम ने चुनाव में भाग न लेने का निर्णय किया था. किंतु मीरा कांबले ने तेजवानी के पक्ष में हाथ उठा दिया. इतना ही नहीं उप महापौर चुनाव में भी उन्होंने महायुति के उम्मीदवार सचिन भेंडे के फेवर में अपना हाथ उठाकर वोट दिया.
ऐसे में अब नाना प्रकार के कयास और अटकलें चल रही है. एमआयएम द्बारा उन्हें पार्टी से निकाल बाहर करने की घोषणा हुई है. मुंबई मनपा एक्ट के अनुसार किसी भी महापालिका में केवल महापौर और उप महापौर का चुनाव ही खुले रूप में हाथ उठाकर करवाया जाता है. बचे सभी पद स्वीकृत नगरसेवक, स्थायी समिति, विषय समिति सदस्य यह सभी संबंधित दलों के द्बारा विभागीय आयुक्त के पास रजिस्टर्ड गट के मुताबिक विभाजित होते हैं. उन्हीं नियमों के आधार पर यदि बिना व्हीप जारी किए यदि यह समझा जाए कि, मीरा कांबले ने भाजपा महायुति को मतदान किया तो कांबले के इस कदम से कोई राजनीतिक प्रभाव नहीं पडेगा. लेकिन यदि एमआयएम ने अधिकारिक तौर पर कांबले के पार्टी से निष्कासित किया तो कांबले मुंबई प्रांतीय चुनाव अधिनियम के तहत अपक्ष नगरसेविका बन जायेगी.
ऐसी स्थिति में मीरा कांबले 5 वर्षो तक अपक्ष नगरसेविका कहलायेगी. अन्य गट में शामिल होने के लिए भी वे पात्र रहेगी. संकेत यही मिल रहे है कि वे युवा स्वाभिमान गट में स्वाभिमानी कांबले बन सकती है. यह सभी ‘ किंतु- परंतु’ अब सत्ताधारियाेंं द्बारा प्रशासनिक अधिकारियों पर डाले जानेवाले दबाव पर भी निर्भर रहेगा कि क्या निर्णय होता है ?





