मनपा चुनाव में कई सीटों पर निर्दलिय प्रत्याशी बदल सकते है समीकरण

661 दावेदारों में से 120 निर्दलिय प्रत्याशी है मैदान में

* राष्ट्रीय व राज्यस्तरिय दलों के 541 प्रत्याशी लड रहे चुनाव
अमरावती/दि.14 – अमरावती महानगर पालिका के 22 प्रभागों में 87 सीटों से लिए 661 प्रत्याशी चुनावी मैदान में है. जिनमें राष्ट्रीय व प्रादेशिक दलों के 541 प्रत्याशियों सहित 120 निर्दलिय प्रत्याशियों का समावेश है. इसमें से कई ऐसे उम्मीदवार है, जिन्हें उनकी पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बावजूद वे अपनी ताकत दिखाने के लिए स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में उतरे है. ऐसे निर्दलिय प्रत्याशियों के चलते इस बार प्रस्थापित राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के चुनावी गणित व राजनीतिक समीकरण बिगडने की पूरी संभावना है. जिसके चलते कई राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रत्याशियों में इस समय निर्दलिय प्रत्याशियों को लेकर अच्छी-खासी ‘धाकधूक’ दिखाई दे रही है.
बता दें कि, अब अमरावती महानगर पालिका के चुनाव की उलटी गिनती शुरु हो गई है और मतदान का समय शुरु होने में करीब 12 घंटे का समय बचा हुआ है. कल 15 जनवरी को सुबह 7.30 बजे से मतदान की प्रक्रिया शुरु हो जाएगी. ऐसे में सभी प्रत्याशियों के लिए अब ‘यही रात अंतिम, यही रात भारी’ वाली स्थिति बनी हुई है. जिसके चलते राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों सहित निर्दलिय प्रत्याशियों द्वारा अपने-अपने प्रभागों में अपने-अपने स्तर पर जमकर ताकत झोंकी जा रही है. जिसके चलते कई सीटों पर निर्दलिय प्रत्याशी भी मुख्य रेस में बने हुए है. जिनके द्वारा ऐन समय पर राजनीतिक समिकरणों में काफी बडा फेरबदल किया जा सकता है. जिसे लेकर विविध पार्टियों के अधिकृत प्रत्याशियों में डर और चिंता का माहौल है.
बता दें कि, अमरावती महानगर पालिका के सन 1992 व सन 1997 में हुए चुनाव में निर्दलियों का जबरदस्त बोलबाला था. सन 1992 के चुनाव में जहां कांग्रेस ने 27 सीटें जीती थी, वहीं 28 सीटों पर निर्दलिय प्रत्याशी विजयी हुए थे. जबकि सन 1997 के मनपा चुनाव में 25 निर्दलिय प्रत्याशियों की जीत हुई थी. हालांकि आगे चलकर मनपा के सदन में निर्दलिय पार्षदों की संख्या घटनी शुरु हुई तथा वर्ष 2002 में 5, वर्ष 2007 में 7, वर्ष 2012 में 8 तथा वर्ष 2017 में केवल एक निर्दलिय पार्षद मनपा के सदन में निर्वाचित हो पाए थे. ज्ञात रहे कि, सन 1992 और 1997 में हुए मनपा चुनाव में एकल वॉर्ड पद्धती थी. जिसके चलते निर्दलिय प्रत्याशियों के लिए चुनाव लडने व जीतने की संभावना काफी अधिक हुआ करती थी. परंतु इसके बाद बहुसदस्यीय प्रभाग रचना पद्धती से मनपा के चुनाव करवाए जाने शुरु हुए. ऐसे में निर्वाचन क्षेत्र का दायरा काफी अधिक बडा हो जाने की वजह से निर्दलिय प्रत्याशियों के लिए अपने अकेले के दम पर बडे प्रभाग में चुनाव लडना काफी मुश्किल काम साबित होने लगा. वहीं राजनीतिक दलों द्वारा बहुसदस्यीय प्रभाग पद्धती के तहत प्रभाग में अपने प्रत्याशियों के पैनल खडे किए जाने लगे.
* निर्दलियों का ‘मैं नहीं, तो तू भी नहीं’
इस समय मनपा चुनाव के लिए 22 प्रभागों में 120 निर्दलिय प्रत्याशियों ने अपनी दावेदारी पेश की है. जिसके चलते सभी राजनीतिक दलों के लिए निर्दलिय प्रत्याशी काफी हद तक तकलिफदेह साबित हो रहे है. क्योंकि अधिकांश निर्दलिय प्रत्याशी किसी न किसी राजनीतिक दल के खिलाफ बगावत करते हुए ही चुनावी मैदान में है. टिकट के लिए प्रमुख दावेदार रहने के बावजूद कुछ इच्छुकों का स्थानीय नेताओं ने टिकट नहीं मिलने के लिए ‘गेम’ किया. जिसके परिणामस्वरुप ज्यादातर नाराज व असंतुष्ट दावेदार ही निर्दलिय प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतरे है और खुद की बजाए पार्टी से प्रत्याशी रहनेवाले उम्मीदवार के लिए अब ऐसे निर्दलियों ने ‘मैं नहीं, तो तू भी नहीं’ की भूमिका अपनाई है.

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