पतंग की बजाए जिंदगी की डोर काट रहा ‘चायना मांजा’

प्रतिबंध के बावजूद शहर में धडल्ले के साथ हो रही चायना मांजा की विक्री

* नायलॉन से बननेवाले चायना मांजा की चपेट में आकर अब तक घटित हो चुके कई हादसे
* चायना मांजे का शिकार होकर हो चुकी कई लोगों की मौते, कई लोग गाल व गला कटकर हुए गंभीर घायल
* मनपा तथा पुलिस प्रशासन शहर में चायना मांजे की विक्री को रोकने में साबित हो रहे पूरी तरह से विफल
* इस बार भी मकर संक्रांत पर पतंगबाजी में चायना मांजे का जमकर हुआ प्रयोग
* पेंचबाजी में कटी पतंगों के साथ आया मांजा अब सडकों के किनारे बिजली के तारों व पेडो की टहनियों के झूल रहा
* सडकों से आते-जाते लोगों के चायना मांजे की चपेट में आने का बना हुआ है खतरा
अमरावती/दि.23 – हाल ही में मकर संक्रांती का पर्व बडी धूमधाम से मनाया गया और इस पर्व के निमित्य पूरे शहर में जमकर पतंगबाजी भी हुई. लेकिन प्रतिबंधित रहने के बावजूद नायलॉन से बननेवाले चायनीज मांजे का पतंगबाजी में जमकर प्रयोग किया गया और पतंग उडाने के नाम पर प्रयोग में लाया गया यही चायना मांजा अब जानलेवा साबित होते हुए शहरवासियों की जिंदगी के लिए खतरे की डोर बन गया है, क्योंकि चायना मांजे की वजह से आए दिन कोई न कोई हादसा घटित हो रहा है. बीती रात नांदगांव पेठ पुलिस थाना क्षेत्र अंतर्गत चायना मांजे की चपेट में आकर एक दुपहिया सवार के बुरी तरह घायल हो जाने की घटना को इस बात का ताजा उदाहरण कहा जा सकता है. ऐसे में बेहद जरुरी हो चला है कि, चायना मांजे की विक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को बेहद कडाई के साथ अमल में लाया जाए, क्योंकि सरकार द्वारा चायना मांजे पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद शहर में खुलेआम चायना मांजे की बिक्री जारी है, जिससे आम नागरिकों की जान पर बन आई है.
उल्लेखनीय है कि, अमरावती शहर में नायलॉन से निर्मित यह खतरनाक मांजा अब तक कई हादसों की वजह बन चुका है. चायना मांजे की चपेट में आकर अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, जबकि कई मासूमों और युवाओं की मौत भी हो चुकी है. कई मामलों में गाल, गर्दन और हाथों पर गहरे जख्म लगे हैं, जिससे पीड़ितों को जीवनभर का दर्द झेलना पड़ रहा है. लेकिन इसके बावजूद चायना मांजे की शहर में बिक्री रोकने के लिए महानगरपालिका और पुलिस प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं.
इस बार भी मकर संक्रांति के पर्व पर पतंगबाजी के दौरान चायना मांजे का जमकर इस्तेमाल हुआ, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं. पतंगबाजी के दौरान लडाई जानेवाली पेंचबाजी में कटकर गिरने वाली पतंगों के साथ यह मांजा अब सड़कों के किनारे, बिजली के तारों पर और पेड़ों की टहनियों में लटका हुआ नजर आ रहा है. इससे राह चलते नागरिकों, दोपहिया वाहन चालकों और बच्चों के चपेट में आने का खतरा लगातार बना हुआ है. साथ ही गत रोज घटित हादसा भी इसी वजह के चलते घटित हुआ. ऐसे में अब नागरिकों में प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर भारी नाराजगी है. शहरवासियों ने मांग की है कि चायना मांजे की बिक्री, भंडारण और उपयोग करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि इस जानलेवा खेल पर पूरी तरह रोक लग सके और लोगों की जिंदगी सुरक्षित रह सके.
* प्रतिबंध सिर्फ कागजों तक सीमित, प्रशासन की नाकामी
– जनता की सुरक्षा पर उठता बड़ा सवाल
मकर संक्रांति जैसे पारंपरिक पर्व पर जहां रंग-बिरंगी पतंगें खुशी और उत्साह का प्रतीक होती हैं, वहीं चायना मांजा अब उसी खुशी को मौत और मातम में बदल रहा है. नायलॉन से निर्मित यह प्रतिबंधित मांजा शहर में खुलेआम बिक रहा है और हर साल की तरह इस बार भी कई परिवारों के लिए यह पर्व हादसों की वजह बन गया. सरकार और न्यायालय द्वारा चायना मांजे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, इसके बावजूद अमरावती शहर के कई इलाकों में इसकी चोरी-छिपे बिक्री होती रही. स्थानीय बाजारों, गलियों और अस्थायी दुकानों पर यह जानलेवा मांजा आसानी से उपलब्ध रहा, जिससे यह साफ होता है कि प्रशासनिक निगरानी या तो बेहद कमजोर है या फिर केवल औपचारिकता बनकर रह गई है.
* हादसों की लंबी फेहरिस्त, सार्वजनिक स्थलों पर बढ़ता खतरा
नायलॉन से बना चायना मांजा बेहद मजबूत और धारदार होता है. इसकी चपेट में आकर अब तक कई लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं. शहर में ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं, जिनमें लोगों की गर्दन, गाल, हाथ और चेहरे पर गहरे कट लगे हैं. कई मामलों में पीड़ितों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कुछ लोग स्थायी रूप से विकलांग हो गए हैं. विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों, साइकिल सवारों और बच्चों के लिए यह मांजा सबसे बड़ा खतरा साबित हो रहा है.
मकर संक्रांति के बाद सड़कों के किनारे, बिजली के तारों पर और पेड़ों की टहनियों में कटे हुए पतंगों के साथ लटका चायना मांजा आम दृश्य बन चुका है. हवा के झोंकों से यह अचानक सड़क की ऊंचाई पर आ जाता है, जिससे राह चलते नागरिक अनजाने में इसकी चपेट में आ जाते हैं. इससे न केवल जान का खतरा है, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा पर भी गंभीर असर पड़ रहा है.
* प्रशासनिक विफलता पर सवाल, सामाजिक जिम्मेदारी का अभाव
नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका और पुलिस प्रशासन की भूमिका इस पूरे मामले में केवल औपचारिकता तक सीमित रही है. प्रतिबंध के बावजूद न तो बिक्री पर प्रभावी रोक लगाई जा सकी और न ही बड़े पैमाने पर जब्ती व कार्रवाई देखने को मिली. हर साल मकर संक्रांति से पहले चेतावनी जारी कर दी जाती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर सख्त अभियान नहीं चलाया जाता, जिससे यह समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है.
कहा जा सकता है कि केवल प्रशासन ही नहीं, समाज का एक वर्ग भी इस समस्या के लिए जिम्मेदार है. जानलेवा होने की पूरी जानकारी होने के बावजूद कुछ लोग चायना मांजे का प्रयोग करते हैं, जो न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सामाजिक नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं के भी खिलाफ है. यह मानसिकता दर्शाती है कि मनोरंजन के नाम पर लोग दूसरों की जान जोखिम में डालने से भी नहीं हिचक रहे.
* समाधान और सुझाव
इस पूरे मामले को लेकर दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने कई विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से भी बातचीत की. जिनकी ओर से सुझाव दिया गया कि, चायना मांजे की बिक्री और भंडारण पर शून्य सहनशीलता नीति अपनाई जाए. मकर संक्रांति से पहले और बाद में विशेष अभियान चलाकर बड़े पैमाने पर छापेमारी की जाए. दोषियों पर कड़ी आर्थिक दंड और आपराधिक कार्रवाई की जाए. स्कूलों, कॉलेजों और समाज में जागरूकता अभियान चलाकर बच्चों और युवाओं को इसके खतरों से अवगत कराया जाए. पर्यावरण-अनुकूल और सुरक्षित सूती मांजे के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए. ऐसे में कहा जा सकता है कि, चायना मांजा अब केवल एक अवैध उत्पाद नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती बन चुका है. यदि समय रहते इस पर कठोर और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में यह और भी भयावह रूप ले सकता है. प्रशासन, समाज और नागरिकों-तीनों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि पतंगबाजी का त्योहार खुशियों का प्रतीक बने, न कि किसी परिवार की जिंदगी की डोर काटने का कारण.

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