घंटों की चर्चा की बजाए जिम्मेदारों पर हो सीधी कार्रवाई
साफ-सफाई के मुद्दे पर आमसभा की जरुरत क्यों?

* सालों-साल से बनी हुई है कचरे व गंदगी की समस्या, पूरा शहर परेशान
अमरावती /दि.25 – वर्ष 1983 में हुई स्थापना एवं वर्ष 1992 में हुए पहले आम चुनाव के बाद से लेकर अब तक अमरावती महानगर पालिका के इतिहास में पहली बार खास तौर पर साफ-सफाई के मुद्दे को लेकर विशेष आमसभा का आयोजन होने जा रहा है. साथ ही आगामी 28 फरवरी को साफ-सफाई के मुद्दे पर आयोजित होने जा रही विशेष सभा को लेकर मनपा प्रशासन द्वारा कुछ इस अंदाज में डंका पीटा जा रहा है और अपनी पीठ थपथपाई जा रही है, मानों शहर में साफ-सफाई के लिहाज से कोई बहुत बडा काम होने जा रहा हो. जबकि हकीकत में साफ-सफाई के मुद्दे पर विशेष सभा बुलाया जाना स्थानीय प्रशासन के लिहाज से बेहद शर्मनाक स्थिति है और इस जरिए कहीं न कहीं प्रशासन खुद ही यह स्वीकार कर रहा है कि, विगत 4 वर्षों तक चले प्रशासक राज के दौरान अमरावती शहर में साफ-सफाई को लेकर कोई ढंग का काम नहीं हुआ. जिसके चलते अब नौबत साफ-सफाई के मुद्दे पर विशेष सभा बुलाने तक पहुंच गई है. ऐसे में मनपा प्रशासन के कामकाज और साफ-सफाई के मुद्दे पर कुछ सवालों के जवाब खोजा जाना बेहद लाजिमी है.
* विशेष सभा में लंबी चर्चा की बजाए सीधी कार्रवाई पर किया जाए फोकस
महानगर पालिका द्वारा यदि शहर के विकास, मनपा की आय वृद्धि सहित जनहित से जुडे किसी विशेष मुद्दे पर विशेष सभा बुलाई गई होती, तो उसका औचित्य भी समझ में आया होता. परंतु साफ-सफाई जैसे दैनंदिन काम और प्राथमिक कर्तव्य को लेकर चर्चा करने हेतु मनपा द्वारा विशेष सभा बुलाए जाने की एक शोकांतिका ही कहा जा सकता है. अपनी स्थापना के 35 साल बाद भी यदि अमरावती मनपा की यह स्थिति है, तो यह स्थानीय प्रशासन के लिहाज से चुल्लूभर पानी में डूब मरने वाली स्थिति है. साथ ही साफ-सफाई के मुद्दे पर विशेष सभा बुलाए जाने की नौबत को मनपा प्रशासन के मुंह पर तमाचा भी कहा जा सकता है. ऐसे में यह उम्मीद की जा सकती है कि, आगामी 28 फरवरी को होने जा रही विशेष सभा में साफ-सफाई के मुद्दे पर कई घंटों की चर्चा करने की बजाए इस स्थिति के लिए जिम्मेदार रहनेवाले लोगों के खिलाफ सीधी कार्रवाई की जाए. जाहीर तौर पर इस स्थिति के लिए मनपा प्रशासन के अधिकारी और सफाई ठेकेदार ही जिम्मेदार है. जिसके चलते मनपा के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों व पार्षदों से अपेक्षा रखी जा सकती है कि, साफ-सफाई के मुद्दे पर प्रशासक राज के दौरान हुए काम का ‘ऑडिट’ करते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ सीधी कार्रवाई का प्रस्ताव आम सहमती से पारित करवाया जाए. साथ ही साथ संबंधितों के खिलाफ सीधी कार्रवाई को सुनिश्चित भी करवाया जाए.
* मनपा प्रशासन और सफाई ठेकेदार ही हैं पूरी समस्या के लिए जिम्मेदार
सबसे प्रमुख सवाल यह है कि, भले ही वर्ष 2022 से अमरावती महानगर पालिका में प्रशासक राज चल रहा था और इस दौरान तत्कालीन आयुक्त प्रवीण आष्टीकर, देवीदास पवार, सचिन कलंत्रे सहित वर्तमान आयुक्त सौम्या शर्मा-चांडक जैसे चार प्रशासक हुए. जिनके पास बतौर प्रशासक मनपा के कामकाज से संबंधित सभी अधिकार केंद्रीत थे और उनके कामकाज में किसी भी तरह का कोई राजनीतिक हस्तक्षेप भी बाधा नहीं था, तो इसके बावजूद भी महानगर पालिका द्वारा साफ-सफाई जैसी प्राथमिक जिम्मेदारी को सही ढंग से पूरा क्यों नहीं किया गया और कचरे व गंदगी की समस्या से पूरा अमरावती शहर विगत 4-5 वर्षों से परेशान क्यों रहा. कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि, यदि इस दौरान साफ-सफाई का काम सही ढंग से किया गया होता, तो मनपा के नवगठित सदन की पहली आमसभा में ही साफ-सफाई के मुद्दे को लेकर नवनिर्वाचित पार्षदों का गुस्सा नहीं फुटता और मनपा को साफ-सफाई के मुद्दे पर खास तौर से चर्चा करने हेतु विशेष सभा बुलाने पर मजबूर नहीं होना पडता. लेकिन चूंकि ऐसा हुआ है, तो यह सवाल भी पूछा जाना चाहिए कि, अगर अमरावती शहर में विगत लंबे समय से साफ-सफाई तथा कचरे व गंदगी की समस्या बनी हुई है. तो इसके लिए असल में जिम्मेदार कौन है और किसे जवाबदेह माना जाए. साथ ही शहर में कचरे व गंदगी के लिए जिम्मेदारों पर सीधी कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए.
* प्रशासक राज में सफाई ठेकों के आवंटन को लेकर भी जबरदस्त प्रयोग व मनमानी
– प्रभाग निहाय के बाद जोन निहाय और फिर एकल ठेका के आवंटन में फंसा रहा मनपा प्रशासन
यहां यह कहने और स्वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए कि, शहर में व्याप्त कचरे व गंदगी की समस्या के लिए पूरी तरह से मनपा प्रशासन और सफाई ठेकेदार ही जिम्मेदार है. क्योंकि सबसे अव्वल तो प्रशासक राज के दौरान सफाई ठेकों के आवंटन को लेकर मनमाने ढंग से जबरदस्त प्रयोग किए गए.
* मनपा अधिकारियों की लापरवाही के चलते ही शहर बन गया कचरे का ढेर
– साफ-सफाई की बजाए कोर्ट-कचहरी में ही पूरा समय व्यस्त रहे सफाई ठेकेदार
याद दिला दें कि, वर्ष 2017 से 2022 तक मनपा का पिछला सदन अस्तित्व में रहते समय अमरावती शहर में प्रभागनिहाय सफाई ठेका पद्धती पर अमल किया जाता था. जिसके तहत शहर के 22 प्रभागों हेतु 22 सफाई ठेकेदार नियुक्त करने के साथ ही शहर के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों की साफ-सफाई के लिए एक स्वतंत्र ठेकेदार ऐसे कुल 23 सफाई ठेके दिए गए थे और प्रत्येक ठेकेदार को उसके कार्यक्षेत्र की साफ-सफाई के लिए जिम्मेदार मानकर काम में कोताही होने पर जवाब-तलब एवं कार्रवाई जैसे कदम उठाए जाते थे. परंतु मनपा के पिछले सदन का कार्यकाल खत्म होते ही और मनपा प्रशासन के कामकाज से संबंधित पूरे अधिकार बतौर प्रशासक अपने पास आते ही तत्कालीन आयुक्त प्रवीण आष्टीकर ने प्रभागनिहाय ठेका पद्धती की बजाए जोन निहाय सफाई ठेके का एक अनूठा प्रयोग करना शुरु किया और शहर के पांच जोन की साफ-सफाई के लिए पांच निविदाएं जारी करते हुए तीन एजेंसीयों को पूरे शहर की साफ-सफाई की जिम्मेदारी सौंपी गई. जिसके तहत श्री नागरी संस्था को जोन क्रमांक 1 व 5, गोविंदा संस्था को जोन क्रमांक 2 व 4 तथा क्षीतिज संस्था को जोन क्रमांक 3 की साफ-सफाई का जिम्मा सौंपा गया. कहा जा सकता है कि, यहीं से सारी गडबडियों की शुरुआत हुई. क्योंकि अपने-आप में काफी बडे रहनेवाले जोन में शामिल सभी रिहायशी इलाकों में चुस्त-दुरुस्त तरीके से साफ-सफाई करवाना किसी एक ठेकेदार के लिए संभव ही नहीं था. परंतु इससे सबक लेने की बजाए मनपा प्रशासन ने नवंबर 2025 में और एक कदम आगे बढाते हुए पूरे शहर की साफ-सफाई, कचरा संकलन व कचरा ढुलाई के लिए संयुक्त व एकल निविदा जारी करते हुए कोणार्क इंफ्रास्ट्रक्चर लिमीटेड नामक कंपनी को शहर की साफ-सफाई का जिम्मा सौंप दिया. जबकि उस समय तक जोन निहाय ठेके की निर्धारित कार्यावधि भी शेष बची हुई थी. जिसके चलते श्री नागरी संस्था एवं गोविंदा संस्था ने मनपा के इस फैसले को अदालत में चुनौती दे दी. जिसकी वजह से शहर की साफ-सफाई का काम तो एक ओर रह गया तथा सफाई ठेकेदार एजेंसीया पूरा समय कोर्ट-कचहरी में ही व्यस्त दिखाई दिए.
* करोडों का भुगतान लेने के बावजूद सफाई ठेकेदारों ने नहीं किया काम
– सफाई ठेके के देयकों में जमकर हुई ‘बंदरबांट’, आपसी मिलीभगत ने किया शहर का बेडा गर्क
ऐसे में कहा जा सकता है कि प्रशासक राज के दौरान मनपा के अधिकारियों की मनमानी व लापरवाही के चलते अमरावती शहर कचरे का ढेर बनकर रह गया तथा सफाई कामों के नाम पर करोडों का भुगतान जारी होने के बावजूद सफाई ठेकेदारों ने साफ-सफाई से संबंधित कोई काम नहीं किया. जाहीर सी बात है कि, साफ-सफाई का काम किए बिना सफाई ठेके के देयकों का भुगतान जारी होने में जमकर ‘बंदरबांट’ हुई और इसी आपसी मिलीभगत ने अमरावती शहर का बेडा गर्क कर दिया.
* अब सभी नवनिर्वाचित पार्षद अपने-अपने वॉर्डों व प्रभागों की गलियां व नालियां करवा रहे साफ
– सोशल मीडिया पर साफ-सफाई के कामों की जमकर वायरल हो रही पोस्ट और रील
यही वजह है कि, विगत माह हुए मनपा के आम चुनाव पश्चात निर्वाचित हुए विभिन्न प्रभागों के सभी नवनिर्वाचित पार्षद अब अपने-अपने वॉर्डों व प्रभागों की गलियां व नालियां साफ करवाते दिखाई दे रहे है. जिनके द्वारा करवाए जा रहे साफ-सफाई के कामों की सोशल मीडिया पर पोस्ट और रील जमकर वायरल हो रही है.
* खुद मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा को साफ-सफाई कराने उतरना पड रहा मैदान में
– मनपा के स्वच्छता विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के कामकाज पर सवाल उठना लाजिमी
वहीं दूसरी ओर महानगर पालिका के पूरे कामकाज की खुद पर जिम्मेदारी रहनेवाली मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा भी विगत कुछ समय से खुद शहर के अलग-अलग प्रभागों में जाकर साफ-सफाई के कामों का जायजा ले रही है. जिसे देखते हुए सवाल उठाया जा सकता है कि, अगर खुद मनपा आयुक्त को साफ-सफाई जैसे काम करवाने के लिए मैदान में उतरना पड रहा है, तो मनपा के स्वच्छता विभाग के अधिकारी व कर्मचारी किस बात का वेतन ले रहे है. साथ ही सफाई ठेकेदार को किस काम के देयकों का भुगतान किया जा रहा है.





