राष्ट्रपिता का अपमान गंभीर कृत्य, शिकायत की दखल क्यों नहीं ली?
नागपुर हाईकोर्ट ने सीताबर्डी पुलिस को लगाई फटकार

* हिंदूवादी वक्ता पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने दिया था विवादास्पद बयान
नागपुर/दि.18 – मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान करने को बेहद गंभीर कृत्य बताते हुए इसे लेकर दर्ज शिकायत की गंभीरतापूर्वक दखल नहीं लिए जाने को लेकर नागपुर की सीताबर्डी पुलिस को जमकर आडेहाथ लिया और 30 मार्च तक जवाब पेश करने का निर्देश भी दिया.
बता दें कि, नागपुर में आयोजित हिंदू सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में बेहद अपमानजनक व आपत्तिजनक वक्तव्य किए जाने के चलते वरिष्ठ पत्रकार एवं हिंदूवादी वक्ता पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ तथा हिंदू सम्मेलन के संयोजक निशांत गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने हेतु नागपुर जिला ग्रामीण कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष अश्विन बैस ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है. जिस पर गत रोज न्या. अनिल पानसरे व न्या. निवेदिता मेहता की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई. जिसके दौरान अदालत में इस मामले में पुलिस की उदासीन भूमिका को लेकर अपनी नाराजगी जताई. अदालत का कहना रहा कि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘ललिता कुमारी’ के मामले में दिए गए निर्णयानुसार दखलपात्र अपराध से संबंधित शिकायत रहने पर पुलिस को त्वरीत एफआईआर दर्ज करना बंधनकारक है, लेकिन इसके बावजूद नागपुर पुलिस ने इस बात की ओर अनदेखी की है.
बता दें कि, विगत 15 फरवरी को सिवील लाइन स्थित चिटणीस सेंटर में ‘हिंदू – कल, आज और कल’ विषय पर सकल हिंदू समाज सम्मेलन आयोजित किया गया था. जिसमें मुख्य अतिथि व प्रमुख वक्ता के तौर पर उपस्थित ज्येष्ठ पत्रकार पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने सार्वजनिक शांति को भंग करने तथा दंगा भडकाने के उद्देश्य से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लेकर विवादास्पद बातें कही. जिसके तहत कुलश्रेष्ठ ने कहा कि, राष्ट्रपिता ने पंडित लक्ष्मणाचार्य द्वारा रचित ‘ईश्वर तेरो नाम’ गीत की चोरी करते हुए उसके अपभ्रंश को अपने नाम से प्रचारित व प्रसारित किया. ऐसा व्यक्ति इस देश का राष्ट्रपिता नहीं हो सकता. ऐसे में इस जहरिले बयान के लिए पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के खिलाफ बीएनएस की धारा 353 (1) (बी) (सी), 353 (2) व 356 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की जाए.
* हाईकोर्ट ने कुलश्रेष्ठ के नाम भी जारी की नोटिस
हाईकोर्ट ने पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ व निशांत गांधी के नाम पर भी नोटिस जारी करते हुए उन्हें अगली तारीख पर होनेवाली सुनवाई से पहले अपना स्पष्टीकरण पेश करने हेतु कहा है.
इन दोनों के खिलाफ याचिकाकर्ता द्वारा 28 फरवरी को सीताबर्डी पुलिस थाने और 4 मार्च को पुलिस आयुक्त के पास शिकायत दी गई थी. परंतु पुलिस ने कोई भी कार्रवाई नहीं की. जिसके चलते याचिकाकर्ता ने एड. आकाश मून के जरिए नागपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले में हस्तक्षेप करने हेतु गुहार लगाई थी.





