एक लाख के कर्ज पर ब्याज पर ब्याज

किसान ने मांगी इच्छा मृत्यु

* चंद्रपुर जिले की घटना
* साहूकार ने किया था किडनी बेचने मजबूर
चंद्रपुर /दि.3- चंद्रपुर जिले के मिंथूर के रोशन कुडे ने साहूकार के अत्याचार के कारण अपनी किडनी कंबोडिया में बेचने का चौंकाने वाला मामला सामने आया था. उसके बाद अब रोशन कुडे ने साहूकार के अत्याचार से परेशान होकर किडनी बेचने वाले नागभीड तालुका के किसान कुडे ने सरकार से सीधे इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है. बजट सत्र में मुख्यमंत्री ने अवैध साहूकारों की संपत्ति फ्रीज करने के आदेश दिए थे, लेकिन डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, ऐसा आरोप रोशन कुडे ने लगाया है. उनकी इस मांग से जिले में हड़कंप मच गया है.
देश की न्यायव्यवस्था में अत्यंत संवेदनशील और ऐतिहासिक निर्णय हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने दिया है. 13 साल से कोमा में रहे 32 वर्षीय हरीश राणा को ‘निष्क्रिय इच्छा मृत्यु’ की अनुमति सर्वोच्च न्यायालय ने दी है. इसके बाद इस घटना की देशभर में चर्चा हो रही है. ऐसे में अब अवैध साहूकारों के कर्ज के जाल में फंसकर अपनी किडनी बेचने की नौबत आने वाले रोशन कुडे इस किसान ने भी ऐसी ही मांग की है. आज भी न्याय के लिए प्रशासन के चक्कर काटने पड़ रहे हैं. बजट सत्र में मुख्यमंत्री ने अवैध साहूकारों की संपत्ति फ्रीज करने के आदेश दिए थे, लेकिन डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, ऐसा आरोप रोशन कुडे ने लगाया है.
मेरी जमीन मुझे वापस नहीं मिली है, मेरा पूरा जीवन खेती पर निर्भर है. चार महीने से मैं न्याय के लिए भटक रहा हूं, लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है. इसलिए मुझे जल्द से जल्द मदद करें अन्यथा मुझे इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए, ऐसी भावुक मांग उन्होंने जिलाधिकारी को निवेदन देकर सरकार से की है.
साहूकार के अत्याचार से परेशान होकर किडनी बेचने वाले किसान रोशन कुडे के पिता ने बताया कि उनका बेटा किस तरह साहूकारी के जाल में फंसता गया और आखिर उसे अपनी किडनी क्यों बेचनी पड़ी, इसकी विस्तृत हृदयविदारक कहानी सामने रखी. कोरोना काल में खराब हुए दूध के व्यवसाय और उसके बाद आए लंपी रोग के कारण रोशन कुडे साहूकार से लिया गया केवल एक लाख रुपये का कर्ज नहीं चुका सके. लेकिन दूसरी तरफ साहूकार उसे लगातार अपने जाल में फंसाते रहे. ब्याज पर ब्याज जोड़कर लाखों रुपये की रकम उससे वसूली और आखिरकार उसे किडनी बेचने पर मजबूर कर दिया, ऐसी व्यथा शिवदास कुडे ने बताई है.

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