वरुड के बाघ शिकार प्रकरण में जांच अधिकारी हुए फेल

आरोपी केवल 2 दिन रिमांड पर रहकर हुए जेल रवाना

अमरावती /दि.13 – वरुड वनपरिक्षेत्र के बाघ शिकार प्रकरण में आरोपियों को पकडने की कार्रवाई काफी गडबडी में किए जाने की बात जिला सत्र न्यायालय में उजागर हुई है. जांच अधिकारियों द्वारा इस प्रकरण की महत्वपूर्ण बातों की तरफ गंभीरता से ध्यान दिए जाने के कारण आरोपियों को छूटने का अवसर निर्माण हुआ दिखाई देता है. जांच में गलती के कारण न्यायालय द्वारा चारों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. इस कारण उन्हें जमानत मिलने का मार्ग भी खुला हो गया है.
वरुड वनपरिक्षेत्र के वाई सर्कल के पंढरी बीट में 3 फरवरी को एक बाघ की संदेहास्पद मृत्यु हो गई थी और उसका शव बरामद हुआ था. प्रारंभ में जांच अधिकारी और मोर्शी के सहायक वनसंरक्षक डॉ. मयूर भैलुमे ने इस बाघ की मृत्यु नैसर्गिक होने की झूठी रिपोर्ट वरिष्ठों को प्रस्तुत की. लेकिन इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चा व्याप्त थी. 10 दिनों के बाद भी बाघ के शिकार का सुराग वन अधिकारियों को नहीं मिल पाया. लेकिन दो दिन के पूर्व वरुड के वनपरिक्षेत्र अधिकारी प्रशांत भुजाडे ने महाराष्ट्र के 3 और मध्य प्रदेश के 1 ऐसे 4 लोगों को कब्जे में लिया. वास्तविक रुप से देखा जाए तो बाघ शिकार प्रकरण की संपूर्ण जांच सहायक वनसंरक्षक मयूर भैलुमे द्वारा किया जाना आवश्यक रहते वे अमरावती में ही बैठे थे. इस कारण वे इस प्रकरण में गंभीर न रहते दिखाई दिए.

* सहायक वनसंरक्षक जिम्मेदार
वन्यजीव संरक्षण बाबत सहायक वनसंरक्षक द्वारा बाघ अथवा अन्य वन्यजीव का शिकार होने के बाद समीक्षा लेने की जिम्मेदारी महाराष्ट्र वन संहिता 2020 में निश्चित की गई है. इस बाघ शिकार प्रकरण में जांच अधिकारी डॉ. मयूर भैलुमे द्वारा न्यायालय में प्रकरण दाखिल करते समय इस प्रकरण के गवाहों के बयान दर्ज करना आवश्यक था और जांच में बारिकी से नजर रखना आवश्यक था.

* जांच में अनेक खामियां
– वरुड वनपरिक्षेत्र के बाघ शिकार प्रकरण की जांच सहायक वनसंरक्षक डॉ. मयूर भैलुमे के पास रहते हुए उन्होंने आरोपी पकडने का काम नहीं किया. बाघ शिकार प्रकरण में पंढरी निवासी सुनील यादवराव अजमिरे, मुन्ना यादवराव अजमिरे, प्रेमलाल हीरासिंग उईके और सुभाष नंदू सलामे ऐसे 4 आरोपियों को कब्जे में लेने के बाद डॉ. भैलुमे और वरुड के आरएफओ प्रशांत भुजाडे ने उन्हें न्यायालय में पेश किया.
– लेकिन आरोपियों का केवल 2 दिन ही रिमांड मिल पाया. एसीएफ भैलुमे ने जांच में अनेक खामियां छोडी, इस कारण 10 फरवरी को आरोपियों को न्यायिक हिरासत मिल गई. वास्तविक रुप से वन्यजीव शिकार प्रकरण में कम से कम 3 से 7 दिन का रिमांड मिलना अपेक्षित था. जांच की खामियां इसके लिए कारणीभूत साबित हुई है.

* जांच अधिकारियों के वाहन कहां घुमे?
सहायक वनसंरक्षक डॉ. मयूर भैलुमे यह अमरावती में बैठकर मोर्शी, वरुड वनपरिक्षेत्र का कामकाज चलाते है. उनके पास रहे शासकीय वाहन बाघ शिकार प्रकरण में कहां घुमे, यह जांच करने की जिम्मेदारी अमरावती के उपवनसंरक्षक के. आर. अर्जुना की है. क्योंकि जांच अधिकारी डॉ. मयूर भैलुमे के शासकीय वाहन की फेरियां कारंजा लाड में होने की जानकारी सूत्रों ने दी है. इतना ही नहीं बल्कि जांच के कागजपत्र भी एसीएफ भैलुमे द्वारा तैयार न किए जाने की चर्चा है.

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