जलशुद्धिकरण मशीनों की खरीदी हेतु जारी निविदा में अनियमितता
मेलघाट के बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड

* जिप सीईओ से की शिकायत
अमरावती /दि.20 – कुपोषण और पानी की गंभीर समस्या से जुझ रहे मेलघाट क्षेत्र के बच्चों के लिए चलाई जा रही एक महत्वपूर्ण योजना में जिला परिषद के महिला एवं बालविकास विभाग द्वारा जानबुझकर लापरवाही का संदेह जताया जा रहा. मेलघाट की आंगणवाडियों के लिए जल शुद्धिकरण मशीनों की खरीदी हेतु जारी निविदा प्रक्रिया में बडे पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आये है. सबसे गंभीर आरोप यह है कि, कुछ चुनिंदा आपूर्तिकर्ताओं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से निविदा की शर्तो मेें जानबुझकर फेरबदल किया गया है. इस मामले में जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीता मोहपात्रा से शिकायत की गई है. जिससे अब इस मामले की जांच के अलावा संपूर्ण निविदा प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में आ चुकी है.
महिला एवं बालविकास विभाग द्वारा 27 नवंबर 2025 को मेलघाट की 400 अंगणवाडियों के लिए बिना बिजली से चलने वाली जलशुद्धिकरण मशीन खरीदी हेतु ऑनलाइन पोर्टल पर निविदा जारी की गई थी. हालांकि शुरुआत से ही निविदा पारदर्शी न होकर कुछ कंपनियों को लाभ देने के लिए तैयार की गई थी, ऐसा शिकायत में आरोप लगाया गया है. सरकारी नियमों के अनुसार तकनीकी प्रक्रिया पूर्ण होने के पहले नमूने प्रस्तूत करने की बाध्यता नहीं लगाई जा सकती. लेकिन निविदा में ऐसी शर्त जोडकर कई पात्र ठेकेदारों को स्पर्धा से बाहर करने का आरोप लगाया गया है. इस तरह के नियमों के अनुसार ईएमडी में छूट मूल निर्माता कंपनियों को ही दी जा रही है.
आरोप है कि, निविदा में केवल टे्रडिंग करने वाली कंपनियों को 1.90 लाख रुपए की अनामत राशि में अवैध छूट दी गई है. जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है. सबसे चौकाने वाली बात यह है कि, पात्र घोषित की गई. साईराम ट्रेडिंग, शिल्पी इंजिनियरिंग, सन एनर्जी सहित कुल पांच कंपनियों ने पैरामाइंट कंपनी का वेब झेड प्लस मॉडल प्रस्तुत किया है. इसके अलावा इन कंपनियों के दरों में केवल 0.2 प्रतिशत का अंतर पाया गया है. इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि, मामला पुल रेटींग या कार्टेल (व्यापारी गुटबाजी) का हो सकता है. इसमें प्रतिस्पर्धा को खत्म कर अधिक दर पर ठेका हासिल करने की कोशिश की है.
* जिप सीईओ की कार्रवाई पर टीकी निगाहें
मेलघाट कुपोषण और दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है. ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य से जुडी सामग्री खरीदी पूरी तरह से पारदर्शी होना अनिवार्य था. लेकिन निविदा की शर्तों में देखकर प्रमुख दृष्टि से यह मामला जनस्वास्थ्य की बजाय कुछ ठेकेदारों के हित साधने का प्रतिक हो रहा है. इस कथित घोटाले के प्रमाण और फॉरेन्सिक मूल्यांकन और रिपोर्ट प्रशासन को सौंपे जाने की बात सामने आयी है. अब देखना यह होगा कि, सीईओ इस दूषित निविदा प्रक्रिया को रद्द कर नई निविदा लागू करती है, या फिर इस कथित भ्रष्टाचार को संरक्षण देती है. इस पूरे प्रकरण में जिलेभर की निगाहें टीकी हुई है.





