महिला सरपंच सत्ता में या केवल मुहर

शिराला ग्रामसभा प्रकरण से प्रशासन की कसौटी

* बेटी सरपंच होने से पिता मिलिंद तायडे ही कर रहे सारा कामकाज : आरोप
* ग्राम सभा में हंगामा, लोकशाही और सामाजिक न्याय पर सवाल
शिराला / दि. 6 – शिराला ग्राम पंचायत में हाल ही में हुए घटनाक्रम से संविधान के उद्देश्यों पर सवाल उठने की बात हो रही है. 5 फरवरी को दोबारा ली गई ग्रामसभा में विकास कामों का लेखा जोखा रखने की जगह हंगामा, टालमटोल और जिम्मेदारी से हाथ झटके जाने का आरोप ग्रामीणों ने किया है. यह भी कहा जा रहा है कि ग्रामसभा लोकतांत्रिक चर्चा का मंच न बनते हुए सत्तापक्ष की दिक्कतों को दूर करने का साधन बन गई है.
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि महिला सरपंच अंकिता मिलिंद तायडे प्रत्यक्ष निर्णय प्रक्रिया में नहीं दिखाई देती. ग्राम सभा, दैनंदिन व्यवहार, कामकाज पर उनके पिता मिलिंद तायडे का कब्जा है. हालांकि मिलिंद तायडे भी ग्राम पंचायत सदस्य है. ग्राम सभा के कामकाज से उपरोक्त बात स्पष्ट होने का दावा भी ग्रामीण कर रहे हैं. ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि उपरोक्त मामला केवल प्रशासकीय अनियमितता तक सीमित नहीं है. महिला को केवल नाम की सरपंच बनाकर प्रत्यक्ष सत्ता अन्य लोगों के हाथ में देने का विषय तो नहीं ?
ग्रामसभा में सडक, जलापूर्ति, स्वच्छता और अन्य विकास कामों के बारे में प्रश्न पूछे गये. किंतु उनके स्पष्ट उत्तर नहीं दिए गये. आरोप है कि कुछ लोगों ने शराब के नशे में हंगामा कर जान बूझकर वातावरण तंग कर दिया था. हंगामे का लाभ लेकर उप सरपंच और ग्राम सचिव सभा स्थल से चले गये थे. उल्लेखनीय है कि गत 26 जनवरी को आयोजित ग्रामसभा कोरम के अभाव में 5 फरवरी को दोबारा ली गई जिसमें हंगामा हुआ और ग्रामसभा के कई महत्वपूर्ण मुद्दे अनुत्तरीत रह गये.
महिला सरपंच स्वतंत्रता से कामकाम कर रही है या किसी के दबाव अथवा अप्रत्यक्ष नियंत्रण में ? यह प्रश्न उठाया जा रहा है. प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप किया जा रहा है कि महिला सरपंच को ‘डमी’ बनाया जा रहा है. पंचायत राज व्यवस्था और सामाजिक न्याय के सिध्दांतों का मखौल तो नहीं ? यह प्रश्न उपस्थित किया जा रहा है. संपूर्ण प्रकरण की तत्काल और स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच की जाए, इस प्रकार की प्रतिक्रिया लोग दे रहे हैं. अगली ग्रामसभा प्रशासकीय उपस्थिति में अनुशासित और पारदर्शी होने की मांग ग्रामीण कर रहे हैं.

सब मनमानी कामकाज
शिराला के ग्रामस्थ बालासाहब आमले ने गुरूवार की ग्रामसभा के विषय में आरोप लगाया कि मनमाना कामकाज चल रहा है. सरपंच के पिता अपने आपको सरपंच मानकर कार्यभार चला रहे हैं. सरपंच ग्राम पंचायत में अनुपस्थित रहती है.

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