क्या महाराष्ट्र में बंद होने वाली है मुफ्त बिजली योजना?

महावितरण ने दी सफाई

नागपुर /दि.21 – सोलर रूफटॉप परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया में बदलाव के बाद राज्य में मुफ्त बिजली योजना बंद होने की चर्चा शुरू हो गई थी. रिन्यूएबल एनर्जी संगठनों ने आरोप लगाया कि नए नियमों से नए घरेलू उपभोक्ता योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे. इस पर महावितरण ने स्पष्ट किया है कि योजना बंद नहीं की जा रही, बल्कि दुरुपयोग रोकने के लिए नियम कड़े किए गए हैं.

* क्यों बदले नियम?
महावितरण के अनुसार कुछ मामलों में उपभोक्ता जरूरत से ज्यादा क्षमता का सोलर प्रोजेक्ट लगाकर केंद्र सरकार की सब्सिडी ले रहे थे और बाद में कनेक्शन को व्यावसायिक (कमर्शियल) उपयोग में बदल रहे थे. इसके अलावा कई उपभोक्ताओं की वास्तविक जरूरत 1-2 किलोवॉट होने के बावजूद उन्हें अधिक क्षमता का प्लांट लगाने के लिए दबाव डाला जा रहा था, जिससे उन पर अतिरिक्त खर्च का बोझ पड़ रहा था.
अब नई व्यवस्था में उपभोक्ता के पिछले 12 महीनों के औसत बिजली उपयोग के आधार पर ही क्षमता मंजूर होगी. जरूरत से ज्यादा क्षमता की मांग होने पर जांच के बाद ही अनुमति मिलेगी. परिवार बढ़ने या वास्तविक आवश्यकता साबित होने पर अतिरिक्त क्षमता मंजूर की जाएगी

* योजना बंद नहीं, सिर्फ नियंत्रण
यह योजना प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत चल रही है, जो सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए है. महावितरण ने कहा कि बदलाव का उद्देश्य केवल अनुदान के दुरुपयोग को रोकना है, योजना रोकना नहीं. उपभोक्ता अपनी जरूरत की बिजली स्वयं बना सकते हैं और अतिरिक्त बिजली वितरण कंपनी को बेच भी सकते हैं.

* कितनी मिलती है सब्सिडी?
– 1 किलोवॉट प्रोजेक्ट – 30,000
– 2 किलोवॉट – 60,000
– 3 किलोवॉट – 78,000

* महाराष्ट्र में योजना की स्थिति
– 4.53 लाख उपभोक्ता लाभान्वित
– कुल क्षमता: 1,722 मेगावॉट
– कुल सब्सिडी: 3,162 करोड़
– देश में दूसरे स्थान पर राज्य

* क्यों फैला भ्रम?
नई मंजूरी प्रणाली लागू होने के बाद सोलर उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा हुआ कि भविष्य की जरूरत के अनुसार बड़ा प्रोजेक्ट नहीं लगाया जा सकेगा. इसी वजह से योजना पर ब्रेक लगने की आशंका जताई गई थी. जबकि हकीकत यह है कि, मुफ्त बिजली योजना बंद नहीं हो रही है. महावितरण ने स्पष्ट किया है कि केवल वास्तविक जरूरत के अनुसार सोलर प्रोजेक्ट मंजूर होंगे, ताकि सब्सिडी का गलत फायदा रोका जा सके और घरेलू उपभोक्ताओं को ही प्राथमिकता मिले.

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