लगातार तुल पकड रहा है जन्म-मृत्यु के फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला
2896 फर्जी प्रमाणपत्र जांच के घेरे में, 1016 लोगों पर एफआईआर दर्ज

* मिशन मोड पर चल रही जांच, और भी अधिक बढ सकता है कार्रवाई का दायरा
अमरावती/दि.26 – अमरावती जिले में जन्म प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर प्रशासन द्वारा की जा रही जांच में खुलासा हुआ है कि तहसील कार्यालय स्तर पर जारी किए गए कुल 2896 जन्म प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए, जिनमें कथित रूप से बांग्लादेशी अथवा अपात्र व्यक्तियों को प्रमाणपत्र जारी किए जाने का मामला सामने आया है. जांच के दौरान 1016 आवेदकों द्वारा फर्जी और बनावटी दस्तावेज प्रस्तुत कर शासन को धोखा देने की पुष्टि होने के बाद उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है.
जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताएं
प्रशासन द्वारा मिशन मोड में दस्तावेजों की दोबारा जांच कराई गई. इस दौरान कई मामलों में जन्म तिथि, निवास प्रमाणपत्र, माता-पिता की पहचान और अन्य सरकारी दस्तावेजों में गंभीर विरोधाभास पाए गए. जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में आवेदकों ने सुनियोजित तरीके से नकली दस्तावेज तैयार कर जन्म प्रमाणपत्र प्राप्त किए. प्रारंभिक जांच में 2896 प्रमाणपत्रों को संदेहास्पद माना गया था, जिनमें से 1016 मामलों में पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर धोखाधड़ी, जालसाजी और शासकीय दस्तावेजों के दुरुपयोग के तहत मामला दर्ज किया गया है. बाकी मामलों की जांच अभी जारी है.
* प्रशासन सख्त कार्रवाई के मूड में
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. प्रशासन के अनुसार फर्जी दस्तावेज जमा करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी. प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. भविष्य में जन्म प्रमाणपत्र जारी करने की प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सख्त बनाया जाएगा. सभी संदिग्ध प्रमाणपत्रों का डिजिटल सत्यापन कराया जाएगा.
* जिले में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज
घोटाले के सामने आने के बाद जिले में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रिया तेज हो गई है. विपक्षी दलों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, जबकि प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है.
* पूछताछ शुरू, बढ़ सकती है कार्रवाई
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिन 1016 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है उनसे पूछताछ शुरू कर दी गई है. जांच के दौरान यदि किसी बिचौलिये, कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस पूरे मामले ने जन्म प्रमाणपत्र जैसी महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं प्रशासन के सामने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब बड़ी चुनौती बन गया है.





