मीरा कांबले की सदस्यता रद्द होना मुश्किल

पहली ही आमसभा में किया था महापौर- उप महापौर को वोटिंग

* एमआयएम की नगरसेविका
अमरावती/ दि. 7- महापालिका की चार वर्षो बाद इलेक्शन पश्चात पहली आमसभा में महापौर और उप महापौर का रिवाज अनुसार सर्वप्रथम चुनाव किया गया. इसी चुनाव में एमआयएम की नगरसेविका मीरा कांबले ने तटस्थ न रहते हुए महापौर और उप महापौर पद के महायुति के उम्मीदवारों के फेवर में मतदान किया. जिसके बाद मीरा कांबले न केवल विदर्भ बल्कि समस्त राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है. किंतु जानकारों और विधि विशेषज्ञों का मानना है कि मीरा कांबले की मनपा सदस्यता रद्द किया जाना मुश्किल है. इसके पीछे नानाविध कारण बताए जा रहे हैं.
सोच समझकर किया वोट
बडनेरा जूनी बस्ती प्रभाग 21 की नवनिर्वाचित एमआयएम नगरसेविका मीरा कांबले ने शुक्रवार को मनपा सदन में पहली ही आमसभ में अभूतपूर्व कदम उठा लिया. उन्होंने सोच समझकर महापौर और उप महापौर चुनाव में सत्तापक्ष के फेवर में मतदान किया. एमआयएम नेता बताते है कि उन्होंने पार्टी के सभी नगरसेवकों से ‘मशवरा’ किया था. बैठक भी ली गई थी. किंतु शुक्रवार को मीरा कांबले के मतदान पश्चात अमरावती मंडल की ब्रेकिंग न्यूज जारी हुई. तब आनन-फानन में एमआयएम ने मीडिया के नाम अपना सभी नगरसेवकों के हस्ताक्षर वाला पत्र जारी किया. यह पत्र गत 2 जनवरी को मनपा में एमआयएम गट के रजिस्ट्रेशन के लिए जारी किया गया पत्र रहने की जानकारी है.
प्रदेशाध्यक्ष का कडा रूख
एमआयएम नगरसेविका द्बारा अमरावती में बीजेपी नीत महायुति के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान का समाचार समूचे राज्य में सुर्खियों में रहा. ऐसे में एमआयएम के प्रदेशाध्यक्ष इम्तियाज जलील ने शुक्रवार शाम पत्रकार परिषद लेकर कडा रूख अपनाया. उन्होंने पार्टीजनों को ही लताडा. इम्तियाज जलील ने स्पष्ट रूप से कहा कि व्हीप जारी नहीं किया गया था. इससे भी कहा जा रहा है कि मीरा कांबले की मनपा सदन मेंबरशिप कैंसल होना मुश्किल है.
कांबले के पीछे खडे हैं राणा
मीरा कांबले के पार्टी लाइन से अलग जाकर महापौर और उप महापौर चुनाव में तटस्थ न रहना चर्चा का विषय बना हुआ है. कांबले की सदस्यता रद्द किए जाना इसलिए भी मुश्किल दिखाई पड रहा है कि सत्ताधारी युति के विधायक रवि राणा मीरा कांबले के पीछे खडे हैं. फलस्वरूप अभी चर्चा और कयास यही है कि मीरा कांबले की मनपा सदस्यता बच जायेगी.

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