रात के अंधेरे में सड़क पार करता दिखा ‘जंगल का राजा’

हरिसाल मार्ग पर वन गाइड को मिला सांसें थाम देने वाला अनुभव, मोबाइल में कैद किया वीडियो

अमरावती/दि.12 – पर्वतीय और दुर्गम भौगोलिक संरचना के कारण मेलघाट व्याघ्र परियोजना क्षेत्र में वन्यजीवों का दर्शन अन्य टाइगर रिज़र्व की तुलना में अपेक्षाकृत कम होता है. विशेष रूप से बाघ का दिखाई देना तो बेहद दुर्लभ माना जाता है. लेकिन हाल के वर्षों में बाघों की संख्या बढ़ने से ऐसे रोमांचक क्षण अब कभी-कभी देखने को मिल रहे हैं. रविवार देर रात घर लौटते समय हरिसाल मार्ग पर जंगल गाइड अशोक आठवले को बाघ का बेहद नज़दीक से दर्शन हुआ. अंधेरे में सड़क पार करते इस बाघ को उन्होंने अपने मोबाइल कैमरे में कैद भी किया. यह पल इतना रोमांचक था कि कुछ क्षणों के लिए सांसें थम-सी गईं.
जंगल गाइड अशोक आठवले बताते हैं कि वे वर्षों से जंगल मार्गदर्शक के रूप में काम कर रहे हैं और अब तक पांच से छह बार बाघ देख चुके हैं, लेकिन मुख्य सड़क पर रात के समय बाघ का सामने आ जाना उन्होंने कभी नहीं सोचा था. बाघ शांतिपूर्वक सड़क पार कर जंगल की ओर निकल गया. समय बहुत कम होने के कारण लंबे समय तक वीडियो रिकॉर्ड नहीं किया जा सका.
* हरिसाल जंगल सफारी को मिल रहा अच्छा प्रतिसाद
बता दें कि, अमरावती से लगभग 125 किलोमीटर दूर, परतवाड़ा-धारणी मार्ग पर स्थित हरिसाल क्षेत्र में अब प्रकृति पर्यटन की कई सुविधाएं विकसित हो चुकी हैं. यहां की जंगल सफारी को पर्यटकों से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है. माताकोल, कावलाझिरी, गुल्लरजोड़, साधूबाबा, खारी और चिचापाटी जैसे वन क्षेत्र अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हैं. यहां बाघ, भालू, तेंदुआ, सांभर, चीतल, जंगली भैंसे, काले हिरण के साथ-साथ मोर, जंगली मुर्गा, हरियल, स्वर्गीय नर्तक, किंगफिशर और सर्पगरुड़ जैसे अनेक पक्षी भी देखने को मिलते हैं.
* हरिसाल को मिली नई पहचान
मेलघाट के प्राकृतिक सौंदर्य को देखने देश-विदेश से पर्यटक आते हैं. चिखलदरा, सेमाडोह और शहानूर स्थित नरनाला किला पहले से ही प्रसिद्ध हैं, लेकिन हरिसाल क्षेत्र सात-आठ वर्ष पहले तक पर्यटकों के लिए लगभग अनजान था. वन विभाग की पहल और स्थानीय गाइडों के प्रयासों से आज हरिसाल की पहचान बन रही है. अशोक आठवले बताते हैं कि 2013 में हरिसाल में गाइडों का पहला प्रशिक्षण हुआ, जिसने उन्हें दिशा दी और मेलघाट की जैव विविधता को समझने का अवसर मिला. सामाजिक माध्यमों के जरिए प्रकृति पर्यटन की जानकारी फैलाने से भी इस क्षेत्र को नई पहचान मिली है. जंगल गाइड अशोक आठवले का कहना है कि व्याघ्र पर्यटन से स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है, जिससे वे जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए स्वयं आगे आते हैं. फिलहाल रात की जंगल सफारी बंद है, लेकिन यदि इसे शुरू किया जाए तो पर्यटन को और बढ़ावा मिल सकता है.

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