‘अमरावती मंडल’ को ‘जिंदा शहीद’ मनिंदरजीतसिंह बिट्टा ने दिया जबरदस्त इंटरव्यू, कई मुद्दों पर बेबाक प्रतिपादन
कत्ल मेरे किरदार का हो भी जाता है, तो भी विचार मेरे जिंदा रहते

* अपनी पांच दशकों की राजनीतिक व सामाजिक यात्रा पर डाला प्रकाश
* आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष और खुद पर हुए आतंकी हमलों को लेकर दी विस्तृत जानकारी
अमरावती/दि.6 – आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक माने जाने वाले ‘जिंदा शहीद’ मनिंदरजीतसिंह बिट्टा ने अमरावती के दौरे पर पहुंचने के बाद दैनिक ‘अमरावती मंडल’ के कार्यालय को विशेष तौर पर सदिच्छा भेंट दी. इस समय दैनिक ‘अमरावती मंडल’ एवं ‘मंडल न्यूज’ के संपादक अनिल अग्रवाल के साथ ‘पॉडकास्ट’ में की गई खास बातचीत में ‘जिंदा शहीद’ एम. एस. बिट्टा ने अपनी जिंदगी को ‘बोनस का जीवन’ बताते हुए कहा कि कत्ल मेरे किरदार का हो भी जाता है, तो भी विचार मेरे जिंदा रहते. इन पंक्तियों के जरिए बिट्टा ने कहना चाहा कि, वे अपने पूरे सार्वजनिक जीवन के दौरान आतंकवादियों के निशाने पर रहे और यदि आतंकवादी उन्हें जान से मार देने के इरादे में सफल भी हो जाते, तो भी इससे आतंकवादियों का मकसद पूरा नहीं होनेवाला था. क्योंकि तब भी उनके (बिट्टा) द्वारा आतंकवाद के खिलाफ दिए गए विचार जीवित रहते और आतंकियों के खिलाफ समाज का संघर्ष जारी रहता.
अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक मनिंदरजीतसिंह बिट्टा ने ‘अमरावती मंडल’ को दिए विशेष इंटरव्यू में अपनी करीब पांच दशकों की राजनीतिक और सामाजिक यात्रा, आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष तथा खुद पर हुए आतंकी हमलों के अनुभवों को विस्तार से साझा किया. बिट्टा ने कहा कि उनके जीवन का मूल मंत्र हमेशा पार्टी, पद और प्राण से पहले राष्ट्र प्रथम रहा है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश की सुरक्षा, सामर्थ्य और सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता. उनके अनुसार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार या सुरक्षा एजेंसियों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है.
* देश के सामर्थ्य व सम्मान के साथ कोई समझौता मंजूर नहीं
इस विशेष साक्षात्कार में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए ‘जिंदा शहीद’ एम. एस. बिट्टा ने स्पष्ट तौर पर स्वीकार किया कि, किसी समय पंजाब में खलिस्तान की मांग को लेकर पाक प्रायोजित आतंकवाद का जबरदस्त बोलबाला था. साथ ही साथ कश्मीर को भारत के काटकर अलग करने के लिए घाटी में भी पाकिस्तान के इशारे पर राष्ट्र विरोधी ताकते जबरदस्त तरीके से सक्रिय थी. ऐसी ताकतों के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने के कारण उन्हें कई बार जानलेवा हमलों का सामना करना पड़ा, जिसमें से 14 बडे हमले तो रिकॉर्ड पर दर्ज है. वहीं छोटे-मोटे हमलों की संख्या व तादाद को सैकडों में कहा जा सकता है. लेकिन इन घटनाओं ने उनके हौसले को कमजोर करने के बजाय और मजबूत ही किया. इसके साथ ही ‘जिंदा शहीद’ बिट्टा ने यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष केवल एक राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है. जिससे निपटने हेतु उसी स्तर की गंभीरता की जरुरत होती है. साथ ही उन्होंने देश के सामर्थ्य व सम्मान के साथ कोई समझौता मंजूर नहीं रहने की बात भी कही.
* पूर्व कांग्रेसी नेता बिट्टा ने मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी को बताया ‘सुपर पीएम’
– सन 2014 के बाद देश में हालात के सुधरने व बदलने का किया दावा
खास बात यह रही कि, इस इंटरव्यू के दौरान पूर्व कांग्रेसी नेता बिट्टा ने देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि जहां एक ओर वर्ष 2014 से पहले देश में कहीं पर भी कभी भी आतंकी हमले और बम विस्फोट जैसी घटनाएं धडल्ले के साथ घटित हुआ करती थी, वहीं दूसरी ओर वर्ष 2014 के बाद देश की आंतरिक व बाह्य सुरक्षा व्यवस्था, वैश्विक छवि और राष्ट्रीय आत्मविश्वास में स्पष्ट परिवर्तन देखने को मिला है. इस बात से कोई भी इंकार नहीं कर सकता है. बिट्टा के मुताबिक वर्ष 2014 के बाद पहली बार सरकार ने आतंकवाद सहित नक्सलवाद को खत्म करने के लिए जबरदस्त तरीके से गंभीरता दिखाई. जिसके तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करनेवाले संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने के साथ ही नोटबंदी के जरिए आतंकवाद व नक्सलवाद की कमर तोडकर रख दी गई. साथ ही साथ पीएम मोदी के नेतृत्ववाली सरकार ने राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण का मुद्दा इतने बेहतर तरीके से सुलझाया कि, देश में कहीं पर भी कोई गडबडी नहीं हुई. इसके साथ ही बिट्टा ने पीएम नरेंद्र मोदी को ‘सुपर पीएम’ बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत ने विश्व मंच पर अपनी अलग पहचान स्थापित की है.
* युवाओं के नाम इतिहास रचने व दुनिया में देश का डंका बजाने का किया आवाहन
इस साक्षात्कार के दौरान युवाओं के लिए संदेश देते हुए एम. एस. बिट्टा ने कहा कि आज का भारत संभावनाओं से भरा हुआ है और देश के युवाओं में इतिहास रचने की क्षमता है. यदि युवा सही दिशा में अपने सामर्थ्य का उपयोग करें तो वे दुनिया में भारत का डंका बजा सकते हैं. ऐसे में हमारे युवाओं ने अपने समय के साथ ही अपनी योग्यताओं व क्षमताओं का सार्थक व सकारात्मक उपयोग करते हुए राष्ट्र निर्माण के कार्य में अपना भरपूर योगदान देना चाहिए, तभी हमारा देश बलशाली, गौरवशाली तथा समृद्ध व साधनसंपन्न होगा.
* इन दिनों अध्यात्म से जुडने व अहिंसा का संदेश देनेवाले जैन धर्म से प्रभावित रहने की बात भी कही
विशेष उल्लेखनीय है कि, आतंकवाद के खिलाफ हमेशा ही बेहद मुखर रहनेवाले और लंबे समय तक मुख्य धारा की राजनीति में सक्रिय रहे मनिंदरजीतसिंह बिट्टा का इन दिनों अध्यात्म की ओर झुकाव काफी अधिक बढ़ा है. इस बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए बिट्टा ने कहा कि, अध्यात्म के साथ उनका जुडाव काफी पहले से रहा और वे सिख धर्म व हिंदू धर्म में पूरी आस्था रखते है. साथ ही इन दिनों वे अहिंसा और करुणा का संदेश देने वाले जैन धर्म से काफी प्रभावित हैं, क्योंकि जैन धर्म द्वारा पूरे विश्व को ‘जियो और जीने दो’ जैसा मानवतापूर्ण संदेश दिया गया है. इसके साथ ही बिट्टा ने यह भी बताया कि, वे आज तक देशभर में हिंदू व सिख धर्म के सभी प्रमुख तीर्थस्थलों का दर्शन करने के साथ ही विगत कुछ वर्षों के दौरान जैन धर्म के भी कई तीर्थस्थलों का दौरा व दर्शन कर चुके है और इस दौरान मिले अनुभवों के आधार पर वे स्पष्ट रुप से कह सकते है कि, आध्यात्मिकता हर व्यक्ति को संयम, संतुलन और सकारात्मक दृष्टि प्रदान करती है.
* पार्टी, पद व प्राण से पहले राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत को लेकर बिट्टा ने दिखाई अडिगता
इस विशेष साक्षात्कार के अंत में ‘जिंदा शहीद’ मनिंदरजीतसिंह बिट्टा ने स्पष्ट रुप से उनका संघर्ष किसी व्यक्ति, दल या विचारधारा के खिलाफ नहीं, बल्कि आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी शक्तियों के खिलाफ है. देशहित सर्वोपरि है और इसी विचार को लेकर वे जीवन भर सक्रिय रहेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि, उनका राजनीति से पहले भी सीधे तौर पर कोई वास्ता नहीं था और आज भी नहीं है. बिट्टा के मुताबिक वे हमेशा ही सेवा कार्यो को महत्व देते आए है. जिसके चलते उन्होंने अपने दादाजी के जरिए कांग्रेस का सेवा दल जॉइन किया था तथा आगे चलकर युवाओं को आतंकवाद के खिलाफ संगठित करने के लिए वे युथ कांग्रेस में सक्रिय हुए थे. जिसके बाद उन्हें तीन बार पंजाब का मुख्यमंत्री बनने का बाकायदा ऑफर मिला था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था. इसी तरह उन्हें कई बार केंद्रीय मंत्री, सांसद व विधायक बनने के भी अवसर मिल रहे थे. परंतु उन्होंने हर बार ऐसे अवसरों को विनम्रतापूर्वक ठुकराया. बिट्टा के मुताबिक उन्हें किसी पद या मुकाम पर पहुंचने की कोई लालसा नहीं है, बल्कि वे अपने देश की मजबूती और आतंकवाद के खात्मे के लिए आज भी पहले की तरह कृतसंकल्प है.





