महाराष्ट्र

‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ का शिकंजा

नाबालिग बालकों का भी समावेश

* सायबर पुलिस ने खोजे युजर्स
* नाशिक के 24 लोगों पर सायबर अपराध
* सभी आरोपी 16 से 30 वर्ष आयु के
नाशिक/ दि.11– नाशिक शहर में बीते चार वर्षों में ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ उपयोग किया गया है. जिसमें नाबालिग बालको का समावेश होने की चौकाने वाली बात उजागर हुई है. राज्यभर में यह मामला घटा है. संदेहास्पदों की सूची राज्य सायबर पुलिस ने तैयार की है. जिसमें से 25 लोग नाशिक के है. व सभी 16 से 30 वर्ष आयु के बताये गए है. उनके खिलाफ सायबर अपराध दर्ज किया गया है. ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ सर्फिग समेत अपलोडिंग का बडा जाल होने का संदेह पुलिस को है.
इंटरनेट व्दारा बालकों की अश्लिल फोटो, वीडियो अपलोट कर अन्य लोगों को शेयर कर शहर के 25 युजर्स को अच्छा खासा महंगा पडा. उन्होंने वॉट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक पर यह हरकत करने की बात उजागर हुई है. ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ कानूनन अपराध है. शहर में 2018 से 2021 इन चार वर्षों में सोशल मीडिया पर शेयर किये गये यह करतुत करने वालों पर कडी नजर रख रही सायबर पुलिस ने संदेहास्पद लोगों की खोज कर रही है. जिसके अनुसार इन चार वर्षों में ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ के बारे में शेयरिंग, अपलोडिंग किये मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस पुलिस ने खोज लिया है. उसकी सूची तेैयार की गई है. उनकी खोज करने के लिए सायबर पुलिस की टीम रवाना की गई है. उन आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा, जिससे उनकी करतुते उजागर होगी.
* ऐसे खोज युजर्स
चाईल्ड पोर्नोग्राफी के बारे में कोई भी कंटेन्ट खोजा, अपलोड या प्रसारित किया इस बारे में वॉट्स एप, फेसबुक, इंस्टाग्राम कंपनी के पास जानकारी जाती है. जिसके अनुसार संबंधित युजर्स लगातार यह कृत्य करता रहा तो नेशनल क्राईम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) को सूचित किया जाता है. उसके व्दारा तस्सली करने के बाद सूची तैयार कर राज्य सायबर विभाग की दी जाती है. वहां सायबर पेट्रोलिंग व्दारा संदेहास्पद व्यक्ति की तहकीकात की जाती है. संबंधित युजर्स के अकाउंट को ब्लॉक करने की प्रक्रिया की जाती है. ऐसे राज्य में सैकडों से अधिक युजर्स होते है, यह जानकारी स्थानीय सायबर पुलिस तक पहुंच जाती है. ऐसे 25 लोगों की खोज होने की बात पुलिस ने बताई.
* यह बात कैसे तय होती है.
चाईल्ड पोर्नोग्राफी की जानकारी संकलित करने के लिए इंटरनेट सर्विस देने वाली कंपनी के साथ कुछ सॉफ्टवेयर की सहायता ली जाती है. स्थिति और बच्चे के चेहरे के हावभाव के आधार पर वीडियो जांच के लिए फावर्ड किया जाता है.

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