अमरावतीमहाराष्ट्र

चुनाव के समय ड्रायवर भी रहे 18-18 घंटे ‘बिझी’

इलेक्शन टाईम टेबल में भोजन और विश्राम के लिए ही नहीं था टाईम

अमरावती/दि. 30– लोकसभा चुनाव के दौरान जहां एक ओर चुनाव लडनेवाले प्रत्याशी एवं कार्यकर्ता अपने पैरो में चकरी लगाकर पूरे संसदीय क्षेत्र का दौरा कर रहे थे. वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन भी चुनाव की तैयारी को लेकर पूरी मुश्तैदी के साथ काम पर लगा हुआ था. ऐसे में प्रत्याशियों के यहां नीजि वाहनों पर काम करनेवाले ड्रायवरो के साथ-साथ प्रशासन के पास रहनेवाले सरकारी वाहनो पर तैनात सरकारी वाहन चालको के पास जबरदस्त व्यस्तता थी और सभी चालक भी लगातार 18-18 घंटे बिझी रहते हुए काम कर रहे थे. खास बात यह थी कि, इलेक्शन को लेकर बनाए गए टाईम टेबल में ड्रायवरो के भोजन व विश्राम का कोई टाईम ही नहीं था. इसके चलते सभी वाहन चालको के भोजन व विश्राम का शेड्यूल पूरी तरह से बदल गया और सभी वाहन चालको को रोजाना सुबह घर से जल्दी निकलना होता था. जो देर रात वापिस लौटा करते थे.

बता दे कि, अमरावती संसदीय क्षेत्र के लिए विगत 26 अप्रैल को चुनाव कराए गए. जिसके मद्देनजर जारी माह में गुढीपाडवा से लेकर मतदान वाले दिन तक यानि करीब तीन सप्ताह तक चुनावी अखाडे में उतरे 37 प्रत्याशियों ने शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रो में अपने-अपने चुनाव प्रचार की जमकर शुरुआत की थी. साथ ही इस दौरान प्रमुख राजनीतिक दलो के राष्ट्रीय, राज्यस्तरीय व स्टार प्रचारको की प्रचार सभाएं भी इसी दौरान हुई. जिसके चलते निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्येक गांव और हर एक मतदाता तक पहुंचने के लिए सभी प्रत्याशी रोजाना सुबह काफी जल्दी अपने घरो से बाहर निकल जाया करते थे और पूरा दिन प्रचार करने के बाद उनके घर वापिस लौटने का कोई निश्चित समय नहीं रहा करता था. इसके चलते प्रत्याशियों सहित राजनेताओं के वाहनों को चलाने का काम करनेवाले चालको को भी 18-18 घंटे स्टेअरिंग संभालना पडता था. हालांकि प्रत्येक बडे नेता व प्रत्याशी के पास एक से अधिक वाहन चालक होते है और वाहन चालको द्वारा आपस में तालमेल बिठाकर अलग-अलग शिफ्ट में काम किया जाता है. परंतु चुनाव की वजह से उनके इस नियोजन में भी काफी बदलाव हो गया.

लगभग यही उसी दिन सरकारी वाहन चालको की भी रही. आचारसंहिता के लागू होते ही जिला निर्वाचन विभाग ने विभिन्न सरकारी कार्यालयों व विभागो के सरकारी वाहनो को चालको के साथ चुनाव संबंधी कामकाज के लिए अधिग्रहीत कर लिया था. इन सरकारी वाहन चालको के जिम्मे निर्वाचन विभाग के स्थानीय अधिकारियों के साथ-साथ निर्वाचन आयोग द्वारा बाहर से भेजे जानेवाले अधिकारियों को पूरे संसदीय क्षेत्र में एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाने-ले जाने का काम था. साथ ही चुनाव प्रशिक्षण एवं निर्वाचन प्रक्रिया से संबंधित साहित्य को भी एक ही स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी सरकारी निर्देशानुसार इन सरकारी वाहन चालकों पर थी. ऐसे में सरकारी वाहन चालकों की भी चुनाव काल के दौरान कोई निर्धारित ड्युटी नहीं थी और उन्हें वक्त-बेवक्त सरकारी वाहनों का स्टेअरिंग संभालने हेतु जाना पडता था. जिसके चलते सरकारी वाहन चालको का भी शेड्यूल पूरी तरह से बिगडा हुआ था.

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