महाराष्ट्र

ईडी ने महाराष्ट्र राज्य को-ऑप. बैंक घोटाला मामले में की कार्रवाई

पूर्व मंत्री खोतकर की 200 एकड़ जमीन जब्त

* एमएससीबी के संचालकों और निदेशकों ने अपने करीबियों को कम कीमत पर कारखाने बेचने का आरोप
मुंबई/दि.25-महाराष्ट्र राज्य को-ऑपरेटिव बैंक (एमएससीबी) घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व मंत्री और शिवसेना नेता अर्जुन खोतकर की 200 एकड जमीन व अन्य संपत्तियां जब्त कर लीं हैं. जालना सहकारी साखर कारखाना (एसएसके) लिमिटेड से जुडी इन संपत्तियों की कीमत 78 करोड रुपए से ज्यादा है. जालना जिले की हडप तहसील के सवरगांव में स्थित इन संपत्तियों में जमीन के साथ इमारत और मशीन भी शामिल है.
मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर अगस्त 2019 में को-ऑपरेटिव बैंक घोटाला मामले की छानबीन शुरु की थी. आरोप है कि एमएससीबी के संचालकों ओर निदेशकों ने नियमों को ताक पर रखकर अपने करिबियों को बेहद कम कीमत पर कारखाने बेच दिये गये थे. ईडी ने मामले में पीएमएलए कानून के तहत मामला दर्ज कर छानबीन शुरु की तो पाया कि, 1984-85 मेें स्थापित जालना सहकारी साखर कारखाना लिमिटेड 235 एकड में बना था जिसमें से 100 एकड जमीन महाराष्ट्र सरकार की ओर से मुफ्त में दी गई थी.
* मिलीभगत कर लगाई गई थी बोली, बॉयलर जैसी कई महंगी मशीनों को भंगार बताकर बेच डाला
जालना एसएसके ने एमएससीबी से कर्ज लिया था जो वह वापस नहीं कर पाई. मार्च 2022 तक कर्ज की रकम बढकर 33.49 करोड रुपए हो गई तो सितंबर 2008 में बैंक ने वसूली के लिए कारखाने पर कब्जा कर लिया. फरवरी 2012 में इसकी नीलामी की गई और रिजर्व प्राइज (न्यूनतम कीमत) 42.18 करोड रुपए रखी गई थी. इसके लिए दो पार्टिंयों तापडिया कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड, औरंगाबाद और अजीत सीड्स प्राइवेट लिमिटेड औरंगाबाद ने बोली लगाई थी. तापडिया की बोली 42.31 करोड की थी जबकि दूसरी कंपनी ने न्यूनतम कीमत से कम बोली लगाई थी, इसलिए तापडिया को कंपनी मिल गई. ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि, दोनों कंपनियों के ऑफिस जालना में स्थित एक ही इमारत से चल रहे थे और असल में आपस में मिलीभगत कर बोली लगाई गई थी. तापडिया कंस्ट्रक्शन ने यहां कोई काम नहीं किया और 15 महिने बाद मई 2012 में एसएसके समेत 235 एकड जमीन अर्जुन खोतकर की कंपनी अर्जुन सुगर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को बेच दी गई. छानबीन में खुलासा हुआ कि, खोतकर साल 1998 से 2004 तक महाराष्ट्र राज्य को-ऑपरेटीव बैंक के निदेशकों में शामिल थे. साथ ही वे 1998 से 2003 तक जालना एसएसके के भी निदेशक थे. वे साल 2007 से अब तक जालना एपीएमसी के भी निर्वाचित अध्यक्ष हैं. वे जालना डीसीसीबी के भी निदेशक हें. जांच में खुलासा हुआ है कि, तापडिया कंस्ट्रक्शन ने जालना एसएसके के एवज में एमएससीबी में 10 करोड 56 लाख रुपए डिपॉजिट किया था. इसके बाद फर्जी कंपनियों के नाम पर नकद भुगतान दिखाया गया. यहीं नहीं तापडिया कंस्ट्रक्शन को दिसंबर 2012 में अर्जुन शुगर इंडस्ट्रीज से 31.73 करोड रुपए मिले थे. इससे साफ होता है कि, तापडिया कंस्ट्रक्शन खोतकर की ही छद्म कंपनी थी. ईडी ने अपने जांच में पाया कि, जिस संपत्ति को खोतकर की कंपनी ने 42.31 करोड रुपए में खरीदी थी उस समय उसकी वास्तविक कीमत 78 करोड रुपए से ज्यादा थी. इसमें से अचल संपत्तियों की कीमत 48.38 करोड जबकि चल संपत्तियों की कीमत 30 करोड रुपए थी. आगे की जांच में खुलासा हुआ कि, खोतकर की कंपनी ने बॉयलर जैसी कई महंगी मशीनों को भंगार बताकर बेच डाला.

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