
* वनरक्षक के परिजनों को मिली राहत
नागपुर /दि.20- 45 वर्ष की आयु पार कर चुके वारिसदार के स्थान पर किसी दूसरे वारिसदार का नाम अनुकंपा नौकरी की सूची में शामिल किया जा सकता है. इस आशय का फैसला मुंबई उच्च न्यायालय ने नागपुर खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई करते हुए सुनाया. न्या. नितिन सांभरे व न्या. वृशाली जोशी की दो सदस्यीय खंडपीठ द्वारा सुनाये गये इस फैसले के चलते एक वनरक्षक के परिवार को काफी राहत मिली है.
जानकारी के मुताबिक गडचिरोली के वडसा में कार्यरत वनरक्षक अकबर खान मोहम्मद खान पठान की 12 फरवरी 2016 को एक हादसे में मौत हुई थी. जिसके चलते अकबर खान के बेटे मो. जुबेर खान का समावेश अनुकंपा तत्व पर नौकरी की सुची में शामिल किया गया था. लेकिन जुबेर खान को लंबे समय तक सरकारी नौकरी नहीं दी गई. इसी दौरान जुबेर खान की आयु 45 वर्ष से अधिक हो गई. ऐसे में उन्होंने अपनी बहन को नौकरी मिलने हेतु 16 अक्तूबर 2023 को आवेदन किया. जिसे 20 मई 2015 के शासन निर्णयानुसार अमान्य कर दिया गया. जिसके चलते मो. जुबेर ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में याचिका दाखिल की थी. जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि, अनुकंपा तत्व पर नौकरी हेतु वारिसदार के नाम को बदला जा सकता है और यदि एक वारिसदार द्वारा अधिकतम आयु की मर्यादा को पार कर लिया गया है, तो उसके स्थान पर किसी अन्य वारिसदार को अनुकंपा तत्व पर नौकरी दी जा सकती है. साथ ही अदालत ने मो. जुबेर की मांग पर कानून के तहत निर्णय लेने का निर्देश वनविभाग को दिया. जिसके चलते दिवंगत वनरक्षक अकबर खान के परिवार को काफी राहत मिली है. इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से एड. सोनिया गजभिये ने प्रभावी युक्तिवाद किया.