महाराष्ट्र

नागपुर में तीन मरीजों को जीवनदान देने रातभर जागता रहा मेडिकल

खेतीहर मजदूर पिता ने करवाया बेटी का अवयवदान

नागपुर /दि.4– 23 वर्षीय बिटिया के ‘ब्रेन डेड’ होने का पता चलते ही मां- बाबूजी बडे आहत हो गए. लेकिन डॉक्टरों के समुदेशन के बाद खेत मजदूर पिता ने अंग दान के लिए पहल की. मंगलवार रात 9 बजे से बुधवार को तडके 4 बजे तक मेडिकल से संलग्न सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल तीन लोगों को जीवन दान देने रात भर जागता रहा. इस अवसर पर अधिष्ठाता से लेकर चिकित्सा अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ डॉक्टर भी उपस्थित थे.
मध्यप्रदेश की 23 वर्षीय लडकी की तबियत अचानक खराब होती चली गई. उसको मेडिकल में भरती कराया गया. लगातार 9 दिनों तक उसका इलाज जारी था. उसके मस्तिष्क में रक्तस्त्राव हो गया था. उपचार में प्रतिसाद नहीं मिलता देख चिकित्सा अधीक्षक डॉ अविनाश गावंडे, डॉ. अर्चना अहेर, डॉ. सचिन कांबले, डॉ. संजय रामटेके और डॉ. राज कोंडावार उसकी जांच के बाद ‘ब्रेन डेड’ मस्तिष्क मृत घोषित किया. इसकी जानकारी परिजनों को दी गई. इस समय पर 46 वर्षीय पिता, 40 वर्षीय मां और 20 वर्षीय भाई उपस्थित थे. ‘सुपर’ के डॉ. सुनील वाशिमकर, डॉ. सुमित चाहाकर और भाग्यश्री निंघोट ने उनको अंगदान की जानकारी दी.
खेत मजदूर पिता ने थोडा समय मांगा. बीटिया के अंगों को खाक करने से बेहतर अन्य लोगां को जीवन दान देने की बात पर उन्होंने अपनी सहमति दी. उन्होंने अपनी बीटिया के अंग दान का निर्णय लिया. इसकी जानकारी जेडटीसीसी को दी गई. जेडटीसीसी के अध्यक्ष डॉ. संजय कोलते और सचिव डॉ. राहुल सक्सेना ने प्रतीक्षा सूची की पडताल के बाद अंगों का वितरण का निर्णय लिया. लेकिन रात के 9 बज गये थे. मेडिकल के अधिष्ठाता डॉ. राज गजभिये के मार्गदर्शन में डॉक्टरों की टीम ने अंग निकालने की शुरूआत की. सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल में भर्ती 33 वर्षीय युवती को किडनी प्रत्यारोपण के लिए डॉक्टरों की दूसरी टीम ने तैयारी की. बुधवार को तडके 4 बजे तक उसका ऑपरेशन जारी था. उसी रात ही दूसरी किडनी 55 वर्षीय पुरूष को और लीवर 65 वर्षीय पुरूष को दान किया गया.

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