
यवतमाल/ दि. 2– मुकुटबन जंगल में मादा बाघ की तबियत में गिरावट आने से वन विभाग और रेस्क्यु पथक सक्रिय हुआ. बाघ के पैर में गंभीर चोट आयी. वह जमीन पर अचेत पडी थी. डॉक्टर्स के अनुसार मादा बाघ को पैरालिसीस का अटैक हुआ. इसलिए उसकी जान खतरे में पड गई. अंधारी बाघ प्रकल्प के बचाव दल ने तुरंत मौके पर पहुंचकर उसका उपचार किया. फिर उसे अचेत कर नागपुर के गोरेवाडा जू में भेजा गया है.
स्वास्थ्य में गिरावट आना पशुओं के लिए भी चिंताजनक हैं. मादा बाघ को लकवा होने की घटना प्राकृतिक है या मानवीय हस्तक्षेप के कारण ऐसा हुआ है, यह खोज का विषय है. जानकारों ने वन विभाग से इस बारे में लगन जांच कर संरक्षण के उपाय करने की मांग की है. इस बीच वनाधिकारियों ने बताया कि डॉ. रविकांत खोब्रागडे ने उपरोक्त बाघ पर उपचार किया. वनाधिकारी अजय मराठे ने अचूक निशाना लगाते हुए बाघ को कंधे पर डार्ट मारा.