
* देश के धर्मनिरपेक्ष रहने की बात पर दिया जोर
नागपुर/दि.25– मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ की न्या. विभा कंकणवाडी व न्या. वृषाली जोशी ने एक मामले पर फैसला सुनाते हुए खेद जताया कि, धर्मनिरपेक्ष रहनेवाले भारत देश में इन दिनों लोगबाग अपने धर्म को लेकर काफी हद तक संवेदनशील हो गए. इसे भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश के लिए सही नहीं कहा जा सकता.
बता दे कि, प्रमोद शेंदरे व डॉ. सुभाषा वाघे नामक दो लोगों ने ‘नरखेड घडामोडी’ नामक वॉटस्ऍप ग्रुप पर धार्मिक भावनाओं को आहत करनेवाला कृत्य किया, इस आशय की शिकायत शाहबाज सिद्दिकी नामक व्यक्ति द्वारा नरखेड पुलिस में दर्ज कराई गई थी. जिसके आधार पर नरखेड पुलिस ने 3 अगस्त 2017 को भादंवि की धारा 295 (ए), 504 व 506 के अंतर्गत एफआयआर दर्ज की थी और मामले की जांच पूर्ण कर 4 सितंबर 2018 को प्रथम श्रेणी न्यायदंडाधिकारी की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था. ऐसे में इस एफआयआर व आरोपपत्र को रद्द करने हेतु शेंदरे व वाघे ने उच्च न्यायालय में अपिल दायर की थी. जिस पर हुई सुनवाई के दौरान अदालत को शेंदरे व वाघे के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले. ऐसे में अदालत ने उक्त विवादास्पद एफआयआर व आरोपपत्र को रद्द करते हुए कहा कि, इन दिनों लोगों में अपने धर्म को लेकर काफी अधिक संवेदनशीलता दिखाई देने लगी है. प्रत्येक व्यक्ति यह जताना चाहता है कि, उसका ही धर्म और आराध्य कैसे सर्वश्रेष्ठ है. परंतु ऐसा करते समय लोग यह भूल जाते है कि, वे एक लोकतांत्रिक व धर्मनिरपेक्ष देश में रहते है और धर्मनिरपेक्ष देश में प्रत्येक व्यक्ति ने दूसरे के धर्म, जाति व पंथ का भी आदर करना चाहिए. साथ ही यदि कोई व्यक्ति अपने ही धर्म के सर्वश्रेष्ठ रहने का दावा करता है तो दूसरे व्यक्ति ने उस पर कोई भी तीव्र प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए.