अमरावतीमहाराष्ट्र

नवजात के पेट पर सलाख से दिए चटके

मेलघाट के सिमोरी गांव की घटना

* डफरीन अस्पताल में चल रहा उपचार
धारणी/ दि. 26– मेलघाट के दुर्गम क्षेत्रों में दिनों दिन ढोंगी बाबाओं के कारनामे सामने आ रहे है. इन बाबाओं की सलाह पर अघोरी उपचार किए जा रहे है. आदिवासी माताएं अंध विश्वास का शिकार हो रही है. इस प्रकार का एक मामला चिखलदरा तहसील के सिमोरी गांव में सामने आया. जिसमें अघोरी उपचार के चलते एक नवजात बच्चे के पेट पर 22 दिन तक गर्म लोहे की सलाख से चटके दिए गये. इस घटना से मेलघाट की स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर एक बार सवालिया निशान लग गया.
सिमोरी गांव चिखलदरा तहसील से 90 किलोमीटर की दूरी पर है. दो दिन पहले इस गांव में एक घटना घटी थी. यहां के एक नवजात बच्चे के पेट पर 65 चटके के निशान मिले है. हतरू क्षेत्र के सिमोरी गांव में हुई इस घटना ने फिर से बहस छेड दी है और मेलघाट की स्वास्थ्य प्रणाली तथा जागरूकता बढाने का दावा करनेवाले स्वास्थ्य विभाग पर सवाल खडे कर दिए है. उस नवजात शिशु को पहले अचलपुर उप जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है. उसके पश्चात उसे अमरावती जिला महिला अस्पताल (डफरीन )उपचार के लिए ले जाया गया. फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है. इस संदर्भ में जब स्वास्थ्य विभाग से जानकारी मांगी गई है तो उन्होंने उपचार शुरू होने की जानकारी दी.

* एक बार फिर नई योजना बनाने की आवश्यकता
मेलघाट में स्वास्थ्य प्रणाली 1993 से कार्यरत है. जब कुपोषण पहली बार यहां उभरा था. लेकिन सरकार को अब एक बार फिर नई योजना मनाने की जरूरत है. क्योंकि स्वास्थ्य प्रणाली को कार्यरत हुए 32 वर्ष होने के बाद भी नवजात बच्चों के पेट पर अप्राकृतिक तरीके से चटके देकर उपचार किए जाने की अघोरी परंपरा शुरू है. बिजली, पानी, सडक और मोबाइल कवरेज के लिए तरसने वाला सिमोरी गांव इस घटना के बाद से एक बच्चे के पेट पर उपचार के नाम पर चटके देकर अमानवीय व्यवहार के लिए पहचाना जायेगा.

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