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केंद्र से किया आंदोलन को गंभीरता से लेने का आवाहन
मुंबई/दि.7 – जिस समय पंजाब व हरियाणा राज्य के किसान सडक पर उतरे, उसी समय इस आंदोलन को बेहद गंभीरतापूर्वक लिया जाना था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ऐसे में मुझे लगता है कि, अब यह आंदोलन दिल्ली तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के कोने-कोने से लोग किसानों के पीछे खडे रहेंगे और समस्याओं को अपनी पध्दति से हल करेंगे. इस आशय का प्रतिपादन राष्ट्रवादी कांग्रेस के अध्यक्ष शरद पवार द्वारा किया गया. साथ ही उन्होंने अपेक्षा जतायी कि, केंद्र सरकार इस मामले में सामंजस्य पूर्ण भूमिका अपनाये.
यहां पर मीडिया के साथ बातचीत करते हुए राकांपा सुप्रीमो शरद पवार ने किसान आंदोलन के मसले पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि, यदि हम समूचे देश में खेती-किसानी व अन्न आपूर्ति की स्थिति को देखे, तो इसमें पंजाब व हरियाणा के किसानों का विशेष योगदान है. खास तौर से गेहू व चावल के उत्पादन में इन राज्यों के किसानों ने देश की जरूरत को पूरी करने का काम किया है. इसके अलावा दूनिया के 17-18 देशों को भारत की ओर से जो अनाज भेजा जाता है, उसमें भी पंजाब एवं हरियाणा की हिस्सेदारी काफी अधिक है. जिस समय कृषि विधेयक मंजूर किये जा रहे थे, तब भी हमने सरकार से कहा था कि, इस मामले में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए और इन विधेयकों को लोकसभा की समिती के पास भेजकर वहां इस पर चर्चा करायी जानी चाहिए. लेकिन सरकार ने हमारी बिल्कूल भी नहीं सुनी और काफी जल्द बाजी में विधेयकोें को पारित करवाया गया. जिसका परिणाम आज हम सभी के सामने है.
राष्ट्रपति से मिलेंगे पवार
आंदोलनकारी किसानों की मांगों के संदर्भ में शरद पवार सहित विपक्षी दलों के नेता आगामी 9 दिसंबर को शाम 5 बजे राष्ट्रपति रामनाथ कोविद से मुलाकात करेेंगे. साथ ही इस समस्या के समाधान पर चर्चा की जायेगी.