महात्मा फुले सफल उद्योजक भी थे

उस दौर में सिखाया था पूंजी बाजार का काम

* सीएम देवेंद्र फडणवीस के गौरवोद्गार
पुणे /दि.11- महात्मा ज्योतिराव फुले केवल क्रांतिकारी समाजसुधारक ही नहीं थे, बल्कि वे प्रगतिशील किसान, कुशल नगररचनाकार और सफल उद्योजक भी थे. सामान्य व्यक्ति को आर्थिक साक्षरता मिले, इसके लिए उन्होंने उस समय शेयर बाजार कैसे काम करता है, यह गीतों और कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत किया था, ऐसे शब्दों में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महात्मा फुले के बहुआयामी कार्यों की सराहना की.
पुणे जिला परिषद की ओर से खानापुर में आयोजित महात्मा ज्योतिबा फुले द्विशताब्दी जन्मोत्सव समारोह के शुभारंभ के अवसर पर वे बोल रहे थे. इस दौरान मुख्यमंत्री ने जिला परिषद की अत्याधुनिक ‘ज्योती-सावित्री’ सीबीएसई स्कूल का लोकार्पण किया और कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं. इस स्कूल के विद्यार्थियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां की छोटी बच्चियों के प्रगल्भ विचारों में वास्तव में सावित्रीबाई फुले की विरासत दिखाई देती है. विशेष रूप से नासा और इसरो में पहुंची लड़कियों और फ्रेंच-जर्मन भाषा सीखने वाली छात्राओं की उन्होंने सराहना की.
* महात्मा फुले के ‘एंटरप्रेन्योर स्पिरिट’ का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने महात्मा फुले की उद्यमशीलता का एक दुर्लभ उदाहरण दिया. मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि मुंबई महानगरपालिका की इमारत का निर्माण करने वालों में महात्मा फुले एक प्रमुख ठेकेदार थे. ब्रिटिशों ने उस काम के लिए जितना खर्च मंजूर किया था, उससे 15 प्रतिशत कम खर्च में फुले ने वह काम पूरा कर दिखाया. आज भी मुंबई पालिका में उनकी ईमानदारी का बोर्ड देखने को मिलता है. केवल पालिका ही नहीं, बल्कि कात्रज का बोगदा, येरवडा कारागृह और रेलवे वर्कशॉप के निर्माण में भी उनके ‘एंटरप्रेन्योर स्पिरिट’ का दर्शन होता है.
* यही सच्ची श्रद्धांजलि
देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महात्मा फुले के नाम पर राज्य में 1,000 नए कौशल प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे. पुणे जिला परिषद ने ‘इंडस्ट्री 4.0’ के आधार पर 100 स्कूलों में अत्याधुनिक लैब्स शुरू करने के लिए उन्होंने प्रशंसा की. महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण देना ही महात्मा फुले के विचारों को सच्ची श्रद्धांजलि है, ऐसा उन्होंने कहा.
* छत्रपति शिवाजी महाराज की समाधि खोजी
देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अंग्रेजों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के किलों को नष्ट करने का प्रयास किया था और उनकी स्मृतियों को मिटाने की कोशिशें चल रही थीं. ऐसे कठिन समय में महात्मा ज्योतिबा फुले ने ही रायगढ़ पर छत्रपति शिवाजी महाराज की समाधि खोज निकाली. महाराज का तेज जनमानस में फिर से जागृत करने के लिए महात्मा फुले ने पहल की. उन्होंने और बाद में लोकमान्य तिलक ने वास्तव में शिवजयंती उत्सव शुरू करके महाराज के पराक्रम और विचारों को समाज में फिर से स्थापित किया, ऐसा फडणवीस ने कहा.

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