बिजली दर मामले में महावितरण घिरा!
सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका

नागपुर/दि.21 – बिजली दर विवाद में अदालत के आदेश का पालन न करने के आरोप लगाते हुए मेसर्स गोयंका फार्म के मालिक आर. बी. गोयनका ने महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (महावितरण) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में अवमानना याचिका दायर की है. याचिका में 17 नवंबर 2025 को दिए गए आदेश के जानबूझकर उल्लंघन का आरोप लगाया गया है.
* दर निर्धारण से शुरू हुआ विवाद
महावितरण ने वर्ष 2024 में बहुवर्षीय बिजली दर तय करने का प्रस्ताव महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (एमईआरसी) के समक्ष रखा था. जनसुनवाई के बाद आयोग ने 28 मार्च 2025 को सभी उपभोक्ता वर्गों के लिए औसतन करीब 10 प्रतिशत दर कटौती घोषित की. इसके बाद महावितरण ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की. 25 जून 2025 को आयोग ने निर्णय देते समय उपभोक्ता हस्तक्षेपकर्ता आर. बी. गोयनका को सुने बिना आदेश पारित किया, ऐसा आरोप लगाया गया है. इस फैसले के बाद बिजली दर बढ़ा दी गई, जिसे विभिन्न पक्षों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी.
* हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश
3 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने आयोग का आदेश रद्द कर दिया और मामले को पुनः सुनवाई के लिए आयोग को भेज दिया. साथ ही निर्देश दिया कि नए निर्णय तक 28 मार्च 2025 के मूल आदेश के अनुसार ही बिल जारी किए जाएं. इसके बाद महावितरण ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की. 17 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखते हुए आयोग को 12 सप्ताह में नया निर्णय देने के निर्देश दिए. गोयनका का दावा है कि 3 दिसंबर 2025 के बाद बिल उसी पुराने आदेश के अनुसार जारी होने चाहिए थे.
* ‘गलत दर से भेजे गए बिल’
याचिका के अनुसार दिसंबर 2025 के बिल रद्द किए गए 25 जून 2025 के आदेश के आधार पर ही जारी किए गए, जो अदालत के निर्देशों का उल्लंघन है. गोयनका ने 24 जनवरी 2026 को महावितरण को कानूनी नोटिस भेजकर दिसंबर का बिल वापस लेने की मांग की, पर 29 जनवरी को नोटिस मिलने के बावजूद जवाब नहीं दिया गया.
* आगे क्या मांग
याचिका में संबंधित अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है. साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि नए निर्णय में दर कम होती है तो अतिरिक्त वसूली वापस की जाएगी या नहीं और क्या नया फैसला पिछली तारीख से लागू होगा.





