कई आदिवासी आश्रमशालाओं में वजनकाटा नहीं!

छात्रों को पेटभर भोजन कैसे मिलेगा?

* मुख्याध्यापक और आपूर्तिदार की मिलीभगत का आरोप
अमरावती/दि.4 – आदिवासी विकास विभाग की आश्रम शाला के आदिवासी छात्रों को सरकार के मानक के अनुसार अंडा, केला, दूध, नाश्ता और भोजन देना अनिवार्य होता है. इसके लिए सभी सामग्री छात्रों की तुलना में तौलने हेतु बाहर निकाल कर उससे भोजन पकाया जाए, ऐसा मानक है. इसके लिए आश्रमशाला में वजनकाटा उपलब्ध होना आवश्यक है. हालांकि, कई शालाओं में वजनकाटा ही नही है. इसलिए छात्रों को भोजन दिया जाता है या नहीं? यह संशोधन का विष्ज्ञय है. उसमें ही कई बच्चे भूखे रहने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता. ट्रायबल अमरावती विभाग में 124 अनुदानित, 45 नामांकित, 85 शासकीय आश्रमशाला, तथा 104 छात्रावास है. धारणी, अकोला, किनवट, छत्रपति संभाजीनगर, पुसद, पांढरकवडा, कलमनुरी यह सात एकात्मिक प्रकल्प अधिकारी कार्यालय अधिनस्थ है. हालांकि, प्रत्येक आश्रमशाला में भोजन की सामग्री नापने के लिए वजनकाटा होना अनिवार्य है. इसके पहले सरकार की तज्ञ समिति ने इसके अनिवार्य किया था, परंतु वर्तमान में किसी भी आश्रमशाला में वजनकाटा नहीं. आपूर्तिदार जो मेन्यू देगा, उसे स्वीकारने की प्रथा बन गई है. क्योंकि मुख्याध्यापक और आपूर्तिदार की मिलीभगत होने की बात सभी को पता है. आश्रमशाला में मुख्याध्यापक सर्वेसर्वा होने से आदिवासी छात्रों को दिए जाने वाले किसी भी प्रकार के भोजन को अन्य शिक्षकों द्वारा मूकसहमति दी जाती है, क्योंकि, पंगा कौन लेगा? यह समस्या निर्माण होती है.
* मुख्याध्यापक बिनधास्त
आदिवासी आश्रमशालाओं में क्या चल रहा है? इस बारे में हकिकत जानने के लिए पहले वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट की जाती थी, परंतु वर्तमान में मुख्याध्यापकों ने कौनसी जादू की, यह समझ से परे है. पीओ, एटीसी सहित शाला निरीक्षकों द्वारा आश्रमशालाओं को भेंट देना बंद हो गया है. जिसके कारण मुख्याध्यापक बिनधास्त है, ऐसा दिखाई देता है.
* कैसे मिलेगा पेटभर भोजन?
आदिवासी आश्रमशालाओं में छात्रों की शिक्षा, पोषण, संगोपन के लिए सरकार करोडों रुपए खर्च करती है. हालांकि, भोजन और अन्य सामग्री आपूर्तिदार गब्बर बन गए है. भोजन में क्या होना चाहिए इस बारे में टाइम टेबल तय है. दूध, अंडा, केला तो कुछ आश्रमशाला से गायब हुए है. वजनकाटा नहीं रहने से भोजन के लिए मसाला, तेल, नमक, चावल, आटा आदि सामग्री कैसे तौलें? यह समस्या निर्माण हो गई है.

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