अब सप्ताह में केवल 2 दिन होगी बैठकें

सीईओ का ‘डिसिप्लन फॉमूला’ पढाई बचाने के लिए उठाया सख्त कदम

अमरावती/ दि. 15 – जिला परिषद की स्कूलों में पढाई पर असर डालनेवाली अनावश्यक बैठकों और शिक्षकों की अनुपस्थिति पर रोक लगाने के लिए जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) संजीता महापात्र ने सख्त कदम उठाए हैं. विद्यार्थियो के शैक्षणिक नुकसान को रोकने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग के लिए नई आचार संहिता लागू की गई है. इसके तहत अब हफ्ते में केवल दो दिन की बैठकें आयोजित की जाएगी. नई व्यवस्था के अनुसार अब किसी भी दिन शिक्षकों को वरिष्ठ अधिकारियों द्बारा बैठक के लिए नहीं बुलाया जाएगा. साथ ही यदि किसी मुख्याध्यापक या शिक्षक को स्कूल छोडकर किसी अन्य काम के लिए केंद्र प्रमुख गट शिक्षाधिकारी या शिक्षा अधिकारी के पास जाना हो तो इसके लिए संबंधित पंचायत समिति के अधिकरियों से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा. इसमें स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति बढेगी और अध्यापन कार्य सुचारू रूप से चलेगा, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है.
गप्पा विद सीईओ के दौरान सामने आई शिक्षकेां की अनुपस्थिति – सीईओ संजीता महापात्र द्बारा शुरू किए गये गप्पा विद सीईओ कार्यक्रम के तहत कई स्कूलों का दौरा किया गया.
इस दौरान कई जगहों पर शिक्षक अनुपस्थित पाए गए. शिक्षकों ने शिक्षा अधिकारी कार्यालय, पंचायत समिति स्तर पर गट शिक्षाधिकारी की बैठकों या डाक पहुंचाने के लिए जाने का कारण बताया. इस तरह की अनुशासनहीनता पर रोक लगाने और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है.
छात्रों का शैक्षणिक नुकसान न हो
सीईओ संजीता महापात्र ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर नियंत्रण कडा किया है. अब प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा अधिकारियों सहित निचले स्तर के अधिकारी केवेल मंगलवार और शनिवार को ही बैठके ले सकेंगे. यह फैसला विद्यार्थियों की पढाई प्रभावित न हो, इसी उद्देश्य से लिया गया है. स्कूल के कामकाजी दिनों में बैठकों के कारण शिक्षक अध्यापन नहीं कर पाते, जिससे विद्यार्थिायों का शैक्षणिक नुकसान होता है.
नई आचार संहिता लागू
सीईओ महापात्र की संकल्पना से जितना परिषद की स्कूली और कनिष्ठ महाविद्यालयों में कई शैक्षणिक उपक्रम चलाए जा रहे हैं. हर विद्यार्थी ज्ञान के स्तर पर सक्षम और प्रगल्भ बने. यही इन उपक्रमों का मुख्य उद्देश्य है. लेकिन यदि पर्याप्त अध्यापन ही न हो तो यह उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता. इसी को ध्यान मे रखते हुए यह नई आचार संहिता लागू की गई है.

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