आज फिर होगी मंत्री बावनकुले व पूर्व सांसद नवनीत राणा की भेंट
मंत्री बावनकुले द्वारा पूर्व सांसद राणा को फिर होगा समझाने का काम

* भाजपा में रहकर भी कई सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ काम कर रही पूर्व सांसद राणा
* टिकट बंटवारे में खुद को तवज्जो नहीं दिए जाने व समर्थक प्रत्याशियों के टिकट कटने से हैं नाराज
* आज अमरावती दौरे पर पहुंचे मंत्री बावनकुले द्वारा नाराजी दूर करने का किया जाएगा प्रयास
अमरावती/दि.7 – महानगरपालिका चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी में चल रही अंदरूनी खींचतान को थामने के प्रयास तेज हो गए हैं. इसी क्रम में आज एक बार फिर पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और पूर्व सांसद नवनीत राणा के बीच मुलाकात होने जा रही है. यह भेंट भाजपा के लिए संगठनात्मक रूप से काफी अहम मानी जा रही है. सूत्रों के अनुसार, पालकमंत्री बावनकुले अपने अमरावती दौरे के दौरान पूर्व सांसद राणा से मुलाकात कर नाराजगी दूर करने और संवाद का रास्ता निकालने का प्रयास करेंगे. इससे पहले भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हो चुकी है, हालांकि उस दौरान कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी थी.
* क्यों नाराज हैं नवनीत राणा?
पार्टी सूत्रों का कहना है कि मनपा चुनाव में टिकट बंटवारे के दौरान नवनीत राणा को अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया, उनके करीबी और समर्थक माने जाने वाले कई दावेदारों के टिकट काट दिए गए, जिसके चलते वे पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट चल रही हैं. इसके साथ ही पूर्व सांसद नवनीत राणा की शहर भाजपा के कुछ नेताओं व पदाधिकारियों सहित युति में शामिल घटक दल राकांपा के स्थानीय नेताओं के साथ अदावत जगजाहीर है. जिनके साथ पूर्व सांसद नवनीत राणा की किसी भी हाल में पटरी नहीं बैठ सकती. यही वजह है कि, टिकट बंटवारे की प्रक्रिया खत्म होते ही पूर्व सांसद नवनीत राणा हनुमान गढी परिसर स्थित अपने फॉर्म हाउस में रहने हेतु चली गई थी और एक तरह से अज्ञातवास में थी. जहां से वे पालकमंत्री बावनकुले के पहुंचकर मुलाकात करने के बाद ही बाहर निकली और फिर उन्होंने सीएम देवेंद्र फडणवीस के रोड-शो में भी हिस्सा लिया था. लेकिन रोड-शो के साईनगर पहुंचते-पहुंचते पूर्व सांसद नवनीत राणा इस रोड-शो से अलग हो गई थी और उन्होंने साईनगर प्रभाग से प्रत्याशी रहनेवाले तुषार भारतीय के खिलाफ चुनावी मैदान में खडे युवा स्वाभिमान प्रत्याशी सचिन भेंडे के प्रचार कार्यालय का शुभारंभ किया था. साथ ही बीती रात उन्होंने विलास नगर प्रभाग में वायएसपी प्रत्याशी दीपक साहू सम्राट के पक्ष में प्रचार करते हुए भाजपा प्रत्याशी राजेश साहू पड्डा को एक तरह से हाशिए पर धकेलने का काम किया. जिसे पूर्व सांसद नवनीत राणा की नाराजगी का खुला ऐलान माना जा रहा है.
* अंदरखाने का असंतोष, खुले संकेत
उल्लेखनीय है कि, भाजपा में रहते हुए भी पूर्व सांसद नवनीत राणा पर कई प्रभागों में पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ अप्रत्यक्ष रूप से काम करने के आरोप लग रहे हैं. इससे पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं में असमंजस और असंतोष की स्थिति बनी हुई है. यहां इस बात का विशेष उल्लेख किया जा सकता है कि समूचे राज्य में भाजपा के समक्ष कहीं पर भी अमरावती की तरह स्थिति नहीं है. जहां पर पार्टी के किसी कद्दावर नेतृत्व द्वारा ही निकाय चुनाव में कई सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ काम किया जा रहा हो और अंदरखाने में रहनेवाले असंतोष को लेकर पार्टी को इस तरह से खुले संकेत दिए जा रहे है. इस स्थिति के चलते केवल अमरावती ही नहीं बल्कि प्रदेश स्तर पर भाजपा के खिलाफ गलत संदेश जा रहा है. क्योंकि पूर्व सांसद नवनीत राणा की लोकप्रियता केवल अमरावती शहर व जिले तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे राज्य सहित राष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त तरीके से लोकप्रिय है.
* भाजपा के लिए क्यों अहम है यह मुलाकात?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह असंतोष समय रहते नहीं सुलझा, तो इसका सीधा असर भाजपा के वोट बैंक और चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है. यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व ने डैमेज कंट्रोल मोड में आकर पालकमंत्री बावनकुले को यह जिम्मेदारी सौंपी है. ज्ञात रहे कि, भाजपा फिलहाल संगठन पहले की रणनीति पर आगे बढ़ती दिख रही है, लेकिन नवनीत राणा जैसी प्रभावशाली नेता की नाराजगी को नजरअंदाज करना पार्टी के लिए जोखिम भरा हो सकता है. आज की मुलाकात को इस टकराव के समाधान की दिशा में एक निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, आज की मुलाकात में मंत्री बावनकुले नवनीत राणा को सार्वजनिक अनुशासन और पार्टी लाइन की याद दिलाएंगे, साथ ही यह संकेत भी देंगे कि पार्टी समानांतर राजनीति बर्दाश्त नहीं करेगी. हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि समझौते की गुंजाइश रखते हुए भविष्य की राजनीतिक भूमिका, संगठनात्मक समन्वय, जैसे मुद्दों पर नरम आश्वासन भी दिए जा सकते हैं. पार्टी सूत्र साफ तौर पर मान रहे हैं कि यदि यह प्रयास भी विफल रहा, तो नाराज खेमा हाशिए पर धकेला जा सकता है, या फिर चुनाव बाद कठोर संगठनात्मक फैसले लिए जा सकते हैं.
* ‘अब और बर्दाश्त नहीं’, सूत्रों ने किया दावा
भाजपा के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, मनपा चुनाव के दौरान कई प्रभागों से यह रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व तक पहुंची है कि नवनीत राणा समर्थक कुछ कार्यकर्ता भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ निष्क्रिय या नकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं, कुछ क्षेत्रों में यह नाराजगी मतांतरण तक पहुंचने की आशंका पैदा कर रही है. इसी इनपुट के बाद पालकमंत्री बावनकुले को स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि या तो स्थिति संभालें, या फिर कड़ा फैसला लेने की जमीन तैयार करें.
* टिकट नहीं, ‘तवज्जो’ का सवाल है नाराजगी की जड़
सूत्रों की मानें तो नवनीत राणा की नाराजगी सिर्फ समर्थकों के टिकट कटने तक सीमित नहीं है. असल असंतोष इस बात का है कि टिकट वितरण की प्रक्रिया में उन्हें प्रभावशाली भूमिका नहीं दी गई, स्थानीय समीकरण तय करते समय उनकी राजनीतिक ताकत को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया. पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के शब्दों में, यह लड़ाई टिकटों की नहीं, वर्चस्व और साख की है. यह पूरा प्रकरण भाजपा के उस पुराने द्वंद्व को उजागर करता है, जिसमें एक ओर है केंद्रीकृत संगठनात्मक निर्णय और दूसरी ओर हैं स्थानीय प्रभाव वाले नेता, जो खुद को फैसलों में भागीदार मानते हैं. मनपा जैसे चुनावों में, जहां वार्ड-स्तरीय पकड़ निर्णायक होती है, वहां ऐसे नेताओं की नाराजगी को नजरअंदाज करना जोखिम भरा माना जा रहा है.
* अमरावती से तय होगी मिसाल
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, चूंकि यह मामला सिर्फ अमरावती तक सीमित नहीं है. नवनीत राणा प्रकरण से यह तय होगा कि भाजपा प्रभावशाली असंतुष्ट नेताओं से कैसे निपटती है, संवाद से या अनुशासन से. आज की भेंट इसलिए अहम है, क्योंकि इसके नतीजे आने वाले दिनों में भाजपा की अंदरूनी राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं. कुल मिलाकर, अमरावती मनपा चुनाव से पहले भाजपा की यह अंदरूनी चुनौती कितनी जल्दी सुलझती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं. मंत्री बावनकुले की आज की कोशिशें पार्टी में एकजुटता लाने में कितनी सफल रहती हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा.





