पंढरी परिसर में पट्टेदार बाघ का क्षत-विक्षत शव मिला

घटनास्थल पर ही पोस्टमार्टम कर की अंत्येष्टि, जांच शुरू

वरूड/दि.4- वरूड वन परिक्षेत्र के वाई सर्कल के पंढरी बीट के खंडक्रमांक 1010 में पट्टेदार बाघ का सडीगली अवस्था में शव बरामद होने से खलगली मच गई हैं. गत एक पखवाडा पूर्व उसकी मृत्यु होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा हैं. मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया हैं. बाघ की मृत्यु संदेहास्पद रहने की चर्चा हैं. वन विभाग के अधिकारी सुबह से ही घटनास्थल पर डेरा जमाए हुए बैठे थे.
वन विभाग द्बारा जारी की गई प्रेस विज्ञाप्ति के मुताबिक महेंद्री वनसंवर्धन क्षे के तहत आनेवाले वाई सर्कल के पंढरी बिट में मंगलवार 3 फरवरी को सुबह पट्टेदार बाघ का शव सडीगली अवस्था में दिखाई देने से खलबली मच गई. वन विभाग के कर्मचारी गश्त पर रहते जंगल के एक क्षेत्र से दुर्गंध आती रहने से संबंधित स्थल पर कर्मचारी ने जाकर देखा तब जंगली प्राणी का सडी हुई अवस्था में शव दिखाई दिया. कर्मचारी ने तत्काल स्थानीय वनपरिक्षेत्र अधिकारी प्रशांत भुजाडे व अन्य अधिकारियों को जानकारी दी. जानकारी मिलते ही स्थानीय वनपरिक्षेत्र कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारी घटनास्थल आ पहुंचे. उस जंगली प्राणी के शव का निरीक्षण किया तब वह पट्टेदार बाघ का शव दिखाई दिया. यह जानकारी स्थानीय वनपरीक्षेत्र अधिकारी प्रशांत भुजाडे ने वरिष्ठ अधिकारियों को दी. पश्चात मृत बाघ का पोस्टमार्टम राष्ट्रीय व्याघ्र संवर्धन प्राधिकरण की मार्गदर्शक सूचना के मुताबिक किया गया. पश्चात संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों की उपस्थिति में घटनास्थल पर ही बाघ का अंतिम संस्कार किया गया. यह घटनास्थल वरूड से 18 किमी दूरी पर पांढूर्णा राष्ट्रीय महामार्ग के पंढरी गांव से तीन किमी दूरी पर घने जंगल में आता है. इस कार्रवाई के दौरान वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, पशुवैद्यकिय अधिकारी, डॉग स्क्वॉड, स्वयंसेवी संस्था के प्रतिनिधि और मानद वन्यजीव रक्षक उपस्थित थे. इस प्रकरण की जांच वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के मुताबिक की जा रही है, ऐसी जानकारी अमरावती वनविभाग के उपवनसंरक्षक अर्जुन के. आर. ने दी. बाघ की मृत्यु का कारण पता नहीं चल पाया हैं.
* मध्यप्रदेश से आया बाघ ?
मृत बाघ यह मध्यप्रदेश की तरफ से आने का अनुमान लगाया जा रहा है. महेंद्री संरक्षित जंगल में अनेकों को बाघ के दर्शन हुए हैं. साथ ही तेंदुए द्बारा भी पालतु प्राणियों का शिकार किए जाने की घटनाएं घटित होती रहने से हिंसक प्राणियों का इस क्षेत्र में संचार हैं. बाघ इस परिसर में रहने की चर्चा रहते इस क्षेत्र में बाघ कितने हैं, यह जानकारी वनविभाग के पास नहीं हैं.
* वनविभाग की देखरेख व्यवस्था पर सवाल?
वरूड वनपरिक्षेत्र में बाघ की मृत्यु गंभीर बात हैं. बाघ की मृत्यु को एक पखवाडा बितने के बाद घटना सामने आना, यह वन विभाग की देखरेख व्यवस्था पर सवाल खडे करता है. जांच केवल औपचारिकता तक ही मर्यादित न रखते हुए जिम्मेदारी निश्चित कर कार्रवाई होना आवश्यक है. अन्यथा व्याघ्र संवर्धन यह संकल्पना केवल कागजों तक ही सीमित रहेगी.
– एड. उदयकुमार देशमुख, अध्यक्ष दि कुलाकासा फाउंडेशन, अमरावती

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