‘नवनीत’ ही है ‘असली शेरनी’

अमरावती/दि.8 – इस समय अमरावती शहर में महानगर पालिका के चुनाव को लेकर जिस तरह की राजनीतिक परिस्थितियां बन रही है, विशेषत: भारतीय जनता पार्टी जिस तरह के राजनीतिक हालात से होकर गुजर रही है, उसके मद्देनजर कहा जा सकता है कि, मौजूदा दौर की राजनीति में भाजपा नेत्री व जिले की पूर्व सांसद नवनीत राणा ही ‘असली शेरनी’ है. जो अपने अकेले के दम पर और अपनी शर्तों पर ही राजनीति कर रही है. साथ ही नवनीत राणा के सामने बडी-बडी पार्टी के बडे-बडे नेता इस वक्त बेबस नजर आने के लिए मजबूर है. वहीं दूसरी ओर पूर्व सांसद नवनीत राणा किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव में आए बिना अपनी मर्जी के हिसाब से अपने लिए अपनी राजनीतिक भूमिका चुन रही है और राजनीति के मैदान में ‘असली शेरनी’ की तरह घुमते हुए अपने विरोधियों के खिलाफ जमकर दहाड भी लगा रही है.
याद दिला दें कि, बडनेरा निर्वाचन क्षेत्र के विधायक रवि राणा के साथ विवाहबद्ध होने के बाद अमरावती पहुंची नवनीत राणा ने बहुत जल्द अपने पति व विधायक रवि राणा के साथ सामाजिक व सार्वजनिक क्षेत्र में जबरदस्त तरीके से सक्रिय होते हुए खुद को अमरावती के साथ आत्मसात करना शुरु किया था. साथ ही वे बहुत जल्द अमरावती शहर सहित जिले के साथ घुल-मिल भी गई थी. जिसके चलते देखते ही देखते उन्हें जबरदस्त जनस्वीकार्यता भी मिलनी शुरु हुई और वे वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव आते-आते अमरावती शहर सहित जिले में एक चर्चित चेहरा बन चुकी थी. जिसे ध्यान में रखते हुए उस समय कांग्रेस-राकांपा की आघाडी के तहत तत्कालीन एकीकृत राकांपा के सुप्रीमो शरद पवार ने अमरावती शहर सहित जिले की राजनीति के लिहाज से एकदम ही नया चेहरा रहनेवाली नवनीत राणा को राकांपा की अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर उस समय के तत्कालीन सांसद आनंद अडसूल के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारा था. यद्यपी उस चुनाव में नवनीत राणा को हार का सामना करना पडा था. लेकिन इसके बावजूद वे अमरावती शहर सहित जिले की राजनीति में जबरदस्त तरीके से स्थापित हो गई थी. साथ ही अपना पहला चुनाव हार जाने के बावजूद उन्होंने राजनीतिक व सार्वजनिक क्षेत्र में अपनी सक्रियता को लगातार बनाए रखा. यही वजह रही कि, वर्ष 2019 के संसदीय चुनाव में कांग्रेस-राकांपा की आघाडी ने एक बार फिर नवनीत राणा को प्रत्याशी बनाए जाने पर विचार करना शुरु किया. लेकिन यहीं से नवनीत राणा ने ‘असली शेरनी’ वाले गुण दिखाने शुरु कर दिए थे. जब उन्होंने कांग्रेस-राकांपा आघाडी की ओर से अधिकृत प्रत्याशी के रुप में चुनाव लडने की बजाए निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लडने का निर्णय लिया. साथ ही कांग्रेस-राकांपा आघाडी का अपनी शर्तों पर खुद के लिए समर्थन भी हासिल किया था. विशेष उल्लेखनीय यह कहा जा सकता है कि, कांग्रेस-राकांपा के समर्थन से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर सांसद निर्वाचित होकर संसद में पहुंचने के बाद नवनीत राणा ने तत्कालिक राजनीतिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्ववाली भाजपानित एनडीए गठबंधन की सरकार का समर्थन किया था और वे पूरे पांच साल तक विपक्ष में रहनेवाले कांग्रेस व राकांपा के लिए एक तरह से सिरदर्द ही बनी रही. साथ ही साथ उन पांच वर्षों के दौरान तत्कालीन सांसद नवनीत राणा ने बडी तेजी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय मंत्री अमित शाह सहित भाजपा के तमाम बडे मंत्रियों व नेताओं के साथ घनिष्ट संबंध भी बनाए. जिसकी बदौलत देखते ही देखते नवनीत राणा का राजनीतिक कद इतना अधिक बढ गया कि, भाजपा ने उन्हें अपना स्टार प्रचारक बनाने के साथ ही वर्ष 2024 के संसदीय चुनाव में अमरावती निर्वाचन क्षेत्र से अपना अधिकृत प्रत्याशी भी बनाया.
वर्ष 2024 के संसदीय चुनाव से ऐन पहले भाजपा में शामिल हुई पूर्व सांसद नवनीत राणा भले ही चुनाव हार गई थी. लेकिन वे अब भी भाजपा में शामिल है तथा शहर सहित जिले में भाजपा का सबसे प्रमुख और ताकतवर चेहरा भी है. लेकिन इसके बावजूद पूर्व सांसद नवनीत राणा आज भी अपनी शर्तों पर राजनीति करते हुए अपनी सुविधा के लिहाज के अपनी राजनीतिक भूमिका अपनाकर आगे बढने की नीति पर काम कर रही है. ध्यान दिलाया जा सकता है कि, विगत विधानसभा चुनाव में भाजपा व शिंदे गुट वाली शिवसेना ने युति के तौर पर हिस्सा लिया था और जिले के 8 में से 5 निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा ने अपने अधिकृत प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा था. वहीं अमरावती, बडनेरा व दर्यापुर निर्वाचन क्षेत्र घटक दलों के लिए छोडे गए थे. जिसमें से बडनेरा निर्वाचन क्षेत्र में खुद नवनीत राणा के पति व युवा स्वाभिमान पार्टी के मुखिया रवि राणा युति की ओर से प्रत्याशी थे, जो चुनाव में विजयी भी रहे. वहीं दूसरी ओर अमरावती विर्वाचन क्षेत्र की सीट युति के तहत अजीत पवार गुट वाली राकांपा के हिस्से में छुटी थी और राकांपा ने राणा दंपति की धूर विरोधी रहनेवाली सुलभा खोडके को चुनावी मैदान में उतारा था. जिनके खिलाफ पूर्व सांसद नवनीत राणा ने भाजपा से बगावत कर चुनावी मैदान में उतरे पूर्व मंत्री जगदीश गुप्ता की दावेदारी का हिंदुत्व के मुद्दे पर समर्थन किया था. जिसके चलते सुलभा खोडके बमुश्किल हारते-हारते बची और जैसे-तैसे चुनाव जीत पाई. इसके अलावा दर्यापुर निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा-सेना युति के तहत पूर्व विधायक अभिजीत अडसूल को शिंदे सेना ने अपना प्रत्याशी बनाया था. चूंकि अडसूल पिता-पुत्र के साथ भी राणा दंपति की पुरानी अदावत चली आ रही है. जिसके चलते पूर्व सांसद नवनीत राणा ने दर्यापुर में अडसूल के खिलाफ भाजपा में बगावत करनेवाले पूर्व भाजपा विधायक रमेश बुंदिले की दावेदारी का समर्थन किया था और वे बुंदिले का प्रचार करने खुलेआम दर्यापुर भी पहुंची थी. साथ ही ध्यान देनेवाली बात यह भी है कि, विधानसभा चुनाव में जहां-जहां भाजपा के प्रत्याशी खडे थे, उन सभी सीटों पर भी नवनीत राणा ने अपने सभी विरोधियों का शिकार करने में सफलता हासिल की. जिसके तहत तिवसा निर्वाचन क्षेत्र में पूर्व मंत्री एड. यशोमति ठाकुर, अचलपुर निर्वाचन क्षेत्र में पूर्व मंत्री बच्चू कडू को हराने में नवनीत राणा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही, यानि किसी ‘असली शेरनी’ की तरह अपने विरोधियों का शिकार करने के लिए पूर्व सांसद नवनीत राणा ने कभी भी किसी भी बात या बाधा की फिक्र नहीं की. लगभग यही स्थिति अब मनपा चुनाव में भी दिखाई दे रही है.
बता दें कि, भाजपा का एक सशक्त चेहरा बनने के बाद पूर्व सांसद नवनीत राणा ने शहर सहित जिले की भाजपा पर बडी तेजी के साथ अपनी मजबूत पकड बनानी शुरु कर दी थी. जिसके तहत विधानसभा चुनाव में अपने विरोधियों को निपटाने के साथ ही पूर्व सांसद नवनीत राणा ने शहर अध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष पदों सहित भाजपा की महिला शहराध्यक्ष एवं भारतीय जनता युवा मोर्चा के शहराध्यक्ष पदों पर अपने समर्थकों को आसीन कराने में जबरदस्त सफलता हासिल की और अपने पुराने विरोधी प्रवीण पोटे को बडी सफाई के साथ किनारे पर भी लगा दिया. परंतु मनपा चुनाव की गहमा-गहमी शुरु होते ही भाजपा का स्थानीय नेतृत्व टिकट बांटने एवं युवा स्वाभिमान पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर शायद कहीं न कहीं चूक गया. जिसके चलते अब तक भाजपा के लगभग सभी मंचों पर दिखाई दे रही पूर्व सांसद नवनीत राणा ने इस बार भाजपा के स्थानीय नेताओं के खिलाफ ही जबरदस्त हुंकार भर दी और खुद को एक तरह से भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान से दूर कर लिया. जिसके चलते खुद जिला पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को पूर्व सांसद नवनीत राणा की समझाईश के लिए पहल करनी पडी. लेकिन खास बात यह रही कि, पालकमंत्री द्वारा मनाने और समझाने के बाद ही पूर्व सांसद नवनीत राणा ने अपने भाषण, अंदाज और प्रचार दौरे खुद अपने हिसाब से तय करने शुरु किए. जिसके तहत उन्हें जहां जाना होता है, वे वहीं पर जाती है अन्यथा जहां उन्हें नहीं जाना होता, वहां पर वे पार्टी के निर्देशों की भी अनदेखी कर देती है.
ध्यान दिला दें कि, मनपा चुनाव के लिए शहर भाजपा ने एक तरह से होटल ग्रैंड महफिल को अपना एक प्रमुख केंद्र बना रखा है. जहां पर भाजपा के तमाम बडे नेताओं व पदाधिकारियों का लगातार जमघाट लगा हुआ है. परंतु पूर्व सांसद नवनीत राणा एक बार भी होटल ग्रैंड महफिल नहीं पहुंची. यहां तक की गत रोज होटल ग्रैंड महफिल में भाजपा के चुनावी घोषणापत्र को जारी करने हेतु आयोजित पत्रवार्ता और उसके बाद हुई प्रबुद्ध बैठक में भी पूर्व सांसद नवनीत राणा दिखाई नहीं दी. इसके अलावा यह भी ध्यान दिलाया जा सकता है कि, बीते रविवार को सीएम फडणवीस के रोड-शो में भले ही पूर्व सांसद नवनीत राणा शामिल हुई थी, परंतु यह रोड-शो जैसे ही साईनगर प्रभाग के पास पहुंचा, तो पूर्व सांसद नवनीत राणा ने खुद को इस रोड-शो से अलग कर लिया और वे सीएम का प्रचार दौरा खत्म होने से पहले ही साईनगर प्रभाग में भाजपा प्रत्याशी तुषार भारतीय के खिलाफ खडे युवा स्वाभिमान पार्टी के प्रत्याशी सचिन भेंडे के प्रचार कार्यालय का शुभारंभ करते दिखाई दी. इसके अलावा प्रभाग क्र. 6 मोरबाग-विलास नगर में पूर्व सांसद नवनीत राणा ने युवा स्वाभिमान पार्टी के एक प्रत्याशी का खुले तौर पर प्रचार करते हुए क्षेत्र के मतदाताओं को ‘तीन कमल, एक पाना’ का नारा भी दिया. जिसे लेकर शहर भाजपा में भले ही अच्छा-खासा हडकंप मचा रहा, लेकिन भाजपा का एक भी नेता या स्थानीय पदाधिकारी इस बयान के खिलाफ खुले तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे पाया. जबकि दूसरी ओर पूर्व सांसद नवनीत राणा अपना हर काम डंके की चोट पर कर रही है और जिन सीटों पर भाजपा व युवा स्वाभिमान पार्टी की सीधी टक्कर है, वहां जाने से बचने के साथ ही कई सीटों पर खुलेआम युवा स्वाभिमान पार्टी के प्रत्याशियों का प्रचार कर रही है. ऐसे में कहा जा सकता है कि, हाल-फिलहाल के दौर में राजनीति के मैदान में नवनीत राणा ही एकमात्र और असली शेरनी है, जो अपनी शर्तों पर अपना मैदान तय कर रही है.

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