‘कट्टर हिंदुत्व’ की लाइन पर चल रही नवनीत राणा
प्रचार रैलियों में ‘बुर्केवाली’ व ‘पाकिस्तानी महापौर’ जैसे शब्दों का प्रयोग

* राकांपा प्रत्याशी रहनेवाले पूर्व उपमहापौर शेख जफर पर जमकर साध रही निशाना
* हर बात में ‘हिंदुत्व’ व ‘भगवा’ शब्दों का बार-बार उल्लेख, ‘चादर चढानेवालों’ से बचने की भी अपील
अमरावती/दि.9 – इस समय मनपा चुनाव को लेकर प्रचार की जबरदस्त धामधूम चल रही है और सभी राजनीतिक दलों द्वारा अपने-अपने प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार हेतु जमकर ताकत झोंकी जा रही है. जिसके चलते शहर में राजनीतिक वातावरण पहले ही जमकर गरमाया हुआ है. इसी बीच भाजपा नेत्री व पूर्व सांसद नवनीत राणा ने प्रचार को पूरी तरह कट्टर हिंदुत्व की पिच पर ला खड़ा किया है. जनसभाओं और रैलियों में उनके भाषण अब विकास या स्थानीय मुद्दों से ज्यादा हिंदुत्व, भगवा और धार्मिक पहचान के इर्द-गिर्द घूमते नजर आ रहे हैं. उनके भाषणों में प्रयुक्त ‘बुर्केवाली’ और ‘पाकिस्तानी महापौर’ जैसे शब्दों ने चुनावी माहौल को और ज्यादा उग्र बना दिया है.
उल्लेखनीय है कि, महानगरपालिका चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व सांसद नवनीत राणा का रुख लगातार कट्टर हिंदुत्व की ओर झुका नजर आ रहा है. प्रचार रैलियों और जनसभाओं में वे बार-बार ‘हिंदुत्व’ और ‘भगवा’ शब्दों का उल्लेख कर रही हैं. इस दौरान उनके भाषणों में ‘बुर्केवाली’ और ‘पाकिस्तानी महापौर’ जैसे शब्दों के प्रयोग ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है. पूर्व सांसद नवनीत राणा अपने भाषणों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रत्याशी और पूर्व उपमहापौर शेख जफर को सीधे निशाने पर लेती दिख रही हैं. बिना नाम लिए या नाम लेकर किए जा रहे इन हमलों को लेकर चुनावी माहौल में तल्खी बढ़ती जा रही है. राणा अपने भाषणों में मतदाताओं से अपील कर रही हैं कि वे चादर चढ़ाने वालों और तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों से सतर्क रहें.
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, नवनीत राणा की यह आक्रामक हिंदुत्ववादी शैली एक खास मतदाता वर्ग को साधने की रणनीति का हिस्सा है. हालांकि, चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के मद्देनजर उनके भाषणों पर प्रशासन की नजर बनी हुई है. चुनावी सरगर्मी के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि नवनीत राणा की यह रणनीति उन्हें कितना राजनीतिक लाभ दिला पाती है या फिर विवाद उनके लिए मुश्किलें खड़ी करते हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नवनीत राणा जानबूझकर आक्रामक भाषा और विवादित शब्दों का सहारा लेकर चुनाव को हिंदुत्व बनाम विरोधी धड़ा की सीधी लड़ाई में बदलना चाहती हैं. हालांकि विरोधी दल इसे समाज को बांटने वाली राजनीति करार दे रहे हैं और चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग भी उठने लगी है.
कुल मिलाकर प्रचार के दौरान नवनीत राणा यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि आगामी चुनाव ‘विकास बनाम तुष्टीकरण’ नहीं, बल्कि ‘हिंदुत्व बनाम विरोधी विचारधारा’ का मुकाबला है. उनके समर्थकों का कहना है कि राणा खुलकर अपनी विचारधारा रख रही हैं, जबकि विरोधी दल उनके बयानों को समाज में विभाजन पैदा करने वाला करार दे रहे हैं. चुनावी रण में नवनीत राणा का यह तेवर उन्हें मजबूत समर्थन दिलाएगा या विवादों में उलझाकर नुकसान पहुंचाएगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा. फिलहाल इतना तय है कि अमरावती का चुनावी मैदान अब पूरी तरह गर्म हो चुका है.





