ऑनलाइन सट्टेबाजों का नेटवर्क अब क्राईम ब्रांच के राडार पर!
गिरीश दादलानी को आईडी देनेवाले की खोजबीन शुरु

* पुराने सट्टेबाजों की गतिविधियों पर भी रखी जा रही नजर
अमरावती /दि.11– शहर में आईपीएल क्रिकेट मैचों पर सट्टा लगानेवाले बुकियों व सटोरियों के खिलाफ अब शहर पुलिस की अपराध शाखा ने अपना शिकंजा कसना शुरु कर दिया है. विगत दिनों दस्तुर नगर परिसर से पकडे गए ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाज गिरीश उर्फ प्रिंस संजय दादलानी (20, सराफ लेआउट, कलोती नगर) से की गई पूछताछ के बाद बेहद सनसनीखेज जानकारी सामने आई है. जिसके तहत पता चला है कि, सट्टा चलाने हेतु आवश्यक रहनेवाली ऑनलाइन गेमिंग आईडी को गिरीश दादलानी ने ऑनलाइन ही खरीदा था. जिसके चलते इस सट्टेबाजी के पीछे कोई बहुत बडा ऑनलाइन रैकेट सक्रिय रहने की संभावना जताई जा रही है.
बता दें कि, पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में गिरीश दादलानी के मोबाइल में ‘ओएसटीआयएन-777’ नामक ऑनलाइन क्रिकेट बेटिंग एप पाया गया था. जिसे चलाने हेतु गिरीश ने ‘30 डीडीएल’ यूजर नेम और एक विशिष्ट पासवर्ड का प्रयोग किया था. पुलिस द्वारा की गई प्राथमिक जांच-पडताल में गिरीश ने उक्त आईडी को ऑनलाइन तरीके से खरीदने की कबूली दी है. जिसके चलते गिरीश को यह ऑनलाइन आईडी किसने दी और इस आर्थिक लेन-देन के कनेक्शन किसके साथ जुडे हुए है, इसकी जांच-पडताल अपराध शाखा द्वारा की जा रही है.
वहीं दूसरी ओर विगत तीन-चार वर्षों के दौरान शहर पुलिस ने जिन क्रिकेट सट्टाबाजों को पकडा था, अब उनकी मौजूदा स्थिति को पुलिस द्वारा खंगाला जा रहा है. जिसके तहत यह पता लगाया जा रहा है कि, वे पुराने सट्टेबाज इन दिनों कहां है और क्या कर रहे है.
* बडे पार्टनर की खोज शुरु
उल्लेखनीय है कि, प्रिंस दादलानी की उम्र केवल 20 वर्ष है और उसके बेटिंग एप में 5 लाख 31 हजार 950 रुपयों का बैलेंस दिखाई दिया. इतनी बडी रकम का लेन-देन वह अकेला ही कर रहा था या इसके पीछे कोई ‘बडी मछली’ है, इस बात की जांच भी पुलिस द्वारा की जा रही है. पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि, इस तरह से ऑनलाइन आईडी की विक्री करनेवाला एक बडा रैकेट सक्रिय है. जो इस समय क्राईम ब्रांच के राडार पर है और बहुत जल्द कुछ बडे नामों का पर्दाफाश भी होगा.
* आईपीएल सीजन के दौरान अमरावती शहर में सट्टेबाजों ने अपना नेटवर्क किस तरह से फैलाया है, इसकी हम जांच कर रहे है. पुलिस रिकॉर्ड पर रहनेवाले सभी सट्टेबाजों की प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. साथ ही गिरीश दादलानी को ऑनलाइन आईडी किसने मुहैया कराई, इसकी भी जांच की जा रही है.
– पीआई संदीप चव्हाण
अपराध शाखा प्रमुख.