मनपा के नए पार्षदों के सामने रहेगी काम करने और करवाने की चुनौती

कई जनसुविधाओं के काम लंबे अर्से से पडे है आधे-अधूरे और प्रलंबित

* शहर की साफ-सफाई सहित विकास व विस्तार पर भी देना होगा पूरा ध्यान
* प्रशासक राज की आदत पड चुके अधिकारियों व कर्मचारियों के काम को भी देनी होगी गति
अमरावती/दि.21 – करीब 9 वर्ष के अंतराल पश्चात अमरावती महानगर पालिका के हाल ही में आम चुनाव हुए. इन 9 वर्षों के दौरान पिछले 4 वर्षों से अमरावती महानगर पालिका में प्रशासक राज चला आ रहा था और इस दौरान जनता की मूलभूत सुविधाओं सहित शहर के विकास व विस्तार से संबंधित कई कामों का जबरदस्त तरीके से सत्यानाश हुआ. साथ ही प्रशासक राज के दौरान एक तरह से मनपा के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों की मनमानी ही चलती रही. जिसके चलते आम जनता से संबंधित कई मुद्दे और साफ-सफाई, कचरा संकलन, कचरे का निस्सारण व प्रबंधन, बदहाल व खस्ताहाल सडकों की दुरुस्ती, क्रीडांगणों, उद्यानों व तालाबों के देखभाल, दुरुस्ती व सौंदर्यीकरण सहित शहर के विकास जैसे कई मामलों की जबरदस्त अनदेखी की जाती रही. लेकिन चूंकि अब अमरावती मनपा के सदन में एक बार फिर ‘जनता का राज’ आ चुका है और जनता के प्रतिनिधियों का निर्वाचन हो चुका है. ऐसे में अब उम्मीद की जा रही है कि, जनता में से निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा इन सभी बातों की ओर गंभीरतापूर्वक ध्यान दिया जाएगा.
ऐसे में यह कहना भी अतिशयोक्ति नहीं होगा कि, अमरावती महानगर पालिका के नवनिर्वाचित पार्षदों को अब दोहरी चुनौती का सामना करना पडेगा. इसके तहत पहली चुनौती शहर में मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराते हुए शहर के विकास को गतिमान करने की रहेगी. वहीं दूसरी चुनौती विगत चार वर्षों के दौरान प्रशासक राज में ‘काम करने’ की आदत हो चुके मनपा के अधिकारियों व कर्मचारियों को जनता के कामों के प्रति जवाबदेह बनाने की भी रहेगी. यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, अमरावती मनपा क्षेत्र में जहां एक ओर साफ-सफाई की समस्या बेहद विकराल रुप ले चुकी है, जिसका विगत चार वर्षों के प्रशासक राज दौरान मनपा प्रशासन द्वारा कोई संतोषजनक समाधान नहीं खोजा गया. बल्कि साफ-सफाई के नाम पर अलग-अलग आयुक्तों ने प्रशासक के रुप में नित-नए प्रयोग किए. जिसके चलते पूरे शहर में जगह-जगह कचरे व गंदगी के ढेर लगे दिखाई दे रहे है. वहीं दूसरी ओर अमरावती शहर में विगत 27 वर्षों से भूमिगत गटर योजना का काम आधा-अधूरा और प्रलंबित पडा है. जिसकी ओर विगत लंबे समय से स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा भी कोई ध्यान नहीं दिया गया. इसी तरह अमरावती शहर में विगत 9 वर्षों से डेवलपमेंट प्लान यानि ‘डीपी’ का भी मामला अधर में लटका हुआ है. जिसके चलते शहर में रिहायशी बस्तियों के विकास व विस्तार का काम रुका हुआ है और भू-विकास नहीं हो पाने के चलते शहर के विस्तारित होने के सभी रास्ते भी बंद पडे है. इसके अलावा शहर में नेहरु मैदान के साथ ही छत्री तालाब व उद्यान एवं वडाली तालाब व उद्यान की देखभाल व दुरुस्ती सहित सौंदर्यीकरण की ओर किसी का कोई ध्यान नहीं है. जबकि बाग-बगीचों एवं क्रीडांगणों की देखभाल व दुरुस्ती सहित वहां पर जन सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु करोडों रुपयों की निधि खर्च हो रही है. यही स्थिति शहर की रिहायशी बस्तियों के अंतर्गत रास्तों की भी है. जो जनप्रतिनिधियों सहित प्रशासकों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिए जाने के चलते बदहाल और खस्ताहाल हो चुके हैं. ऐसे में सबसे पहले तो मनपा के सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को इन्हीं समस्याओं को हल करने की चुनौती से जुझना होगा.
जहां एक ओर मनपा के सभी नवनिर्वाचित पार्षदों के सामने अपने-अपने प्रभागों व वॉर्डों में तमाम तरह के काम करने की चुनौती रहेगी, वहीं दूसरी ओर उनके सामने सबसे बडी चुनौती मनपा के अधिकारियों व कर्मचारियों से काम करवाने की भी रहेगी. क्योंकि इस समय अमरावती महानगर पालिका में लगभग सन 1992 वाली स्थिति है, जब लंबे प्रशासक राज के बाद मनपा के सदन में जनता का राज आया था और उस समय के जनप्रतिनिधियों को प्रशासक राज की आदत रहनेवाले अधिकारियों व कर्मचारियों से काम करवाने में अच्छी-खासी समस्याओं व दिक्कतों का सामना करना पडा था. लगभग वही स्थिति इस समय भी अमरावती मनपा में है. क्योंकि मनपा के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को विगत चार वर्षों से प्रशासक राज के तहत मनमाने ढंग से काम करने की आदत हो गई है और इस आदत को छुडाते हुए मनपा के अधिकारियों व कर्मचारियों को ‘ऑन ग्राउंड’ लाकर काम करवाने की चुनौती भी सभी नवनिर्वाचित पार्षदों के सामने रहेगी.


* चार साल में मनपा ने देखे चार प्रशासक
बता दें कि, 8 मार्च 2022 को अमरावती महानगर पालिका के छंठवें सदन का कार्यकाल खत्म हुआ था. जिसके बाद अगले ही दिन से अमरावती महानगर पालिका में प्रशासक राज की शुरुआत हुई थी और उस समय मनपा आयुक्त के पद पर रहनेवाले प्रवीण आष्टीकर पहले प्रशासक नियुक्त हुए थे. जिनका कार्यकाल अगले करीब सवा वर्ष तक चलता रहा और काफी हद तक विवादों के घेरे में भी रहा. इसके उपरांत मनपा आयुक्त के पद पर आए देवीदास पवार दूसरे प्रशासक रहे. जिनका नाम भी कुछ हद तक विवादों में घसीटा गया. जिसके चलते उनका विभागीय आयुक्तालय में सहआयुक्त के पद पर तबादला हो गया था और उनके स्थान पर मुंबई में पदस्थ रहनेवाले नितिन कापडनिस की मनपा आयुक्त व प्रशासक के तौर पर नियुक्ति की गई थी. जो अपना पदभार लेने के लिए अमरावती भी पहुंचे थे. परंतु इसी दौरान देवीदास पवार ने अपने तबादले को अदालत में चुनौती दे दी थी. जिसके चलते खुद को इस विवाद से दूर रखते हुए नितिन कापडनिस अमरावती में अपना पदभार स्वीकार किए बिना ही वापिस लौट गए थे. जिसके बाद सचिन कलंत्रे की मनपा आयुक्त व तीसरे प्रशासक के तौर पर नियुक्ति हुई थी. जिनके उपरांत आईएएस अधिकारी रहनेवाली सौम्या शर्मा ने मनपा आयुक्त व चौथे प्रशासक के तौर पर पदभार संभाला. जिनका कार्यकाल अब भी जारी है. ऐसे में कहा जा सकता है कि, विगत चार वर्षों के दौरान अमरावती महानगर पालिका ने प्रशासक के तौर पर चार अलग-अलग आयुक्त देख लिए और अब प्रशासक राज की जल्द ही समाप्ती होने जा रही है.

Back to top button