महापौर-उपमहापौर नहीं बन सकता कोई स्वीकृत पार्षद
स्वीकृत पार्षद के पास मनपा में किसी पद के लिए चुनाव लडने या वोट डालने का नहीं होता अधिकार

* आमसभा व विशेष सभा में होनेवाली चर्चाओं में स्वीकृत पार्षद ले सकते हैं हिस्सा
* स्थायी समिति सहित विषय समितियों में सदस्य के तौर पर भी हो सकते हैं नामित
अमरावती/दि.24 – अमरावती महानगर पालिका के चुनाव निपटते ही अब जहां एक ओर नए महापौर व उपमहापौर के चुनाव की गहमा-गहमी शुरु हो गई है, वहीं दूसरी ओर सभी की निगाहें इस बात की ओर भी लगी हुई है कि, मनपा में स्वीकृत पार्षद पदों के तौर पर किस पार्टी की ओर से किन-किन लोगों का चयन होता है. इसके साथ ही आम नागरिकों में इस बात को लेकर भी अच्छी-खासी उत्सुकतापूर्ण चर्चा चल रही है कि, क्या कोई स्वीकृत पार्षद भी कभी महानगर पालिका में महापौर, उपमहापौर व स्थायी समिति सभापति जैसे पद के लिए चुना जा सकता है. इसके मद्देनजर दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने महाराष्ट्र महानगर पालिका अधिनियम 1948 का अध्ययन किया. जिसकी धारा 2 (11) में उल्लेखित प्रावधानों से स्पष्ट होता है कि, मनपा का कोई भी स्वीकृत सदस्य कभी भी महापौर व उपमहापौर सहित स्थायी समिति सभापति या विषय समिति सभापति पद का चुनाव नहीं लड सकता. साथ ही स्वीकृत सदस्य को इन पदों के लिए होनेवाले चुनाव में वोट डालने का भी अधिकार नहीं होता. जिसके चलते स्पष्ट है कि, कोई भी स्वीकृत सदस्य कभी भी महापौर व उपमहापौर अथवा स्थायी समिति सभापति नहीं बन सकता है.
बता दें कि, महाराष्ट्र महापालिका अधिनियम 1948 की धारा 2 (11) के तहत केवल जनता द्वारा निर्वाचित पार्षद ही महापौर पद के लिए पात्र होते हैं, जबकि विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा नामित एवं मनपा के सदन में स्वीकृत पार्षदों को यह अधिकार नहीं है. कानूनी प्रावधानों के अनुसार, महापौर व उपमहापौर का चुनाव महानगरपालिका के निर्वाचित पार्षदों द्वारा किया जाता है. स्वीकृत पार्षदों को इस हेतु बुलाई गई बैठक में भाग लेने का अधिकार तो होता है, किंतु उन्हें महापौर व उपमहापौर पदों के लिए होनेवाले चुनाव में मतदान करने का अधिकार नहीं होता. साथ ही वे स्वयं महापौर या उपमहापौर पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकते.
विधि विशेषज्ञों के अनुसार, अमरावती महानगरपालिका पर बॉम्बे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) अधिनियम लागू नहीं होता, बल्कि महाराष्ट्र महापालिका अधिनियम लागू होता है, जिसमें स्वीकृत पार्षद को महापौर बनने की अनुमति नहीं दी गई है. उम्मीद की जा सकती है कि, इस जानकारी के स्पष्ट हो जाने से महापौर पद को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं पर विराम लगेगा और सत्ता गठन की प्रक्रिया अब केवल निर्वाचित पार्षदों के आधार पर ही आगे बढ़ेगी.
* ‘एमएलसी’ के चुनाव में वोट डाल सकते है स्वीकृत पार्षद
विशेष उल्लेखनीय है कि, जहां एक ओर महाराष्ट्र महानगर पालिका अधिनियम के तहत स्वीकृत पार्षदों को मनपा में होनेवाले किसी भी चुनाव में हिस्सा लेने अथवा उस चुनाव में वोट डालने का अधिकार नहीं होता. वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में मनपा के स्वीकृत पार्षदों को विधान परिषद की सीट हेतु स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र में होनेवाले चुनाव में वोट डालने का मौका मिलता है. यहां तक की मनपा में स्वीकृत पार्षद रहनेवाला कोई व्यक्ति ऐसे चुनाव में खुद प्रत्याशी के तौर पर हिस्सा भी ले सकता है. इससे पहले वर्ष 2018 के दौरान स्थानीय निकाय क्षेत्र से विधान परिषद की सीट हेतु हुए चुनाव को ही इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण कहा जा सकता है.





