केवल प्रत्याशियों का ही नहीं, दिग्गजों की प्रतिष्ठा और भविष्य भी दांव पर
मनपा के चुनावी नतीजे तय करेंगे नेताओं की राजनीतिक दशा व दिशा

* सभी दलों के नेताओं ने मनपा चुनाव में झोंकी हैं अपनी जबरदस्त ताकत
* अब सभी की निगाहें ईवीएम से निकलनेवाले चुनावी नतीजों पर टिकी, धडकने तेज
अमरावती/दि.15 – आज हुए अमरावती महानगर पालिका के चुनाव में जहां एक ओर चुनाव लड रहे प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा हुआ है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है. क्योंकि मनपा के चुनावी नतीजे प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य तय करने के साथ ही अलग-अलग पार्टियों के नेताओं की दशा और दिशा को भी तय करेंगे और मनपा के चुनावी नतीजों के आधार पर ही विभिन्न दलों के नेताओं का अगला राजनीतिक सफर निर्धारित होगा. यही वजह रही कि, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने मनपा के चुनाव में अपने-अपने प्रत्याशियों की जीत तय करने तथा अधिक से अधिक सीटों पर अपने प्रत्याशियों को चुनाव जीताने के लिए अपनी पूरी ताकत को झोंक दिया था और अब सभी नेताओं की निगाहें ईवीएम से निकलने वाले चुनावी नतीजे की ओर टिकी हुई है.
बता दें कि, मनपा चुनाव में सबसे आक्रामक चुनाव प्रचार अभियान भाजपा की ओर से किया गया और भाजपा ने सीएम देवेंद्र फडणवीस सहित अपने सभी बडे नेताओं व स्टार प्रचारकों को पार्टी प्रत्याशियों के प्रचार हेतु मैदान में उतारा गया था. जिनमें अमरावती से ही वास्ता रखनेवाले राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे तथा भाजपा नेत्री व पूर्व सांसद नवनीत राणा सहित पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे पाटिल का भी समावेश रहा. जिन्होंने मनपा क्षेत्र के अलग-अलग प्रभागों में प्रचार सभाएं व प्रचार रैलियां करते हुए भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में जमकर माहौल बनाने का काम किया था. ऐसे में भाजपा प्रत्याशियों की हार-जीत पर सांसद डॉ. अनिल बोंडे, पूर्व सांसद नवनीत राणा व पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे पाटिल की राजनीतिक प्रतिष्ठा का दांव लगा हुआ है.
वहीं दूसरी ओर मनपा चुनाव में शुरु से ही ‘एकला चलो’ की भूमिका लेकर चल रही अजीत पवार गुट की राकांपा के प्रत्याशियों के प्रचार का पूरा जिम्मा पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष व विधायक संजय खोडके व स्थानीय विधायक सुलभा खोडके सहित उनके सुपूत्र यश खोडके ने अपने कंधे पर उठा रखा था. जो एक तरह से राकांपा प्रत्याशियों के लिए किसी स्टार प्रचारक से कम नहीं थे. ऐसे में राकांपा प्रत्याशियों की हार-जीत खोडके परिवार के लिए काफी मायने रखती है. क्योंकि इसी चुनावी नतीजे के आधार पर खोडके परिवार का राजनीतिक भविष्य निर्भर करेगा.
इसके साथ ही शिंदे गुट वाली शिवसेना ने भी मनपा चुनाव में अपनी अच्छी-खासी ताकत झोंकी तथा डेप्युटी सीएम एकनाथ शिंदे को पार्टी प्रत्याशियों के प्रचार हेतु अमरावती के चुनावी मैदान में उतारा. साथ ही साथ स्थानीय स्तर पर पूर्व मंत्री जगदीश गुप्ता, पूर्व विधायक अभिजीत अडसूल तथा महिला नेत्री प्रीति बंड द्वारा शिंदे सेना के ‘शिलेदार’ बने रहे. जिनका राजनीतिक भविष्य अब मनपा के चुनावी नतीजों पर पूरी तरह से निर्भर करेगा.
इसके अलावा सत्ताधारी भाजपा व महायुति के लिए प्रमुख प्रतिस्पर्धी दल रहनेवाली कांग्रेस पार्टी ने भी इस बार मनपा के चुनाव पर अपना पूरा फोकस रखा. जिसके तहत जिले के कांग्रेसी सांसद बलवंत वानखडे, पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख व एड. यशोमति ठाकुर सहिर पार्टी प्रत्याशी रहनेवाले कांग्रेस शहराध्यक्ष बबलू शेखावत व पूर्व महापौर विलास इंगोले की राजनीतिक प्रतिष्ठा को भी दांव पर लगा हुआ कहा जा सकता है.
इन सबके साथ ही बडनेरा निर्वाचन क्षेत्र के विधायक रवि राणा के नेतृत्ववाली युवा स्वाभिमान पार्टी ने भी अपने अकेले के दम पर मनपा के चुनाव में हिस्सा लिया है और भाजपा के साथ महायुति में रहनेवाले विधायक रवि राणा व उनकी युवा स्वाभिमान पार्टी ने जहां एक ओर भाजपा को चुनौती देने का काम किया, वहीं खुद उन्हें भी कई सीटों पर भाजपा की ओर से ही कडी चुनौती का सामना भी करना पडा. साथ ही साथ कई सीटों पर भाजपा और युवा स्वाभिमान पार्टी के बीच विधायक रवि राणा तथा उनकी पत्नी व पूर्व सांसद नवनीत राणा की अलग-अलग भूमिकाओं के चलते असमंजसवाली स्थिति भी बनी और तय होने के बावजूद दोनों पार्टियों की युति भी टूट गई. जिसके चलते अब मनपा चुनाव के नतीजों से यह तय होगा कि, अमरावती में राणा दंपति की कितनी राजनीतिक ताकत है और क्या वे आगे भी भाजपा के लिए प्रासंगिक बने रहेंगे.