सौ से अधिक उम्मीदवारों को नोटिस

चुनाव खर्च न देने पर होगी कड़ी कार्रवाई

* नप चुनाव के एक माह बाद भी कई प्रत्याशियों ने नहीं दिया खर्च का ब्यौरा
अमरावती /दि.4- चुनाव परिणाम घोषित होने के एक महीने के भीतर चुनाव खर्च का लेखा-जोखा जमा न करने पर जिले की नगरपालिकाओं और नगरपंचायतों के सौ से अधिक उम्मीदवारों को नोटिस जारी किए गए हैं. यह कार्रवाई राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार की गई है. संबंधित नगरपालिकाओं ने इन उम्मीदवारों को एक सप्ताह की अंतिम मोहलत दी है. यदि इस अवधि में भी उम्मीदवार अपने चुनाव खर्च का अंतिम विवरण प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी कार्यालय को भेजी जाएगी. इसके बाद जिलाधिकारी की ओर से दोबारा नोटिस जारी होंगे और आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी.
* 12 निकायों में चुनाव, हजार से अधिक उम्मीदवार मैदान में
जिले की 10 नगरपालिकाओं – अचलपुर, अंजनगांव सुर्जी, दर्यापुर, चिखलदरा, चांदूर बाजार, चांदूर रेलवे, धामणगांव रेलवे, मोर्शी, वरुड और शेंदुरजनाघाट – तथा दो नगरपंचायतों – नांदगांव खंडेश्वर और धारणी – में 16 दिसंबर को चुनाव परिणाम घोषित हुए थे. इन चुनावों में कुल 12 नगराध्यक्ष और 278 नगरसेवकों का चयन होना था. नगराध्यक्ष पद के लिए 64 और नगरसेवक पद के लिए 1048 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे. इनमें से अधिकांश ने समय पर अपने खर्च का विवरण जमा कर दिया है, लेकिन सौ से अधिक उम्मीदवारों ने अब तक यह अनिवार्य प्रक्रिया पूरी नहीं की है.
* कानून का स्पष्ट प्रावधान, सख्त सजा का प्रावधान
निर्वाचन नियमों के अनुसार प्रत्येक उम्मीदवार को परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर अपने चुनाव प्रचार एवं अन्य खर्चों का अंतिम लेखा संबंधित तहसील कार्यालय के निर्वाचन विभाग में जमा करना अनिवार्य होता है. इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और धनबल के दुरुपयोग पर अंकुश लगाना है. यदि नोटिस के बावजूद भी उम्मीदवार खर्च का विवरण जमा नहीं करते हैं, तो जिलाधिकारी उनकी जानकारी सीधे राज्य निर्वाचन आयोग को भेजेंगे. आयोग की ओर से कार्रवाई की सिफारिश पर ऐसे उम्मीदवारों पर आगामी 6 वर्षों तक कोई भी चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है.
* प्रशासन सख्त, पारदर्शिता पर जोर
नगरपालिका प्रशासन और जिलाधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा. यह कदम स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह कार्रवाई भविष्य के चुनावों में उम्मीदवारों को जिम्मेदारी के साथ खर्च का हिसाब रखने के लिए प्रेरित करेगी और चुनावी व्यवस्था में अनुशासन लाने में सहायक सिद्ध होगी.

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