मनपा पार्षदों के निर्वाचन का नोटिफिकेशन हुआ जारी

नवनिर्वाचित प्रत्याशी अब अधिकारिक रुप से मनपा के पार्षद घोषित

* नोटिफिकेशन जारी होते ही अब एक माह के भीतर पार्षदों को करना होगा गट स्थापित
* विभागीय आयुक्त के समक्ष गट स्थापना को लेकर करना होता है दावा, जरुरत पडने पर होती है पार्षदों की परेड
* पूरे पांच वर्ष तक अस्तित्व में रहेगा गट, गट में शामिल सदस्यों पर लागू होगा गट प्रमुख का व्हीप
* गट नेता के पास स्थायी सहित अन्य समिति सदस्यों व स्वीकृत पार्षदों को नामित करने का अधिकार
अमरावती/दि.21 – हाल ही में हुए महानगरपालिका चुनाव में शहर के 22 प्रभागों की 87 सीटों से विजेता रहकर पार्षद निर्वाचित हुए विजयी प्रत्याशियों के निर्वाचन को लेकर गत रोज मनपा प्रशासन द्वारा अधिकारिक अधिसूचना यानि नोटिफिकेशन को औपचारिक रुप से जारी कर दिया गया है. इसके साथ ही नवनिर्वाचित प्रत्याशी अब आधिकारिक रूप से मनपा के पार्षद घोषित हो गए हैं. इस नोटिफिकेशन के जारी होते ही अब सभी पार्षदों को एक माह के भीतर अपने-अपने गट (दल/समूह) स्थापित करना अनिवार्य होगा. गट स्थापना के लिए विभागीय आयुक्त के समक्ष दावा प्रस्तुत करना होता है. यदि किसी गट को लेकर विवाद या संदेह उत्पन्न होता है, तो आवश्यकतानुसार पार्षदों की परेड भी करवाई जाती है. एक बार गट स्थापित हो जाने के बाद वह पूरे पांच वर्षों तक अस्तित्व में रहेगा. गट में शामिल सभी सदस्यों पर गट प्रमुख द्वारा जारी व्हीप लागू होगा, जिसका पालन करना अनिवार्य रहेगा. इसके अलावा, गट नेता को स्थायी समिति सहित अन्य विभिन्न समितियों में सदस्यों व स्वीकृत पार्षदों को नामित करने का अधिकार प्राप्त होगा. इससे आगामी कार्यकाल में मनपा की राजनीति और प्रशासनिक निर्णयों में गटों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी.
* गट स्थापना क्यों है महत्वपूर्ण?
बता दें कि, स्थानीय स्वायत्त निकायों में कम संख्या में रहनेवाले किसी पार्टी के पार्षदों अथवा निर्दलीय पार्षदों की जमकर होनेवाली खरीद-फरोख्त यानि ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ को रोकने के लिए प्रांतिक मनपा अधिनियम 2008 में वर्ष 2012 के दौरान कुछ संशोधन किए गए थे. जिसके तहत मनपा के सदन में अलग-अलग पार्टियों के पार्षदों को एक साथ मिलकर एक गट में शामिल होने से संबंधित प्रावधान किया गया था. ताकि पूरे पांच वर्ष के दौरान किसी एक गुट में शामिल पार्षदों में एकरुपता व समरसता बनी रहे तथा हर बार महापौर व उपमहापौर पदों के चुनाव सहित स्थायी समिति एवं विषय समितियों में सदस्यों को नामित करते समय राजनीतिक सौदेबाजीयों के लिए कोई स्थान न रहे. ऐसे में कहा जा सकता है कि, इस तरह के गट केवल औपचारिक समूह नहीं होते, बल्कि मनपा के सत्ता संतुलन का आधार होते हैं. एक बार गट स्थापित हो जाने पर वह पूरे पांच वर्ष तक अस्तित्व में रहता है और उस गट में शामिल रहनेवाले सभी सदस्य उस गट प्रमुख के निर्देशों यानी व्हीप से बंधे होते हैं. व्हीप का उल्लंघन करने पर दलबदल कानून के तहत कार्रवाई भी संभव होती है, जिससे पार्षद की सदस्यता तक खतरे में पड़ सकती है.
* समितियों पर नियंत्रण की कुंजी
गट नेता को स्थायी समिति सहित अन्य सभी महत्वपूर्ण समितियों में अपने गट के सदस्यों व स्वीकृत पार्षदों को नामित करने का अधिकार होता है. चूंकि स्थायी समिति मनपा की वित्तीय, प्रशासनिक और विकास योजनाओं पर निर्णायक भूमिका निभाती है, इसलिए गट स्थापना के माध्यम से सत्ता का वास्तविक नियंत्रण तय होता है. यही कारण है कि चुनाव परिणाम के बाद राजनीतिक दलों के भीतर और दलों के बीच जोड़-तोड़, समझौते और रणनीतिक बैठकों का दौर तेज हो जाता है. कई बार निर्दलीय और छोटे दलों के पार्षदों की भूमिका ‘किंगमेकर’ जैसी हो जाती है, जिससे सत्ता समीकरण पलट सकते हैं.
* स्वीकृत व समिति सदस्यों के कोटे में मिलता है अतिरिक्त लाभ
बता दें कि, मनपा की कुल सदस्य संख्या के 10 फीसद अनुपात में स्वीकृत पार्षद नामित किए जा सकते है. जिसके चलते 87 सदस्यीय अमरावती महानगर पालिका में 9 स्वीकृत सदस्य चुने जा सकते है. चूंकि इस समय अमरावती महानगर पालिका किसी भी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है और अमरावती की जनता द्वारा दिए गए ‘खिचडी’ जनादेश की वजह से मनपा के सदन में ‘हंग असेंबली’ वाली स्थिति है. जिसकी वजह से सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी सदस्य संख्या के दम पर अपने इक्का-दुक्का स्वीकृत सदस्य ही चुनकर ला सकती है. साथ ही आगे चलकर जब 16 सदस्यीय स्थायी समिति सहित अन्य विषय समितियों में पक्षीय बलाबल के अनुसार विभिन्न पार्टियों की सदस्य संख्या का कोटा तय होगा, तब भी अपनी मौजूदा सदस्य संख्या के मद्देनजर सभी पार्टियों को काफी माथापच्ची करनी पडेगी. ऐसे समय अलग-अलग पार्टियों द्वारा साथ आकर एक बडा गट बना लेने पर उस गट की सदस्य संख्या के अनुसार स्वीकृत सदस्यों सहित स्थायी समिति व अन्य विषय समितियों में सदस्यों को नामित करने हेतु गट की सदस्य संख्या के अनुरुप सदस्य पदों का कोटा तय होगा. जिसे एक तरह से गट में शामिल दलों के लिए अतिरिक्त लाभ कहा जा सकता है. ऐसे में मनपा के पंचवार्षिक कामकाज के लिहाज से गटों के गठन को एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया कहा जा सकता है. क्योंकि एक बार गट स्थापित होने के बाद वह पूरे पांच साल तक अस्तित्व में रहता है और गट में शामिल अलग-अलग पार्टियों के सभी पार्षद गट के नियमों व गट प्रमुख के व्हीप के अधिन होते है. जिससे सदन में स्थिति को काफी हद तक अनुशासनात्मक भी रखा जा सकता है.
* आने वाले दिन होंगे निर्णायक
बता दें कि, अमरावती मनपा के चुनाव में भाजपा को 25, युवा स्वाभिमान पार्टी को 15, कांग्रेस को 15, एमआईएम को 12, अजीत पवार गुट वाली राकांपा को 11, शिवसेना (शिंदे) को 3, बसपा को 3, शिवसेना (उबाठा) को 2 एवं वंचित बहुजन आघाडी को 1 सीट हासिल हुई है तथा 87 सदस्यीय मनपा के सदन में 25 सीटे हासिल करते हुए भाजपा सबसे बडी पार्टी साबित हुई है. जिसके साथ युवा स्वाभिमान पार्टी, शिंदे सेना, बसपा व वंचित बहुजन आघाडी के सदस्य मिलकर मनपा में अपनी सत्ता स्थापित करने हेतु दावा कर सकते है, ऐसी संभावना बनती दिखाई दे रही है. हालांकि इसके लिए इस गठबंधन में शामिल होनेवाले दलों के लिए जरुरी होगा कि, वे विभागीय आयुक्त के समक्ष खुद को एक गुट के तौर पर प्रस्तुत करे और फिर आयुक्त के समक्ष मनपा में सत्ता स्थापित करने हेतु अपना दावा पेश करे. उस समय विभागीय आयुक्त द्वारा जरुरत पडने पर गट की तस्दीक करने हेतु गट में शामिल रहनेवाले सभी पार्षदों को अपने समक्ष उपस्थित रहने के लिए भी कहा जा सकता है. जिसे आम बोलचाल में ‘परेड’ भी कहा जाता है. ऐसे में अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कौन सा दल या गठबंधन कितने पार्षदों के साथ गट स्थापित करता है और किसके पास स्थायी समिति का नियंत्रण जाता है. यही समीकरण तय करेगा कि अगले पांच वर्षों तक मनपा में विकास कार्यों की दिशा, बजट प्राथमिकताएं और प्रशासनिक फैसले किसके हाथ में रहेंगे. इस प्रकार, नोटिफिकेशन जारी होना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मनपा की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत है, जहां गट राजनीति शहर के भविष्य की रूपरेखा तय करेगी.

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